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जल्द लौटेगी प्रगति मैदान की खोई हुई खूबसूरती

एनबीसीसी ने प्रगति मैदान के मौजूदा स्थल पर ही विश्वस्तरीय प्रदर्शनी स्थल और कन्वेंशन सेंटर बनाने का फैसला किया है।

Author नई दिल्ली | September 20, 2016 4:24 AM
प्रगति मैदान।

पुस्तक मेले सहित कई अन्य आयोजनों के गवाह बनने वाले प्रगति मैदान के दिन जल्द ही फिरने वाले हैं। मेट्रो निर्माण और ग्रेटर नोएडा में कुछ चीजों को स्थानांतरित करने के बाद प्रगति मैदान की खोती जा रही खूबसूरती को लौटाने के लिए राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) और इंडिया ट्रेड प्रमोशन आॅर्गनाइजेशन (आइटीपीओ) के बीच करार हुआ है।

एनबीसीसी ने प्रगति मैदान के मौजूदा स्थल पर ही विश्वस्तरीय प्रदर्शनी स्थल और कन्वेंशन सेंटर बनाने का फैसला किया है। इसके साथ ही स्टेट आॅफ द आर्ट परिसर में तब्दील होने वाले प्रगति मैदान के मौजूदा जगह से हटने की चर्चा पर भी विराम लग जाएगा। प्रगति मैदान को अत्याधुनिक और वातानुकूलित बनाने का काम दो चरणों में 24 से 30 महीने में पूरा हो जाएगा और इस पर 2254 करोड़ रुपए की लागत आएगी। एनबीसीसी के प्रबंध निदेशक व अध्यक्ष डॉ अनूप कुमार मित्तल ने बताया कि प्रगति मैदान को अत्याधुनिक बनाने के बाद भैरों मार्ग और मथुरा रोड पर लगने वाली भीड़ को काबू करने के लिए भूमिगत पार्किंग, फ्लाईओवर और सुरंग बनाने का फैसला किया गया है। इससे रिंग रोड पर यातायात प्रभावित नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि प्रगति मैदान के नवीनीकरण के बाद यहां प्रदर्शनी, मेला, व्यापारिक गतिविधियां, बैठकें और संगोष्ठी आयोजित करने वाले इसे विश्वस्तरीय स्थल के रूप में पाएंगे और उन्हें किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होगी। दो चरणों में बनने वाले प्रगति मैदान के पहले चरण में 3,26,065 वर्गमीटर क्षेत्र विकसित होगा, जिसमें प्रदर्शनी स्थल, कन्वेंशन सेंटर, बेसमेंट पार्किंग और प्रशासनिक ब्लॉक शामिल हैं। नए स्थल पर 7000 लोगों के एक साथ बैठने के लिए कन्वेंशन सेंटर, 3000 लोगों के लिए प्लेनरी हाल और 4000 लोगों के लिए पार्टी हॉल बनाया जाएगा। पहला चरण तैयार होने के बाद एक साथ यहां आने वाले 4800 लोगों के लिए पार्किंग की भी सुविधा होगी। निर्माण के दूसरे चरण में 86,255 वर्गमीटर इलाके में प्रदर्शनी स्थल, बेसमेंट सहित अन्य निर्माण होंगे।
एनबीसीसी ने दिल्ली के तीनों नगर निगमों, पुरातत्त्व विभाग, रेलवे, दिल्ली मेट्रो और दिल्ली सरकार के साथ नई योजनाओं पर चर्चा करने के बाद मौजूदा 23 राज्यों के पवेलियन और केंद्रीय मंत्रालयों के हाल नंबर-एक से छह और हाल नंबर-14, 15 और 18 को तोड़ने की कवायद शुरू कर दी है।

तय किया गया है कि जब तक पहला चरण पूरा नहीं हो जाता और दूसरे चरण का काम शुरू नहीं हो जाता, तब तक मौजूदा वातानुकूलित हॉल नंबर-7 से 12 ए और इनसे जुड़ी प्रदर्शनी स्थलों को नहीं छेड़ा जाएगा। आइटीपीओ से करार के बाद एनबीसीसी ने सलाहकार नियुक्त कर पुराने निर्माण को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सितंबर से शुरू इस प्रक्रिया को कुछ दिनों के लिए आगे बढ़ाया गया ताकि इस साल होने वाली प्रदर्शनी और अन्य कार्यक्रम पहले की तरह चलते रहें। मित्तल का कहना है कि उनकी कंपनी कोई भी काम हाथ में लेने से पहले उसकी खूबसूरती और पुराने रूपों का अध्ययन करती है, तब जाकर नई साज सज्जा के रूप में उसे विकसित करने का बीड़ा उठाती है। सुप्रीम कोर्ट के सामने और दिल्ली के मध्य में स्थित प्रगति मैदान का काम हाथ में लेने से पहले भी उसके सारे बिंदुओं को ध्यान में रखा गया है।

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