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निर्वाचन आयोग का दिल्ली सरकार को निर्देश, योजनाओं के इश्तहारों से हटाएं ‘आम’

केजरीवाल सरकार की आम आदमी मोहल्ला क्लीनिक और आम आदमी बाईपास एक्सप्रेस सेवा आदि उन सभी योजनाओं को शामिल किया गया है जिनके नाम में ‘आम’ शब्द शामिल है।

Author नई दिल्ली | March 23, 2017 4:35 AM
आम आदमी पार्टी।

दिल्ली निर्वाचन आयोग ने दिल्ली सरकार और नगर निगमों को निर्देश दिया है कि दिल्ली सरकार की योजनाओं के विज्ञापनों और नाम-पट्टिकाओं में ‘आम’ शब्द के प्रयोग को आचार संहिता का उल्लंघन बताने वाली भाजपा नेता की शिकायत पर ‘समुचित कार्रवाई’ करें। दिल्ली के मुख्य सचिव और तीनों नगर निगमों के आयुक्तों को लिखे पत्र में आयोग ने कार्रवाई किए जाने से संबंधित रिपोर्ट भी मांगी है। वहीं, आम आदमी पार्टी ने इस आदेश को राजनीति से प्रेरित और एकतरफा करार देते हुए राष्ट्रीय चुनाव आयोग को पत्र लिखकर राज्य सरकार और पार्टी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए जाने की मांग की है।  राज्य निर्वाचन आयोग ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव और तीनों निगम आयुक्तों को 21 मार्च को जारी पत्र में कहा है, ‘चुनावी आचार संहिता 14 मार्च, 2017 शाम पांच बजे से प्रभावी है। इसलिए, आपसे अनुरोध किया जाता है कि आप इस संबंध में समुचित कार्रवाई करें और 48 घंटों के भीतर आयोग को कार्रवाई रिपोर्ट सौंपें’। इसमें केजरीवाल सरकार की आम आदमी मोहल्ला क्लीनिक और आम आदमी बाईपास एक्सप्रेस सेवा आदि उन सभी योजनाओं को शामिल किया गया है जिनके नाम में ‘आम’ शब्द शामिल है।

अप्रैल 22 को होने वाले नगर निगम चुनाव के मद्देनजर दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता की अगुआई में दिल्ली भाजपा के शिष्टमंडल ने 18 और 20 मार्च को राज्य निर्वाचन आयुक्त एसके श्रीवास्तव से मिलकर लिखित अनुरोध किया था कि वह मोहल्ला क्नीनिक सहित आप सरकार द्वारा चलाई जाने वाली विभिन्न योजनाओं के संबंध में लगाए गए होर्डिंग, बिलबोर्ड, बैनरों और नामपट्टिकाओं से ‘आम’ शब्द हटाने या उसे ढकने का निर्देश दें। विजेंद्र गुप्ता की दलील है कि दिल्ली विधानसभा की एक सीट के लिए उपचुनाव क्षेत्र और तीनों निगम क्षेत्रों में चुनावी आचार संहिता प्रभावी है और सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी को चुनाव में अपने सरकारी पद का लाभ नहीं मिलना चाहिए। उधर, आम आदमी पार्टी के दिल्ली संयोजक दिलीप पांडे ने राज्य चुनाव आयोग को पत्र सौंप कर राज्य सरकार और आप का पक्ष सुने जाने की मांग की है। आयोग को लिखे पत्र में आप ने आरोप लगाया है कि आयोग का ‘आम आदमी’ शब्द हटाने का आदेश एकतरफा है और राजनीतिक नेताओं के निर्देशों का पालन करके आयोग के अधिकारियों ने संविधान को कुचलने का प्रयास किया है। आप ने अपने पत्र में कहा है, ‘एक राजनीतिक दल को खुश करने के लिए आयोग ने उचित प्रक्रिया का पालन किए बगैर मुख्य सचिव को आदेश दे दिया जबकि उचित प्रक्रिया के तहत राज्य सरकार और आम आदमी पार्टी को नोटिस जारी कर उनका पक्ष सुना जाना चाहिए था। चुनावों के दौरान भाजपा नेता के आदेश का अनुपालन तय करने के लिए चुनाव आयोग की तरफ से सरकार के मुख्य सचिव को आदेश देना संविधान के अपमान के समान है क्योंकि संविधान स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के कर्तव्य के बारे में बताता है’।

 

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