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किताबों की बस्ती में बिस्मिल्लाह के साथ शुुरू होते हैं राम

फैजल कहते हैं राम सिर्फ हिंदुओं के देवता नहीं हैं बल्कि वे गंगा-जमुनी सभ्यता के प्रतीक हैं।
Author नई दिल्ली | January 7, 2018 02:56 am
प्रगति मैदान में किताबों की बस्ती में एक खिड़की खुली है रामपुर रजा लाइब्रेरी की।

प्रगति मैदान में किताबों की बस्ती में एक खिड़की खुली है रामपुर रजा लाइब्रेरी की। इसके काउंटर पर बैठे फैजल खान पाठकों से एक बार फारसी से हिंदी में अनुवादित व संपादित रामायण देखने के लिए कहते हैं। वे बताते हैं कि इस रामायण के शुरू के तीन पन्ने फारसी भाषा में सोने के पानी से लिखे गए हैं। इस रामायण का पहला शब्द ‘बिस्मिल्लाह’ है। आप इस रामायण को लेकर इतने भावुक क्यों हैं? इस सवाल पर फैजल कहते हैं राम सिर्फ हिंदुओं के देवता नहीं हैं बल्कि वे गंगा-जमुनी सभ्यता के प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि सुमेर चंद ने 1715 में वाल्मीकि के रामायण को फारसी में अनूदित किया था। बाद में इसका हिंदी अनुवाद किया गया। इसके साथ ही फैजल एक किताब दिखाते हैं जिसमें बाबर के दस्तखत हैं।
फारसी की रामायण के अलावा संस्कृत की किताबों को भी दर्शक उलटते-पुलटते मिले। कोई पंचतंत्रम तो कोई चारुदत्तम व हर्षचरितम का जायजा लेता मिला। इससे पहले एनबीटी के निदेशक बल्देव भाई शर्मा ने उद्घाटन सत्र में बताया कि संस्कृत की किताबों पर हम काम कर रहे हैं। पहली ‘गांधी तत्त्व शतकम’ प्रकाशित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि संस्कृत विश्व की प्राचीनतम भाषाओं में जानी जाती है। इसके प्रसार के लिए वाराणसी में राष्टÑीय संस्कृत पुस्तक मेले का आयोजन किया गया था जिसमें 25 से ज्यादा संस्कृत भाषा के प्रकाशक आए थे।

प्रदूषण, पर्यावरण और हाशिया
इस बार मेले का केंद्र बिंदु जलवायु परिवर्तन है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के स्टॉल पर पर्यावरण से जुड़ी किताबों को पलटने में दर्शक व्यस्त थे। वाणी प्रकाशन की निदेशक अदिति माहेश्वरी गोयल से जब प्रदूषण और किताब के बाबत बात की तो उन्होंने के वनजा की लिखी ईको-फेमिनिज्म दिखाई। अदिति ने कहा कि हिंदी साहित्य और पर्यावरण का रिश्ता अभी भी छायावादी ही है। हिंदी साहित्य को अब इससे नए तरीके से संवाद करना ही होगा। इस कड़वे सच से साहित्य का सामना होगा ही। अदिति ने कहा कि हिंदी पट्टी की तुलना में दक्षिण भारत का साहित्य इस मसले पर गंभीर लेखन कर रहा है। पर्यावरणविद सुनीता नारायण ने उद्घाटन सत्र में कहा कि किताबें हमारी मित्र होती हैं, किताबें दिशा दिखाती हैं कि हम कैसे आगे बढ़ें। साहित्य और पर्यावरण के कदमताल की जरूरत बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे हमारी समझ बढ़ेगी, हमें यह पता चलेगा कि आने वाले समय में हमें क्या करने की जरूरत है। अगर पर्यावरण का विनाश होगा तो विकास कैसा होगा। अगर हमारे शहर के अंदर यह हालत है कि हम सांस ही नहीं ले पा रहे हैं तो हमारा क्या होगा। शहरीकरण और औद्योगीकरण की राह क्या होगी इस पर बात करनी ही होगी।

जहां खो जाती है कविता की प्रतिबद्धता
राजकमल प्रकाशन के स्टॉल पर कवि केदारनाथ सिंह ने अपनी पुस्तक प्रतिनिधि कविताएं में से कविता पाठ किया और पाठकों से बातचीत की। केदारनाथ सिंह ने बताया कि कविताओं की दुनिया एक ऐसी दुनिया है जिसमें रंग, रोशनी, रूप, गंध, दृश्य एक-दूसरे में खो जाते हैं, पर यही दुनिया है, जिसमें कविता का ‘कमिटमेंट’ खो जाता है। अनीता राकेश ने अपनी किताब ‘अंतिम संतरे’ पर परिचर्चा की। राजकमल प्रकाशन और स्टोरीटेलिंग आॅडियो बुक भी लेकर आया है।

 

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