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पीएम मोदी की भाषा को लेकर असदुद्दीन ओवैसी और आरएसएस में जुबानी जंग

मोदी ने रविवार को भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा था, ''उन्‍हें न पुरस्‍कृत करें न तिरस्‍कृत, बस उन्‍हें सशक्‍त बनाए।''

Author नई दिल्‍ली | September 27, 2016 9:33 AM
एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी। (पीटीआई फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केरल के कोझिकोड में भाजपा की राष्‍ट्रीय काउंसिल की बैठक में अल्‍पसंख्‍यकों के लिए इस्‍तेमाल किए गए ‘परिष्‍कृत’ शब्‍द पर असदुद्दीन ओवैसी और आरएसएस आमने-सामने हैं। ऑल इंडिया मजलिस ए इत्‍तेहादुल मु‍सलमीन(एआईएमआईएम) चीफ ओवैसी ने कहा कि यदि परिष्‍कृत से मोदी का मतलब सशक्तिकरण था तो उनकी सरकार जो वे कह रहे हैं वह नहीं कर रही है। उन्‍होंने पूछा, ”हिंदी में परिष्‍कृत का मतलब शुद्धता होता है। लेकिन मुसलमानों को भाजपा से शुद्धता नहीं चाहिए। यदि उनका मतलब स‍शक्तिकरण था तो उनकी सरकार कुंडु कमिटी की सिफारिशों को लागू क्‍यों नहीं कर रही है। जाटों और पटेलों को ताकत दी जा रही है लेकिन महाराष्‍ट्र में हाईकोर्ट के आरक्षण पर आदेश के बावजूद मुसलमानों के साथ ऐसा नहीं हो रहा।”

वरिष्‍ठ आरएसएस विचारक राकेश सिन्‍हा ने हालांकि इससे अलग राय रखी। उन्‍होंने कहा, ”परिष्‍कृत से मतलब है कि मुसलमानों को पुरानी मानसिकता से निकलना होगा और खुद को भारतीय संस्‍कृति में ‘अन्‍य’ समझना बंद करना होगा। उन्‍हें खुद को परखना होगा और इस्‍लाम से पहले की भारतीय परंपरा और संस्‍कृति को अपनाना होगा।” मोदी ने रविवार को भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा था, ”उन्‍हें न पुरस्‍कृत करें न तिरस्‍कृत, बस उन्‍हें परिष्‍कृत बनाए।” उन्‍होंने जनसंघ के पूर्व अध्‍यक्ष दीनदयाल उपाध्‍याय का जिक्र करते हुए यह बयान दिया था।

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राकेश सिन्‍हा ने कहा, ”जो लोग मोदीजी पर उनके भाषण के लिए हमला कर रहे हैं मैं उनसे जनवरी 1948 में नेहरु का अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में दिया भाषण पढ़ने को कहूंगा। इसमें उन्‍होंने मुसलमानों से कहा था, क्‍या आप भारत की सांस्‍कृतिक और बौद्धिक पंरपरा में विश्‍वास करते हैं? क्‍या आप इससे उत्‍साहित हैं या इससे अलग मानते हैं? संस्‍कृति की मांग है कि मुसलमानों को भारत की अखंड और बौद्धिक परंपरा को अपनाना चाहिए।” ओवैसी ने कहा,”हमें पता है वे किसके(दीनदयाल उपाध्‍याय) पक्षधर थे। उन्‍होंने एकात्‍म मानववाद में इस्‍लाम के भारतीयकरण की टर्म दी थी और कहा था कि मुस्लिमों का विश्‍वास नहीं किया जा सकता। साथ ही उन्‍होंने ऊर्दू का विरोध किया था।

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