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दिल्ली में ट्रैफिक जाम से लगता है सालाना 600 अरब रुपए का चूना

इतना ही नहीं अगर इसपर ध्यान नहीं दिया गया तो 2030 तक यह नुकसान सालाना 98 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा।

Author नई दिल्ली | February 5, 2017 10:35 AM
दिल्ली के ट्रैफिक की एक तस्वीर

दिल्ली की सड़कों पर लगते हुए जाम के बारे में हम सभी बहुत अच्छी तरह से जानते है। जहां किसी जगह की दूरी दस मिनट की होती है वहां दिल्ली की सड़कों पर लगते इस जाम के चलते लोगों को अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचने में आधा घंटा या उससे भी ज्यादा समय लग जाता है। इस जाम के चलते सालाना 60 हजार करोड़ रुपए का चूना लगता है। इतना ही नहीं अगर इसपर ध्यान नहीं दिया गया तो 2030 तक यह नुकसान सालाना 98 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा। आईआईटी मद्रास द्वारा किए गए शोध केअनुसार जाम के चलते ईंधन, प्रॉडक्टिविटी, वायु प्रदूषण और रोड दुर्घटनाओं में बहुत बड़ा नुकसान होता है।

शोध के मुताबिक दिल्ली की सड़कों पर रैंगते इस जाम के चलते 60 हजार करोड़ रुपए सालाना नुकासन होता है। सबसे ज्यादा नुकसान जाम के चलते बसों में फंसे यात्रियों से प्रॉडक्टिविटी लॉस का होता है। जाम के चलते लोग अपने गंतव्य स्थान पर समय से नहीं पहुंच पाते जिसके चलते उन्हें भी भारी नुकासन उठाना पड़ता है। पिछले साल से सड़कों और फ्लाइओवरस् में काफी बढ़ोत्तरी हुई है लेकिन फिर भी जाम कम होता दिखाई नहीं देता। आपको बता दें कि गुड़गांव, फरीदाबाद, नोएडा और गाजियाबाद को जोड़ने वाले फ्लाइओवर और सड़को पर ज्यादा जाम रहता है क्योंकि इन्हीं जगहों पर लोग सबसे ज्यादा नौकरी करने के लिए आते-जाते है। सुबह और शाम के समय पीक आवर होने के कारण दिल्ली की सड़कों पर सबसे ज्यादा जाम होता है। शोध का यह भी कहना है कि जैसे-जैसे दिल्ली की सड़कों पर गाड़ियों की संख्या बढ़ रही है उसे देखकर यह हिसाब लगाया जा सकता है कि 2030 तक जाम की वजह से होने वाले इस नुकसान की संख्या 98 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगी।

शोधकर्ताओं में से एक हैरी रेमंड जोज़फ का कहना है कि 2012 में आईआईएम कलकत्ता द्वारा किए एक शोध में बताया गया था कि कैसे नेशनल हाइवों पर जाम की वजह से सालाना 60 हजार रुपए करोड़ का नुकसान हो रहा है। यही शोध देश की राजधानी का भी है जो कि 2012 में किए गए शोध से मिलता-जुलता है।

देखिए वीडियो - गणतंत्र दिवस की फुल ड्रेस रिहर्सल के चलते दिल्ली में लगा भारी ट्रैफिक जाम

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