ताज़ा खबर
 

देशः रेलवे स्कूलों को बंद करने की कोशिश का मुखर विरोध

केंद्र सरकार अपनी कर्मचारी कल्याणकारी योजनाओं से पूरी तरह हाथ खींचने की तैयारी में है। इसके तहत भारतीय रेलवे अपने सभी स्कूलों को बंद करने की कोशिश में है।

Author नई दिल्ली। | June 13, 2018 5:48 AM
समिति ने कहा है रेलवे का घाटा कम करने के लिए यातायात सेवाओं के अलावा दूसरी गतिविधियों को बंद कर दिया जाए।

केंद्र सरकार अपनी कर्मचारी कल्याणकारी योजनाओं से पूरी तरह हाथ खींचने की तैयारी में है। इसके तहत भारतीय रेलवे अपने सभी स्कूलों को बंद करने की कोशिश में है। हाल में दक्षिण रेलवे ने आदेश देकर दक्षिण के सभी रेलवे स्कूलों में दाखिले की मनाही कर दी थी। हालांकि कर्मचारियों के भारी दबाव के बाद इस आदेश को वापस ले लिया गया लेकिन प्राथमिक स्कूलों को बंद करना लगभग तय हो चुका है। रेलवे के सुधार के नाम पर 2015 में बनी विवेक देवराय समिति की सिफारिशों के आधार पर यह कदम उठाए जा रहे हैं। समिति ने कहा है रेलवे का घाटा कम करने के लिए यातायात सेवाओं के अलावा दूसरी गतिविधियों को बंद कर दिया जाए। इनमें कर्मचारी कल्याणकारी योजानाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य व आवास शामिल हैं। समिति की सिफारिशों के बाद से रेलवे के 125 स्कूलों के रेलकर्मियों के 27216 बच्चों व दूसरे लोगों के 38441 बच्चों के भविष्य पर तलवार लटक रही है।

इसी आधार पर दक्षिण रेलवे ने 30 अप्रैल को आदेश निकाल कर केरल व तमिलनाडु के सभी आठ रेलवे स्कूलों को कहा कि वे नए दाखिले न करें व पढ़ रहे बच्चों के अभिभावकों को समझाएं कि वे अगले सत्र में अपने बच्चों का दाखिला कहीं और करा लें। शिक्षकों को कहा गया कि उन्हें रेलवे में कहीं और नियुक्त कर दिया जाएगा। कुल 6800 बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया। रेलवे यूनियनों के दबाव में 16 मई को फिलहाल नए दाखिले लेने को कह दिया गया। रेलवे के 14 लाख से अधिक कर्मचारियों में फिर भी तीसरे व चौथे समूह के रेलवे के लाखों कर्मचारियों के बच्चों के लिए रेलवे स्कूल उम्मीद की किरण की तरह हैं।

रेलवे के 14 लाख से अधिक कर्मचारियों में करीब 10 -11 लाख तीसरे व चौथे समूह के हैं, जिनमें से करीब 50 फीसद कर्मचारियों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। ट्रैक मेंटेनर विशाल (बदला नाम) के दो बच्चे पश्चिम बंगाल के रेलवे स्कूल में पढ़ते हैं। उन्होने कहा कि यों तो रेलवे से हर कर्मचारी को साल भर में 27000 रुपए बच्चों के शिक्षा भत्ते के तौर पर मिलते हैं छात्रावास के लिए अतिरिक्त। लेकिन कोलकाता में निजी स्कूलों की फीस 60 हजार व बोर्डिंग के मिला कर करीब दो से ढाई लाख सालाना पड़ते हैं। जो हम कर्मचारियों के बूते के बाहर है।

शिक्षक व छात्र न होने की रेलवे की दलील पर आसनसोल में एक अधिकारी ने बताया कि यहां के मिक्सड प्राइमरी स्कूल में 550 बच्चों पर नौ शिक्षक हैं। 12वीं तक के बालिका विद्यालय में 950 बच्चों पर 15 शिक्षक हैं। बालक सीनियर सेकंडरी में 1313 बच्चे व 48 शिक्षक हैं। बताया गया कि इन स्कूलों में से हर साल 10 से 15 बच्चे बोर्ड परीक्षा की मेरिट में आते हैं।
सीनियर स्कूलों को बंद करने का फैसला भले ही टल गया है पर यह कब तक के लिए है, कह नहीं सकते।
-शिवगोपाल मिश्र, महासचिव, आल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन

रेलवे स्कूलों को बंद करने की कोशिश लंबे समय से हो रही है। पहले ही काफी प्राइमरी स्कूल बंद किए जा चुके हैं। मुगलसराय, लालागुड़ा व कई अन्य जगहों पर स्थित माध्यमिक विद्यालय बंद करने की कोशिशें हुई हैं।
– बीसी शर्मा, महासचिव, नेशनल फेडरेशन आफ इंडियन रेलवे
रेलवे में नौकरी को इसलिए अच्छा माना जाता रहा है कि इसमें परिजनों के शिक्षा स्वास्थ्य के इंतजाम रहे। लेकिन निजीकरण के दबाव में इन्हें खत्म किया जा रहा है। जबकि शिक्षा अधिकार कानून के मद्देनजर इन स्कूलों को भी नवोदय व केंद्रीय विद्यालयों की तरह अद्यतन किया जाना चाहिए था।
-प्रो आनंद कुमार, जेएनयू के पूर्व प्रोफेसर, समाज व शिक्षाशास्त्री

यह कदम शिक्षा के बुनियादी अधिकार व बेटी पढ़ाओ मुहिम की अवहेलना है।
-डॉ रंजना कुमारी, सेंटर फॉर सोशल रिसर्च

कहां कितने रेलवे स्कूल

महाराष्ट्र -13 , मध्य प्रदेश-14, पश्चिम बंगाल-13, तमिलनाडु-8, उत्तर प्रदेश-6, तेलंगाना आंध्र प्रदेश-7, -7, उत्तराखंड-1, गुजरात-3, मिजोरम-1, असम-8, बिहार -2

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App