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मैली यमुना में डुबकी लगाएंगे लाखों छठ व्रती

यमुना एक्शन प्लान से लेकर अन्य योजनाओं के नाम पर इस नदी की सफाई के नाम पर अब तक अरबों रुपए बहा दिए गए लेकिन यमुना का मैल नहीं धुल पाया। c

Author नई दिल्ली | October 23, 2017 02:51 am
जानिए क्या है छठ पूजा की विधि।

पुरबिया गंवई माटी की सांस्कृतिक पहचान कहे जाने वाले भगवान भास्कर के प्रति अगाध आस्था के महापर्व छठ पूजा पर एक बार फिर राजधानी में रहने वाले लाखों पूर्वांचलवासी मैल से बजबजाती यमुना में डुबकी लगाने को मजबूर होंगे। यमुना एक्शन प्लान से लेकर अन्य योजनाओं के नाम पर इस नदी की सफाई के नाम पर अब तक अरबों रुपए बहा दिए गए लेकिन यमुना का मैल नहीं धुल पाया।  सरकार की ओर से और निजी तौर पर भी नदी किनारे महाआरती जरूर हो रही है लेकिन इसकी सफाई को लेकर कोई बड़ा अभियान नहीं शुरू हो रहा। आम आदमी पार्टी के बागी विधायक व पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि अगर सूबे की सरकार ने नदी की सफाई की दिशा में कदम नहीं उठाए तो वे सड़क पर उतरेंगे। शनिवार को यमुना किनारे दो-दो जगह महाआरती का आयोजन किया गया। अगले हफ्ते होनेवाली छठ पूजा के मद्देनजर सरकार ने करीब छह सौ छठ घाटों पर पूजा के आयोजन का इंतजाम किया है।

सरकार के विकास मंत्री और आम आदमी पार्टी के दिल्ली के संयोजक गोपाल राय ने खुद ही अलग-अलग घाटों पर घूमकर इन तैयारियों का जायजा लिया। दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी भी छठ पूजा की तैयारियों का जायजा ले रहे हैं। लेकिन इन तैयारियों का यमुना की सफाई से कोई लेना-देना नहीं है। पूर्व केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में यह स्वीकार किया था कि मौजूदा रफ्तार से यमुना की सफाई में 15 साल का वक्त लगेगा। उन्होंने यह भी कहा था कि यमुना की 80 फीसद गंदगी के लिए दिल्ली के 18 नालों से इस नदी में गिरने वाली गंदगी जिम्मेदार है। हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण राज्यमंत्री महेश शर्मा ने कहा कि यमुना की सफाई के लिए सरकार के साथ समाज का सहयोग भी जरूरी है।

बहरहाल, गनीमत यही है कि पड़ोसी हरियाणा ने एक बार फिर छठ पूजा के मद्देनजर यमुना में अतिरिक्त पानी छोड़ने की हामी भर दी है। अतिरिक्त पानी आ जाने से गंदगी कुछ कम जरूर हो जाती है। इसके बावजूद यह हकीकत है कि हृदय में सूर्य देव के प्रति हिलोरें मारती आस्था का सागर लिए राजधानी में रहने वाले लाखों लोग एक बार फिर से उसी मैल से बजबजाती यमुना में डुबकी लगाएंगे।

 

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