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राखी ने बढ़ाई बसपा-इनेलो गठबंधन की मजबूती

चौटाला उन्हें अगले महीने पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी देवीलाल की जयंती पर 25 सितंबर को गोहाना में होने वाली इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) की रैली में शामिल होने का निमंत्रण देने उनके निवास पर पहुंचे थे।

Author नई दिल्ली, 22 अगस्त। | August 24, 2018 7:58 AM
हरियाणा में दलित मतदाताओं की बड़ी संख्या में मौजूदगी के मद्देनजर बसपा सुप्रीमो मायावती सूबे की सियासत में बेहद अहम बन गई हैं।

अजय पांडेय

 

करीब 16 साल पहले, मायावती ने सीनियर बीजेपी नेता लालजी टंडन को राखी बांधी थी। उस वक्त बीजेपी के समर्थन से मायावती यूपी की सीएम बनी थीं और टंडन यूपी कैबिनेट में मंत्री थे। सूत्र बताते हैं कि गठबंधन टूटने के बाद मायावती ने टंडन को राखी बांधना बंद कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, मायावती ने मुरली मनोहर जोशी को भी राखी बांधी थी। बात 1995 की है, जब वह बीजेपी के समर्थन से पहली बार सीएम बनी थीं। गठबंधन खत्म होने के बाद मायावती ने इन नेताओं को राखी नहीं बांधी। टंडन दो दिन पहले ही बिहार के गवर्नर बनाए गए हैं।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को हरियाणा विधानसभा में विपक्ष के नेता अभय सिंह चौटाला को राखी बांधी। चौटाला उन्हें अगले महीने पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी देवीलाल की जयंती पर 25 सितंबर को गोहाना में होने वाली इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) की रैली में शामिल होने का निमंत्रण देने उनके निवास पर पहुंचे थे। सूबे में बसपा व इनेलो के बीच हुए चुनावी गठबंधन के मद्देनजर दोनों दलों के नेताओं के बीच रक्षाबंधन की यह औपचारिकता अहम करार दी जा रही है। अभय सिंह चौटाला ने कहा कि चूंकि उन्हें विदेश यात्रा पर रवाना होना है और वे रक्षाबंधन के त्योहार पर मौजूद नहीं रह पाएंगे इसीलिए भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक यह त्योहार उन्होंने पहले ही मना लिया। उन्होंने कहा कि इसे किसी चुनावी राजनीति से नहीं जोड़ना चाहिए क्योंकि भाई-बहन का रिश्ता जन्म-जन्मांतर का होता है। उन्होंने बताया कि मायावती ने उनका निमंत्रण स्वीकार कर लिया है और वे अगले महीने हो रही इनेलो की रैली में शिरकत करेंगी।

हरियाणा में दलित मतदाताओं की बड़ी संख्या में मौजूदगी के मद्देनजर बसपा सुप्रीमो मायावती सूबे की सियासत में बेहद अहम बन गई हैं। आलम यह है कि आगामी लोकसभा व विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बसपा के साथ चुनावी समझौता करने को लेकर इनेलो व कांग्रेस के बीच होड़ मच रही है। इनेलो ने पहले ही मायावती के साथ चुनावी गठबंधन कर लिया है, वहीं कांग्रेस नेता व हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हाल ही में चंडीगढ़ में कहा कि लोकसभा और कई राज्यों के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस के साथ बसपा का राष्ट्रीय स्तर पर समझौता हो रहा है। ऐसे में हरियाणा में भी यदि कांग्रेस व बसपा एकसाथ आ जाएं तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी। उन्होंने ऐसे संकेत भी दिए कि कांग्रेस व बसपा के मिलने की सूरत में जाहिर तौर पर इनेलो व बसपा का गठबंधन टूट जाएगा। हालांकि हरियाणा से ताल्लुक रखने वाले अन्य नेताओं ने सूबे में मायावती से किसी किस्म के गठबंधन की संभावना को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि वहां कांग्रेस अकेले ही भाजपा व इनेलो को चुनौती देने में सक्षम है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस महीने की शुरुआत में राजधानी में पत्रकारों के साथ एक अनौपचारिक मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद उनके करीबी नेताओं ने स्पष्ट कहा कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के अलावा उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का मायावती से गठबंधन लगभग तय हो चुका है। उनका कहना था कि गठबंधन की रूप रेखा क्या होगी इसका खुलासा वक्त आने पर किया जाएगा। सियासी जानकारों का यह मानना है कि देश के बदले सियासी मंजर का यह असर है कि आज मायावती की सियासी बैसाखी की जरूरत सबको महसूस हो रही है। उत्तर प्रदेश में बसपा की धुर विरोधी समाजवादी पार्टी ने उससे हाथ मिलाया तो अब कांग्रेस लगभग पूरे देश में उसके साथ चुनावी गठबंधन करने को बेकरार है।

(एक्‍सप्रेस इनपुट के साथ) 

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