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‘आरएमएल अस्पताल ने जान बूझकर अहमद के बारे में जानकारी देने में देरी की’

कुछ विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया है कि लोकसभा में चूंकि बजट पेश किया जाना था, इसलिए अधिकारियों ने जान बूझकर अहमद के निधन के बारे में देर से ऐलान किया।

Author नई दिल्ली | February 3, 2017 8:40 PM
सांसद ई अहमद के निवास पर श्रद्धांजलि देते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो: ANI)

लोकसभा सदस्य ई.टी. मोहम्मद बशीर ने शुक्रवार (3 फरवरी) को कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री ई.अहमद के परिजनों समेत उनके साथ गए तमाम लोगों को राम मनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) ने उनकी सेहत के बारे में जानकारी देने में अंतहीन प्रतीक्षा कराई। डॉक्टर उनकी सेहत को लेकर कोई जानकारी नहीं दे रहे थे। पूर्व विदेश राज्य मंत्री ई.अहमद का निधन पहली फरवरी को हुआ। इसी दिन लोकसभा में आम बजट पेश किया गया था। बशीर ने कहा, “डॉक्टर किसी को भी ट्रॉमा सेंटर में नहीं जाने दे रहे थे, जहां अहमद को रखा गया था। कोई डॉक्टर वहां से बाहर भी नहीं आ रहा था और अहमद की सेहत को लेकर कोई जानकारी भी नहीं दी जा रही थी।”

कुछ विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया है कि लोकसभा में चूंकि बजट पेश किया जाना था, इसलिए अधिकारियों ने जान बूझकर अहमद के निधन के बारे में देर से ऐलान किया। अहमद को गत मंगलवार को उस वक्त दिल का गंभीर दौरा पड़ा जब वह संसद में राष्ट्रपति का अभिभाषण सुन रहे थे। उनके साथ अस्पताल जाने वालों में बशीर भी थे। उन्होंने अस्पताल में बिताए समय को भयावह बताया। अहमद को पहले आरएमएल के आईसीयू में भर्ती किया गया। उसके बाद उन्हें ट्रॉमा सेंटर में शिफ्ट कर दिया गया। बशीर का कहना है कि डॉक्टर और सुरक्षाकर्मी वहां आने वाले सांसदों और अहमद के परिजनों तक से अच्छा व्यवहार नहीं कर रहे थे। उन्होंने कहा, “रात 8, 8.30 बजे अहमद की बेटी और दामाद आए। दोनों डाक्टर हैं। बेटी ने पिता को देखने की इच्छा जताई लेकिन उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। हम सब परेशान हो उठे थे।”

बशीर ने कहा, “इसके बाद हम अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट (एमएस) से मिले। उन्हें बताया कि अहमद की बेटी डाक्टर है। वह मर्ज और इलाज को समझ सकेगी। कम से कम उसे अंदर जाने दिया जाए। एमएस ने सहमति जताई और कहा कि हम लोग जाएं, वह स्टाफ को कह देंगे कि हमें अंदर जाने दे।” उन्होंने कहा, “लेकिन, हम जब वहां पहुंचे तो सुरक्षाकर्मी ने हमें रोक दिया। उसने कहा कि एमएस से कोई निर्देश नहीं मिला है। हमने एमएस को फोन मिलाया, उन्होंने फोन नहीं उठाया। मैं फिर भागकर एमएस के दफ्तर में गया, वहां कोई नहीं था।” उन्होंने कहा कि आधी रात के बाद एक डाक्टर आया और उसने परिजनों से कहा कि एक टेस्ट यह देखने के लिए हो रहा है कि ‘क्या दिमाग जीवित है’। इसके बाद डेढ़ घंटे तक कुछ नहीं बताया गया। बशीर ने कहा, “रात का कोई डेढ़ बज रहा था। एक डॉक्टर आया और अहमद की बेटी को अंदर ले गया। बेटी ने उन्हें देखा। वह जा चुके थे।” बशीर ने पूछा, “मुझे यकीन है कि वह पहले ही मर चुके थे, फिर उन्होंने हमें कुछ बताया क्यों नहीं?”

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