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संजीव चतुर्वेदी, अंशु गुप्ता को ‘रमन मैग्सेसे अवॉर्ड’ से नवाजा जाएगा

एशिया के रमन मैग्सेसे अवॉर्ड के लिए इस बार प्रतिष्ठित हमारे देश के दो भारतीयों के नाम का चयन किया गया है। आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी और अंशु गुप्ता को इस साल मैग्सेसे अवॉर्ड से सम्मानित करने का फैसला किया है।

Author July 29, 2015 1:41 PM
रमन मैग्सेसे अवॉर्ड के लिए दो भारतीयों का चयन

एशिया के रमन मैग्सेसे अवॉर्ड के लिए इस बार प्रतिष्ठित हमारे देश के दो भारतीयों के नाम का चयन किया गया है। आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी और अंशु गुप्ता को इस साल मैग्सेसे अवॉर्ड से सम्मानित करने का फैसला किया है। संजीव चतुर्वेदी एम्स के चीफ विजिलेंस अफसर और भ्रष्टाचार के मामलों के खुलासों के लिए हमेशा चर्चा में रहे हैं। अंशु गुप्ता एनजीओ गूंज की संस्थापक हैं।

संजीव चतुर्वेदी देश के दूसरे सर्विंग ब्यूरोक्रेट हैं जिन्हें ये पुरस्कार दिया गया है। बताते चलें कि इससे पहले किरण बेदी को भी सेवा में रहते ये प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला था। 2002 बैच के वन सेवा के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी एम्स में कई भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर करने के लिए जाने जाते हैं और पिछले साल जब उन्हें एम्स के सीवीओ पद से हटाया गया तो बड़ा विवाद हुआ था। चतुर्वेदी मूलत: हरियाणा कैडर के अफसर हैं। वहां भी उन्होंने भ्रष्टाचार के कई मामलों को उजागर किया था।

2002 बैच के वन सेवा अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को रैमन मैग्सेसे अवॉर्ड दिया गया है। वह दूसरे ब्यूरो क्रैट्स हैं, जिन्हें इस अवॉर्ड से नवाजा गया। इससे पहले किरण बेदी को यह अवॉर्ड दिया गया था। चतुर्वेदी एम्स में कई भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर करने के लिए जाने जाते हैं और पिछले साल जब उन्हें एम्स के सीवीओ पद से हटाया गया तो बड़ा विवाद हुआ था।

आपको बता दें कि चतुर्वेदी मूलत: हरियाणा केडर के अफसर हैं। वहां भी उन्होंने भ्रष्टाचार के कई मामलों को उजागर किया। अंशु गुप्ता एनजीओ गूंज के संस्थापक हैं। यह संस्था गरीबों की जरूरतें पूरी करती है। एनजीओ ‘गूंज’ का काम है शहरों में अनुपयोगी समझे गए सामानों को गांवों में सदुपयोग के लिए पहुंचाना।

देश के 21 राज्यों में गूंज संस्था के संग्रहण केंद्र काम कर रहे हैं। 2007-08 में संजीव ने झज्जर में एक हर्बल पार्क के निर्माण में हुए घोटाले का पर्दाफाश किया, जिसमें मंत्री और विधायकों के अलावा कुछ अधिकारी भी शामिल थे।

इसके अलावा संजीव ने बतौर सीवीओ एम्‍स में अपने दो साल के कार्यकाल में 150 से ज्‍यादा भ्रष्‍टाचार के मामले उजागर किए। 2014 में उन्हें स्‍वास्‍थ्‍य सचिव ने ईमानदार अधिकारी का तमगा दिया था। तो 2009 में इन्होंने हरियाणा के झज्जर और हिसार में वन घोटालों का पर्दाफाश किया।

इसी साल संजीव पर एक जूनियर अधिकारी संजीव तोमर को प्रताड़ित करने का आरोप लगा, हालांकि बाद में वह आरोप मुक्त हो गए। इस तरह के उनके कई सराहनीय कार्यों को ध्यान में रखते हुए उन्हें इस साल के इस प्रतिष्ठित अवॉर्ड के लिए चुना गया है। जो उनके लिए बहुत बड़े सम्मान की बात है।

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