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आतंकवादियों के खिलाफ सुरक्षा बलों को सभी जरूरी कदम उठाने की छूट

केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों के हाथ खोल दिए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रविवार को वहां चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन ऑल आउट’ पर से पाबंदी हटाते हुए आतंकवादियों के खिलाफ सुरक्षा बलों का अभियान फिर शुरू करने की घोषणा कर दी।

Author नई दिल्ली, 17 जून। | June 18, 2018 5:35 AM
बीते एक महीने में आतंकवादी घटनाएं बढ़ीं, सुरक्षाबलों के कई सिपाही हताहत हुए। पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या कर दी गई। पाकिस्तान की तरफ से भी हमले हुए।

केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों के हाथ खोल दिए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रविवार को वहां चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन ऑल आउट’ पर से पाबंदी हटाते हुए आतंकवादियों के खिलाफ सुरक्षा बलों का अभियान फिर शुरू करने की घोषणा कर दी। यह एलान करते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने साफ कहा कि आतंकवादियों को रोकने के लिए सुरक्षा बलों को सभी जरूरी कदम उठाने की छूट है। जम्मू-कश्मीर में आतंक और हिंसा से मुक्त माहौल बनाएंगे। केंद्र सरकार ने 17 मई को निर्णय लिया था कि रमजान के दौरान जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बल आतंकवादियों के खिलाफ अभियान नहीं चलाएंगे। हालांकि, आतंकवादियों का हमला होने पर सुरक्षा बलों को कार्रवाई की छूट थी। सुरक्षा अभियानों पर एकतरफा रोक के दौरान घाटी में आतंकवादी वारदातों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। श्रीनगर की खबर के मुताबिक गंदरबल जिले में एक मानसबल पार्क में रविवार को हुए विस्फोट में पांच लोग घायल हो गए।

उधर केंद्र द्वारा रमजान के दौरान सैन्य अभियानों पर रोक के फैसले के बावजूद आतंकवादी और पत्थरबाज अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आए। रमजान के महीने में कई बार पत्थरबाजों ने सेना के जवानों पर हमला किया। सीमा पार से पाकिस्तान ने भी जमकर गोलीबारी की। दो बड़ी घटनाएं हुर्इं। आतंकवादी समीर टाइगर को मार गिराने के अभियान में शामिल रहे सेना के जवान औरंगजेब को अगवा कर आतंकियों ने मौत के घाट उतार दिया। औरंगजेब ईद की छुट्टी में अपने घर जा रहे थे। ईद के ही एक दिन पहले कश्मीर के अखबार राइजिंग कश्मीर के संपादक शुजात बुखारी की आतंकवादियों ने हत्या कर दी।

इन दो घटनाओं के बाद केंद्र सरकार पर सैन्य बलों की ओर से बेहद दबाव था कि उन्हें कार्रवाई की छूट दी जाए और सैन्य अभियानों पर रोक का फैसला आगे न बढ़ाया जाए। इस बारे में दो दिन पहले राजनाथ सिंह ने गृह मंत्रालय और सेना के अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की थी और प्रधानमंत्री के साथ हालात की समीक्षा की थी। गृह मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि रमजान के दौरान बार-बार उकसावे के बावजूद संयम बरतने के लिए सरकार ने सुरक्षा बलों की सराहना की। मंत्रालय ने कहा, ‘सरकार, जम्मू-कश्मीर में आतंक व हिंसा मुक्त माहौल बनाने के लिए अपने प्रयास जारी रखेगी। यह जरूरी है कि शांति चाहने वाले हर तबके के लोग एक साथ आएं और आंतकवादियों को अलग-थलग करें और गुमराह लोगों को शांति के पथ पर लौटने के लिए प्रेरित करें।’

गृह मंत्रालय के फैसलों का एलान करते हुए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘इस बात की पूरी उम्मीद थी कि इस पहल (सैन्य अभियानों पर रोक के एलान) की सफलता सुनिश्चित करने में सभी सहयोग करेंगे। इस दौरान सुरक्षा बलों ने उदाहरणीय संयम बरता। जबकि आतंकवादियों ने नागरिकों और सुरक्षा बलों पर अपने हमले जारी रखे, जिसमें कई लोगों की जान गई और कई लोग घायल हुए।’ उन्होंने कहा कि सरकार, जम्मू-कश्मीर में आतंक व हिंसा मुक्त माहौल बनाने को लेकर प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ अभियान फिर शुरू किए जाएंगे। सुरक्षा बलों को आतंकवादियों को हिंसा व हत्याओं से जुड़ी घटनाओं के अंजाम देने से रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया गया है।

सुरक्षा बलों को निर्देश दिया जाता है कि वे आतंकियों को हमलों, हिंसा और हत्याओं से रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएं। केंद्र सरकार हिंसा और आतंक मुक्त जम्मू-कश्मीर के अपने लक्ष्य पर कायम है।        

-राजनाथ सिंह, गृहमंत्री (ट्विटर पर)

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