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सांड ने रोक दी राजधानी एक्सप्रेस की रफ्तार, आधे घंटे तक ट्रैक पर खड़ी रही ट्रेन

घटना के बारे में जानकारी देते हुए फिरोजाबाद रेलवे स्टेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बतलाया कि जब राजधानी करीब 85 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ रही थी तभी रेलवे ट्रैक पर खड़ा सांड ट्रेन की चपेट में आ गया। इस हादसे के बाद लोको पायलट ने ट्रेन को एक हाल्ट पर रोका और उसके इंजन की जांच की गई।

राजधानी एक्सप्रेस। (फाइल फोटो)

दिल्ली आ रही डिब्रूगढ़-राजधानी एक्सप्रेस की रफ्तार शुक्रवार (30-3-2018) को एक सांड की वजह से थम गई। सांड की वजह से राजधानी एक्सप्रेस करीब 1 घंटा 40 मिनट की देरी से दिल्ली पहुंची। बताया जा रहा है कि रेलवे ट्रैक पर घूम रहा एक सांड राजधानी की चपेट में आ गया। यह हादसा सुबह करीब 9 बजे रासोलपुर में अफसाबाद रेलवे क्रॉसिंग के पास हुआ। यह रेलवे क्रॉसिंग फिरोजाबाद रेलवे स्टेशन से करीब तीन किलोमीटर दूर है।

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक घटना के बारे में जानकारी देते हुए फिरोजाबाद रेलवे स्टेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बतलाया कि जब राजधानी करीब 85 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ रही थी तभी रेलवे ट्रैक पर खड़ा सांड ट्रेन की चपेट में आ गया। इस हादसे के बाद लोको पायलट ने ट्रेन को एक हाल्ट पर रोका और उसके इंजन की जांच की गई। करीब 35 मिनट तक चली जांच-पड़ताल के बाद ट्रेन को फिर से रवाना किया गया। राजधानी के देर से पहुंचने की वजह से कुछ यात्रियों को थोड़ी परेशानी भी हुई।

आपको बता दें कि रेलवे ट्रैक पर मवेशियों को आने से रोकने के लिए जनवरी के महीने में, उत्तर मध्य रेलवे ज़ोन के महाप्रबंधक, एम सी चौहान ने इस क्षेत्र के सभी  डीआरएम के साथ एक बैठक की थी और रेलवे अधिकारियों से कहा कि था वे स्थानीय जिला प्रशासन और वन अधिकारियों के साथ बेहतर तालमेल बना कर पशुओं को रेलवे ट्रैक पर आने से रोकने की योजना पर गंभीरता से काम करे। पशुओं को रेलवे ट्रैक पर आने से से रोकने के पैर गश्त को बढ़ावा और चेतावनी के लिए अलार्म सिस्टम बनाने पर भी विस्तृत चर्चा की गई थी।

आपको यह भी बता दें कि पिछले साल फरवरी के महीने में दिल्ली आने वाली कैफियत एक्सप्रेस के चपेट में आने से 18 बैलों की मौत हो गई थी। यह हादसा सिकोहाबाद-करौरा रेलवे स्टेशन के पास हुआ था। इसके बाद ट्रेन काफी समय तक हॉल्ट पर खड़ी रही थी। हर साल अलग-अलग जगहों पर रेल की चपेट में आने से कई पशुओं की मौत हो जाती है। हालांकि विभाग हर बार आवारा पशुओं को रेल ट्रैक पर आने से रोकने की योजनाएं तो बनाता है लेकिन रेलवे ट्रैक पर पशुओं के आने की समस्या अभी भी बरकरार है।

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