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दिल्ली: रानी खेड़ा में कचरा डाले जाने के विरोध में 20 गांव के लोग हुए लामबंद

बाहरी दिल्ली स्थित मुंडका के रानी खेड़ा और आसपास के करीब 20 गांवों के लोग इलाके में डंपिंग ग्राउंड बनाने के खिलाफ आंदोलन के फैसले पर अडिग हैं।

Author नई दिल्ली | September 5, 2017 03:44 am
दिल्ली: गाजीपुर में कचरे का पहाड़ टूटा।

बाहरी दिल्ली स्थित मुंडका के रानी खेड़ा और आसपास के करीब 20 गांवों के लोग इलाके में डंपिंग ग्राउंड बनाने के खिलाफ आंदोलन के फैसले पर अडिग हैं। इस मामले में कोई कोताही न बरतते हुए स्थानीय लोगों ने रात को भी ग्राउंड पर पहरेदारी की ताकि निगम वहां कूड़ा न डाल सके।  आंदोलनकारियों का साथ देने के लिए और नए सेनेटरी ग्राउंड बनाए जाने के खिलाफ तीन और गांवों के निवासी भी सोमवार से लामबंद हुए हैं। किसानों ने वहां बैठकें शुरू कर दी हैं। सोमवार को सांसद उदित राज भी यहां पहुंचे और आंदोलनकारियों को संबोधित किया।

इससे पहले स्थानीय विधायक और निगम पार्षद यहां धरना में शामिल हो चुके हैं।  मुंडका के पास रानी खेड़ा गांव बीते तीन दिनों से गांव वालों का आंदोलन स्थल बन चुका है। नगर निगम ने गाजीपुर और भलस्वा लैंडफिल में कूड़ा डंपिंग बंद कर रानीखेड़ा में नया डंपिंग ग्राउंड बना दिया है। जिसके खिलाफ करीब 20 गांव के लोग और आसपास की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले आंदोलन पर उतर आए हैं। रविवार को वहां डंप करने के लिए कूड़ा लेकर आए 50 ट्रकों को यहां रुकने नहीं दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि खेती की जमीन को कूड़ा घर में तब्दील करने का फरमान देने के पीछे प्रशासन का क्या तर्क है यह समझ नहीं आता है। आंदोलन में शामिल विजेंद्र डबास के मुताबिक जो ट्रक कूड़ा लेकर आए थे उनमें जानवरों के सिर और मांस के लोथड़े थे। इसके फोटोग्राफ हमने राजनिवास को भेज दिए हैं। लोगों का कहना है कि कूड़े के नाम पर मांस के लोथड़े को यहां डालकर हम अपने जीवन के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे। सोमवार से आसपास के गांववाले भी डंपिंग ग्राउंड पर धरना में शामिल होने पहुंचे।

यूनिटी फॉर डेवलेपमेंट के अध्यक्ष आनंद राणा के मुताबिक देहाती इलाकों में डंपिंग ग्राउंड बनने से पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो सकता है और गांव की साफ हवा खतरनाक तरीके से दूषित हो जाएगी। हमने मुख्यमंत्री तक जानकारी पहुंचाई है कि रानीखेड़ा को डंपिंग ग्राउंड बनाने से कितने गांवों, पुनर्वास व अनधिकृत कॉलोनियों में प्रदूषण फैलेगा। दूसरी ओर रानी खेड़ा जैसा आंदोलन कुछ और गांवों में फैलने की संभावना दिखने लगी है। दिल्ली देहात के तीन गांव हमीदपुर, पल्ला और बख्तावरपुर में भी सरकार ने डंपिंग ग्राउंड बनाने के लिए जमीन अधिग्रहित की है। फिलहाल वहां कूड़ा डालने का कोई आदेश जारी नहीं हुआ है लेकिन रानी खेड़ा प्रकरण ने इन गांव के लोगों को भी लामबंद करना शुरू कर दिया है। हमीदपुर गांववालों का कहना है कि इस मसले को लेकर शीघ्र की तीनों गांवों के अलावा अन्य गांववालों की बैठक बुलाई जा रही है, जिसमें शासन को चेतावनी दी जाएगी कि वह इन इलाकों में कूड़ा डालने की कोशिश न करें, वरना यहां भी आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा। यहां कूड़ा डाला गया तो पास में गुजर रही यमुना प्रदूषित हो जाएगी। गांववासियों का कहना है कि यदि यहां कूड़ा डाला जाएगा तो यहां के आसपास के करीब एक दर्जन गांव और इतनी ही संख्या में बनी कॉलोनियों बर्बाद हो जाएंगी। बताते चलें कि डंपिंग साइट के आसपास लगभग एक लाख की आबादी है।

 

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