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परिवार, सरकार और ‘बाहरी’

सपा पार्टी के मतभेद को लेकर नेताओं के बयान....

मुझे मिले टिकट वितरण का अधिकार
मुझे प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने पर खराब लगा, और आपने उसका असर भी देखा। सपा एक परिवार है और पार्टी में कोई मतभेद नहीं है। यह कुर्सी की लड़ाई है। मैं चाहता हूं कि आगामी विधानसभा चुनाव के टिकट वितरण का अधिकार मुझे दिया जाए। मैं तो कहता हूं कि मैं चाचा को सारे विभाग वापस दे दूंगा, लेकिन टिकट वितरण का अधिकार अपने पास रखूंगा, क्योंकि चुनाव में परीक्षा तो मेरी ही होनी है। यह चुनाव का समय है और हमें एक साथ आकर काम करना चाहिए। रामगोपाल यादव, अखिलेश और शिवपाल यादव के बीच कोई झगड़ा नहीं है। आप सभी जानते हैं कि वह बाहरी व्यक्ति कौन है। मैंने नेताजी (मुलायम) से कह दिया है कि अगर हम दोनों के बीच में कोई बाहरी व्यक्ति आता है तो उसे बाहर कर दिया जाएगा। अगर कोई मसला होता है तो नेताजी उसका समाधान करेंगे और सभी लोग उसे मानेंगे। बेटा होने के नाते नेताजी के निर्णय को स्वीकार करना मेरी जिम्मेदारी है। मैं प्रजापति को मंत्रिमंडल में वापस लेने के नेताजी के फैसले को स्वीकार करता हूं। चाचा (शिवपाल) भी जानते हैं, कि हमने उन्हें (सिंघल) क्यों हटाया। हमने तो सपा में कौमी एकता दल का विलय कर दिया होता, लेकिन तब मीडिया हम पर आरोप लगाता।
-अखिलेश यादव, मुख्यमंत्री

जोड़ने से ही मजबूती
सबको जोड़ने से ही संगठन को मजबूती मिलेगी। मैंने बहुत पहले से कहा है कि जितने भी लोहियावादी, गांधीवादी और चौधरी चरण सिंह को मानने वाले हैं, वे सब एकजुट हों। नेताजी ने जो भी फैसला किया, किसे पार्टी में शामिल करेंगे, हटाएंगे, किसे जिम्मेदारी देंगे उनकी बात काटने की किसी की हैसियत नहीं है। नेताजी ने जो जिम्मेदारी दी है मुझे स्वीकार है। 2011 में हम प्रदेश अध्यक्ष थे, तब भी इसी तरीके से मुझे हटाकर अखिलेश को अध्यक्ष बनाया गया था, तब मैंने भी स्वीकार किया था, लेकिन मुझे यह नहीं पता था कि मुझे इतनी जल्दी अध्यक्ष बना दिया जाएगा। मैंने अपने विभागों में पूरा काम कर दिया है। विभागों से बड़ी जिम्मेदारी संगठन की है। चुनाव में सभी कार्यकर्ताओं को लगाना है, फिर से सरकार बनानी है। अब हमारे लिए विभाग जरूरी नहीं है। जरूरी यह है कि हमें एक रहना चाहिए, चुनाव का वक्त है। 2017 में फिर से सरकार बनानी है।
-शिवपाल सिंह यादव

नेताजी सरल…‘बाहरी’ का काम
मुख्यमंत्री ने मौजूदा हालात के लिए बाहरी व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराया था। उनका क्या मतलब था, यह तो अखिलेश ही बता सकेंगे, लेकिन इतना जरूर है कि कुछ ऐसे लोग, जिन्हें पार्टी से कोई लगाव नहीं है, वे नेताजी की सरलता का नाजायज फायदा उठाते हैं। ऐसे लोग, जिन्हें पार्टी से कोई लगाव नहीं है, वे नेताजी की सरलता का लाभ उठाकर पार्टी का नुकसान करते हैं। वे सपा को गर्त में ले जाना चाहते हैं। एक साहब ने नेताजी की सरलता का लाभ उठाकर पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई का प्रभारी बनवाया था, जबकि सपा के संविधान में प्रभारी पद का कोई प्रावधान नहीं है। अमर सिंह हर बार कहते हैं कि वे मुलायमवादी हैं, समाजवादी नहीं। जब कोई समाजवादी ही नहीं है, तो किस बात का मुलायमवादी। उनकी यही सोच है कि पार्टी जाए भाड़ में, उनका काम बने। देखिए, कैसे वक्त पर उन्होंने बात का यह बतंगड़ बना दिया। कुछ देर के लिए चीजें भड़कीं, लेकिन जल्द ही सब सही हो जाएगा।
-रामगोपाल यादव, सपा के राष्ट्रीय महासचिव

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