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JNU छात्र संघ चुनाव से पहले ABVP ने दिखाई मुजफ्फरनगर दंगों पर फ़िल्म, डायरेक्टर ने कहा- एक हिंदू लड़की को मुसलमान लड़के ने उठाने की धमकी दी थी

'पत्रकार में इतनी हिम्मत होनी चाहिए कि वो सच को दिखाए कि एक हिन्दू लड़की को एक मुसलमान लड़के ने उठा ले जाने की धमकी दी थी।'

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देश के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय जेएनयू में छात्रसंघ चुनाव पर नजर गड़ाये एबीवीपी ने विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों को मुज़फ्फरनगर दंगों पर आधारित एक डॉक्युमेंट्री फिल्म दिखाई। एबीवीपी का मानना है कि ये फिल्म 2013 में हुए दंगे की सही तस्वीर पेश करती है। पत्रकार विवेक सिन्हा ने ‘मुज़फ्फरनगर आखिर क्यों?’ नाम से 36 मिनट की ये फिल्म बनाई है। डायरेक्टर के मुताबिक ये फिल्म ये बताने की कोशिश करती है कि मुजफ्फरनगर के दंगे क्यों हुए और इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि ये हिंसा छेड़छाड़ से शुरू हुई थी जिसे जान बूझकर साम्प्रदायिक रंग दिया गया। फिल्म के बारे में बताते हुए विवेक सिन्हा कहते हैं कि 27 अगस्त 2013 को शाहनवाज नाम के लड़के ने गौरव और सचिन की बहन को धमकी दी कि वो उन्हें किडनैप कर लेगा। विवेक सिन्हा ने आगे कहा, ‘अब शाहनवाज मुसलमान है तो हम कुछ नहीं कर सकते इस बात में। अगर गौरव और सचिन हिन्दू थे तो इसमें किसी पत्रकार की गलती नहीं है। हां, पर पत्रकार में इतनी हिम्मत होनी चाहिए कि वो सच को दिखाए कि एक हिन्दू लड़की को एक मुसलमान लड़के ने उठा ले जाने की धमकी दी थी।’

विवेक सिन्हा ने आगे कहा, ‘अगर आपके घर में मां है, बहन है, बेटी है, भाभी है, क्या आप बर्दाश्त करेंगे कि वो बाहर निकले तो कोई उनपर छींटाकशी करे, छेड़छाड़ करे, गैंगरेप भी करले, या उठा ले जाने की धमकी दे। अगर कोई ऐसा कहता है तो आप क्या करेंगे उस दौरान? कोई आदमी कैसे रिएक्ट करेगा?’ निर्देशक ने कहा कि इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच टकराव से बात बढ़ी और दंगे हुए। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को दबाने की कोशिश और जॉली नहर पर 7 सितंबर 2013 को हिन्दू महापंचायत पर कथित रुप से हमले की वजह से ही वो इस फिल्म को बनाने पर मजबूर हुए।

बता दें कि अगस्त 2015 में मुजफ्फरनगर बाकी नाम के एक डॉक्युमेंट्री फिल्म को जेएनयू में दिखाने की इजाजत नहीं दी गई थी। मंगलवार को एबीवीपी के सौरभ शर्मा ने कहा कि जेएनयू छात्रों को सच्चाई बताया जाना जरूरी है। ये फिल्म बताती है कि कैसे एक हिन्दू महिला को प्रताड़ित किया गया फिर मुसलमानों द्वारा दंगे जैसे हालात पैदा किये गये। दूसरे छात्र संगठनों ने एबीवीपी को ये फिल्म दिखाये जाने की इजाजत देने पर सवाल उठाए हैं। जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष मोहति पांडेय ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा, ‘एबीवीपी से नया ज्ञान सुनने को मिला, लड़कियों को तंग करने से दंगा होता है, कितनी बेशर्मी से महिलाओं की सुरक्षा को साम्प्रदायिक रुप दिया जा रहा है, जब वर्निका कुंडू का पीछा विकास बराला ने किया था तब कौन सी कम्युनिटी के खिलाफ दंगा करें।’

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