धुंध से डरे गगनचुंबी इमारतों के खरीदार

अकेले नोएडा में ही 150 मीटर से ऊंची करीब आधा दर्जन से ज्यादा ऊंची इमारतें बनाई जा रही हैं।

Unicef air pollution, Delhi air pollution, Delhi Pollution, Unicef Delhi Pollution, Unicef Delhiदिवाली पर दिल्ली में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर को पार कर गया था।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बन रहीं गगनचुंबी इमारतों में फ्लैटों की बुकिंग कराने वालों के लिए हालिया धुंध ने बड़ी परेशानी पैदा कर दी है। अकेले नोएडा में ही 150 मीटर से ऊंची करीब आधा दर्जन से ज्यादा ऊंची इमारतें बनाई जा रही हैं। ज्यादा ऊंचाई वाले फ्लैटों को विशेष तरजीह इसलिए दी जाती थी, ताकि आसपास के वातावरण का पूरा दृश्य वहां रहने वालों को दिखाई दे। जानकारों के अनुसार पिछले साल धुंध करीब 300 मीटर की ऊंचाई पर रही थी। इस मर्तबा हवा के नहीं चलने, पंजाब में खेतों में पराली जलाने और दीपावली की आतिशबाजी के धुएं के निकल नहीं पाने की वजह से यह करीब 120 मीटर के आसपास अटकी हुई है। प्रॉपर्टी कारोबारियों का मानना है कि इस तरह के हालात के कारण 150 मीटर से ज्यादा ऊंची इमारतों के खरीदारों में कमी आएगी। जिस वजह से हजारों करोड़ रुपए की परियोजनाओं की बिक्री पर असर पड़ने की आशंका है।
वहीं नोएडा प्राधिकरण ने सड़कों और निर्माणाधीन स्थलों के आसपास पानी का छिड़काव शुरू किया है। करीब 120 मीटर की ऊंचाई पर धुंध और धुएं के मिश्रण को और नीचे आने से रोकने के लिए पानी का छिड़काव करने का फैसला किया गया है ताकि निर्माण स्थलों और सड़कों पर इकट्ठा हुई मिट्टी को वाहनों के आने- जाने पर उड़ने से रोका जा सके। रविवार को प्राधिकरण ने टैंकरों से पानी पहुंचाकर छिड़काव कराया है। इसी कड़ी में आने वाले दिनों में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए एयर प्यूरीफायर लगाने की योजना पर भी अधिकारी काम कर रहे हैं। पहले चरण में बाजारों, भीड़भाड़ वाले इलाकों में एअर प्यूरीफायर लगाए जाएंगे। प्राधिकरण सीईओ पीके अग्रवाल ने प्राथमिकता के आधार पर एअर प्यूरीफायर लगाने की योजना को जल्द लागू करने के निर्देश दिए हैं।
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पिछले दिनों की तरह रविवार को भी शहर पूरी तरह से धुंध की चादर में ढंका रहा। हालांकि पीएम-2.5 के स्तर में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन पीएम-10 का मानक अभी भी पांच गुना अधिक 500 से ज्यादा बना हुआ है। इस वजह से वातावरण में हल्के और भारी कणों के आपस में मिलने से वातावरण में सघन धुंध बन चुकी है। उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, पीएम-2.5 का स्तर 366 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर है, जो सामान्य से करीब 4 गुना ज्यादा है। लगातार स्मॉग की वजह से आंखों में शुष्कता, लाली, जलन, दम घुटने, खांसी व खराश की दिक्कतें लोगों को झेलनी पड़ रही हैं। जिसके कारण आंखों में खुजली, दर्द के रोगियों की संख्या बढ़ गई हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक दिल्ली एनसीआर में करीब 3.4 लाख पुराने वाहन चल रहे हैं। जिनसे निकलने वाला धुआं मौजूदा हालात को और ज्यादा बिगाड़ रहा है। मौसम वैज्ञानिक रणजीत सिंह ने बताया कि अगले कुछ दिनों तक अमूमन ऐसे ही हालात रहेंगे। अलबत्ता हवा के रुख में बदलाव होने से फौरी तौर पर कुछ राहत संभव है।
 

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