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बीएचयू की छात्राओं के समर्थन में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी, कुलपति को हटाने की मांग पर अड़े लोग

बीएचयू के कुलपति ने परिसर में हिंसा की घटना की जांच का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश बीएस दीक्षित जांच दल की अगुआई करेंगे।

Author नई दिल्ली | September 27, 2017 3:10 AM
बीएचयू में लड़कियों पर पुलिस की लाठीचार्ज का विरोध करते समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता।

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में छात्राओं पर हुए लाठीचार्ज के खिलाफ मंगलवार को भी जंतर-मंतर उबलता रहा। आंदोलन में शामिल लोगों के मुताबिक, बीएचयू कुलपति गिरीश चंद्र त्रिपाठी और शहर के पुलिस अधीक्षक को हटाए जाने व उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने तक यह प्रदर्शन जारी रहेगा। मंगलवार देर शाम प्रदर्शनकारियों ने मोमबत्ती मार्च निकाला और बीएचयू के कुलपति के साथ लाठीचार्ज के जिम्मेदार पुलिस अधीक्षक को तुरंत हटाने की मांग की। प्रदर्शनकारी कुलपति की ओर से की गई जांच की घोषणा से संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि जब तक कुलपति पद पर रहेंगे, जांच की निष्पक्षता पर संदेह बना रहेगा। बीएचयू के कुलपति ने परिसर में हिंसा की घटना की जांच का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश बीएस दीक्षित जांच दल की अगुआई करेंगे। हालांकि आंदोलनकारियों ने इसे नकार दिया है। साथ ही उन्होंने बीएचयू में छात्र संघ चुनाव कराने की भी मांग की है।

मंगलवार शाम जंतर-मंतर पर कई विश्वविद्यालयों के छात्रों सहित कई संगठनों के लोगों व बुद्धिजीवियों ने हिस्सा लिया। इसमें जेएनयू के पूर्व शिक्षक व समाजवादी प्रो आनंद कुमार, स्वराज इंडिया के अनुपम, दिल्ली विश्वविद्यालय की नंदिनी सुंदर व एस देशपांडे के अलावा एनएपीएम, आइसा, जेएनयू छात्र संघ, अखिल भारतीय दलित महिला अधिकार मंच, प्रगतिशील महिला संगठन, राष्ट्रीय दलित महिला आंदोलन, केवाईएस, एसएफआइ व एनएसयूआइ जैसे संगठनों के कार्यकर्ताओं ने भी हिस्सा लिया। बता दें कि बीते गुरुवार को बीएचयू में एक छात्रा के साथ छेड़खानी हुई थी। आरोप है कि छात्रा की शिकायत पर कार्रवाई करने की जगह विश्वविद्यालय प्रशासन ने उस पर ही देर शाम तक घूमने का आरोप लगा दिया। प्रशासन के इस रवैये से नाराज छात्राओं ने आंदोलन शुरू कर दिया। मामले ने तूल तब पकड़ा, जब शनिवार रात प्रदर्शन कर रही छात्राओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। इसी मुद्दे को लेकर सोमवार को जंतर-मंतर पर भी प्रदर्शन शुरू हुआ।

प्रदर्शन में शामिल प्रो आनंद कुमार ने कहा कि यह कार्रवाई सत्ता के तानाशाही रवैये को दर्शाती है। देश के एक चोटी के विश्वविद्यालय में छात्र संघ जैसे मंच का न होना चिंता का विषय है। यहां के छात्र अपनी बात कैसे रखेंगे? शायद यही वजह है कि यहां प्रशासन अपनी मनमानी कर गया। उन्होंने बीएचयू में तुरंत छात्र संघ चुनाव कराने की मांग की। स्वराज इंडिया के अनुपम ने इस घटना के लिए बीएचयू व जिला प्रशासन को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि बीएचयू प्रशासन ने पीड़िता की शिकायत पर ध्यान नहीं दिया और न ही स्थिति को सही वक्त पर संभाला।

 

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