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प्रभु ने पूरी नहीं की अलग महिला कोच की आस

रेल बजट देखने से महिलाओं के संदर्भ में जो खास बिंदु नजर आए, वे हैं, हर आरक्षण वर्ग में महिलाओं के लिए 33 फीसद सब-कोटा लागू किया जाएगा, सुरक्षा को देखते हुए ट्रेन के कोच के मध्य भाग में महिलाओं को आरक्षण दिया जाएगा, सभी प्रमुख स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।

सीसीटीवी कैमरों और कोच के मध्य भाग को महिलाओं के लिए आरक्षित करने की घोषणा को महिलाएं सुरक्षा की दृष्टि से एक अच्छा फैसला बता रही हैं। (फाइल फोटो)

रेल बजट को लेकर कामकाजी महिलाओं और गृहणियों की प्रतिक्रिया मिश्रित रही। जहां कुछ महिलाएं सुरक्षा को लेकर किए गए दो-एक प्रावधानों से खुश हैं, वहीं कईयों ने कहा कि सुरेश प्रभु का दूसरा रेल बजट उम्मीदों पर पूरी तरह से खरा नहीं उतरा, काफी कुछ किया जा सकता था, लेकिन बजट में उतना वजन नहीं। मेट्रो की तर्ज पर ट्रेन में अलग से महिला कोच की लंबित मांग पर कोई घोषणा नहीं होने से अकेले सफर करने वालीं महिलाओं ने काफी निराशा जताई। हालांकि, किराए में बढ़ोतरी नहीं किए जाने की सराहना ज्यादातर महिलाओं ने की।

सरसरी तौर पर रेल बजट देखने से महिलाओं के संदर्भ में जो खास बिंदु नजर आए, वे हैं, हर आरक्षण वर्ग में महिलाओं के लिए 33 फीसद सब-कोटा लागू किया जाएगा, सुरक्षा को देखते हुए ट्रेन के कोच के मध्य भाग में महिलाओं को आरक्षण दिया जाएगा, सभी प्रमुख स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। लेकिन महिलाओं का कहना है, ये सारे प्रावधान नाकाफी हैं, उम्मीदें बहुत थीं लेकिन उस पर खरे नहीं उतरे। हालांकि, 33 फीसद सब-कोटा का ज्यादातर महिलाओं ने स्वागत किया। गैर-सरकारी संगठन भागीदारी फांउडेशन की कार्यकारी निदेशक रेणुका सिंह ने कहा, ‘यह सब-कोटा एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन लंबे समय से मांग थी कि दिल्ली मेट्रो के तर्ज पर ट्रेनों में भी महिलाओं, खास कर अकेले यात्रा करने वाली महिलाओं के लिए एक अलग से आरक्षित कोच होना चाहिए’। रेणुका ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि एनजीओ के काम-काज को लेकर अक्सर उन्हें दूर-दराज के इलाकों में जाना पड़ता है, ऐसे में महिलाओं के लिए एक अलग कोच हो तो सफर काफी सुरक्षित और तनावमुक्त हो जाएगा, खासकर आजकल जिस तरह से महिलाओं के प्रति हिंसा बढ़ रही है।

वहीं दिल्ली स्थित केंद्र सरकार के एक विभाग में काम करने वालीं सुनीता बनर्जी (बदला हुआ नाम) का कहना है, ‘हालांकि यह एक प्रगतिशील बजट है, लेकिन बहुत कुछ और किया जा सकता था, 33 फीसद सब-कोटा एक सकारात्मक पहल है’। मूलत: पश्चिम बंगाल की सुनीता को भी काम के सिलसिले में या माता-पिता से मिलने जाने के लिए अक्सर रेल का सफर करना पड़ता है।

सीसीटीवी कैमरों और कोच के मध्य भाग को महिलाओं के लिए आरक्षित करने की घोषणा को महिलाएं सुरक्षा की दृष्टि से एक अच्छा फैसला बता रही हैं। नोएडा स्थित एचसीएल टेक्नोलॉजी में लीड इंजीनियर स्मिता कुमारी ने कहा, ‘मैं रेल बजट के इस पक्ष से काफी खुश हूं’। मूलत: बिहार की रहने वाली स्मिता ने कहा, ‘33 फीसद आरक्षण से महिलाओं को काफी आसानी होगी, क्योंकि महिलाएं बिना आरक्षण सफर करने का जोखिम नहीं उठा सकती हैं, अब कम से कम अकेली सफर करने वाली महिलाओं को आरक्षण मिलने की संभावना बढ जाएगी’। स्मिता के साथ ही काम करने वाली लीड इंजीनियर रेखा वर्मा ने कहा कि अब सुरक्षा को लेकर शायद थोड़ी राहत मिलेगी, निश्चिंत होकर अकेले यात्रा कर सकती हूं।

वहीं घरेलू महिलाएं इस बात से खुश हैं कि रेल किराए में बढ़ोतरी नहीं हुई, साथ ही महिलाओं की सुरक्षा के लिए कुछ तो किया गया। गृहिणी और पार्ट-टाइम कॉलेज शिक्षिका डॉक्टर कविता राज ने कहा, ‘मैं तो रेल यात्रा ज्यादा नहीं करती, लेकिन परिवार में कोई न कोई रेल सफर करता ही रहता है, किराए में बढ़ोतरी से हमारे घर का बजट बिगड़ता। वे 17,000 बॉयो-टॉयलेट और 475 स्टेशनों पर अतिरिक्त टॉयलेट की घोषणा को भी कहीं न कहीं महिलाओं के पक्ष में ही लिया गया कदम बताती हैं। गुरुवार को भागलपुर से दिल्ली आर्इं सुषमा देवी का भी मानना है कि बॉयो-टॉयलेट से स्वच्छता बढ़ेगी, जो महिलाओं के लिए अच्छा है, उन्हें खुद, बच्चों और परिवार के सदस्यों में संक्रमण का डर नहीं रहेगा।

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