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सिखों की राजनीति में भी उतरी आम आदमी पार्टी, सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव में उतारा पंथक दल

दिल्ली में 26 फरवरी को होने वाले गुरुद्वारा कमेटी के चुनाव में इस बार आम आदमी पार्टी से जुड़ा गुट भी मैदान में है।

Punjab Poll, Punjab Assembly Electionsआप संयोजक अरविंद केजरीवाल और आप नेता भगवंत मान। (फोटो- PTI)

दिल्ली में 26 फरवरी को होने वाले गुरुद्वारा कमेटी के चुनाव में इस बार आम आदमी पार्टी से जुड़ा गुट भी मैदान में है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी के 4 सिख विधायकों ने विधानसभा चुनाव जीता था, जिनमें से एक विधायक जरनैल सिंह पंजाब विधानसभा चुनाव में भी मैदान में हैं। दिल्ली विधानसभा की चार सीटों पर सिख विधायकों की जीत के बाद आम आदमी पार्टी अब गुरुद्वारा कमेटी के चुनाव में भी कदम रख रही है। दिल्ली की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी के सिखों की राजनीति में कूदने से इस बार चुनाव और दिलचस्प हो गया है।

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनावों को लेकर नामांकन की प्रक्रिया 1 फरवरी से शुरू हो गई है। नामांकन 8 फरवरी तक भरे जा सकते हैं। नामांकन पत्रों की छंटाई 9 फरवरी को होगी और नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 11 फरवरी है। मतदान 26 फरवरी को होगा और वोटों की गिनती 1 मार्च को होगी। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव 46 वार्डों में होंगे और मतदान 560 मतदान केंद्रों पर होगा। यह चुनाव 23 रिटर्निंग आॅफिसरों की देखरेख में होगा और चुनावी गतिविधियों पर 25 आॅर्ब्ज्वर भी निगाह रखेंगे। दिल्ली में कुल 3,80,091 सिख मतदाता हैं, उनमें से 1,92,691 पुरुष और 1,87,400 महिला मतदाता हैं। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव 3000 हजार कर्मचारी करवाएंगे। इन चुनावों को लेकर गुरुद्वारा चुनाव निदेशालय और दिल्ली पुलिस ने एक विशेष नियंत्रण कक्ष भी बनाया है। किसी भी तरह की चुनावी गड़बड़ी की शिकायत इन नियंत्रण केंद्रों पर की जा सकती है। इन चुनावों को लेकर आदर्श आचार संहिता भी लागू कर दी गई है।

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पिछल चुनाव में 4,11,526 मतदाता थे। इस बार मतदाताओं की संख्या काफी कम होने की वजह दिल्ली के हजारों सिखों का इन चुनावों से दूर रहना है। पिछले चुनावों में मंजीत सिंह जीके गुट को भारी सफलता हासिल हुई थी। उनके सामने मुख्य प्रतिद्वंद्वी परमजीत सरना गुट के सिर्फ 8 प्रत्याशी जीते थे। उन चुनावों के बाद सरना के करीबी बलदेव सिंह (विवेक विहार), कुलदीप सिंह (करोल बाग) और जितेंद्र सिंह (लाजपत नगर) उनका साथ छोड़ गए थे। बाद में वे धीरे-धीरे फिर से सरना गुट में शामिल हो गए। पिछले चुनावों में दशमेश गुट और यूके गुट भी एक साथ चुनावी मैदान में थे। इस बार के चुनाव में अलग तरह की राजनीति हो रही है। इस बार मंजीत सिंह जीके गुट, परमजीत सिंह सरना गुट, भाई रंजीत सिंह गुट, पंथक दल, आम आदमी अकाली दल गुट और भाई बलदेव सिंह बढ़ाला गुट चुनावी मैदान में है। आम आदमी पार्टी ने भी पंथक दल बनाकर उसका प्रमुख कालका जी से विधायक हरमीत सिंह को बनाया है। पार्टी सूत्र बताते हैं कि ये गुट दिल्ली की सभी 46 सीटों पर चुनाव लड़ रहा है। दिल्ली की अकाली राजनीति से जुड़े लोगों का मानना है कि मंजीत सिंह जीके गुट पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का है और वह दिल्ली में भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ता है। परमजीत सिंह सरना गुट को कांग्रेस के ज्यादा करीबी माना जाता है।

पंजाब में शनिवार को हुए चुनावों को लेकर परमजीत सिंह सरना कांग्रेस के उम्मीदवार कैप्टन अमरिंदर सिंह का प्रचार भी करने गए थे। उधर पंथक दल तो खुलकर खुद को आम आदमी पार्टी से जुड़ा हुआ बताता है। दिल्ली के सिखों के होने वाले चुनावों को लेकर यहां की राजनीति नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद शुरू होगी। पंजाब में चुनाव संपन्न हो गए हैं। अब दिल्ली के सिख नेताओं का डेरा दिल्ली में जमेगा और राजधानी के सिख बहुल इलाकों में चुनावी शोर सुनाई देगा।

 

 

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