proposal for separate public service commission for NCR passed in delhi assembly - विधानसभा के मानसून सत्र का पहला दिन, सरकार और विपक्ष में जमकर हुई बहस - Jansatta
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विधानसभा के मानसून सत्र का पहला दिन, सरकार और विपक्ष में जमकर हुई बहस

सोमवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के नेता की ओर से बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा उठाने पर हुए हंगामे के बाद उन्हें पूरे दिन के लिए सदन की कार्यवाही से बाहर निकाल दिया गया।

Author नई दिल्ली, 6 अगस्त। | August 7, 2018 6:30 AM
विधानसभा ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए अलग से लोक सेवा आयोग का गठन किए जाने का प्रस्ताव पारित किया।

दिल्ली विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत हंगामेदार रही। सोमवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के नेता की ओर से बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा उठाने पर हुए हंगामे के बाद उन्हें पूरे दिन के लिए सदन की कार्यवाही से बाहर निकाल दिया गया। प्रश्नकाल हालांकि शांतिपूर्ण रहा, लेकिन नियम 280 के विशेष उल्लेख के दौरान भाजपा विधायक ओम प्रकाश शर्मा द्वारा ‘आप’ विधायक अमानतुल्लाह खान के खिलाफ ‘आपत्तिजनक’ शब्द के इस्तेमाल पर भी काफी हंगामा हुआ। इसके कारण सदन की कार्यवाही थोड़ी देर के लिए स्थगित करनी पड़ी और मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेज दिया गया।

उपमुख्यमंत्री ने इस बाबत भाजपा विधायक से माफी मांगने को कहा और वहीं मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर भाजपा पर हिंदू-मुसलिम के मुद्दे पर देश को बांटने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गैर-मौजूदगी में शुरू हुए मानसून सत्र के पहले दिन ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस हुई। नेता विपक्ष को कार्यवाही शुरू होने के 15 मिनट के अंदर ही मार्शलों के जरिए सदन से बाहर करवा दिया गया। नेता विपक्ष विजेंद्र गुप्ता दिल्ली में बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा सदन में उठाना चाह रहे थे, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इसकी इजाजत नहीं दी और नेता विपक्ष को शांति से बैठने की चेतावनी दी।

इसके बाद निर्देश का पालन नहीं किए जाने और सदन की कार्यवाही बाधित करने के लिए अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने नेता विपक्ष को सदन की कार्यवाही से पूरे दिन के लिए बाहर कर दिया। इस शुरुआती हंगामे के बाद प्रश्नकाल शांतिपूर्ण चला, लेकिन नियम 280 के तहत विशेष उल्लेख के दौरान दोबारा हंगामा हुआ। ओम प्रकाश शर्मा अपने विधानसभा क्षेत्र में पानी-सीवर का मुद्दा उठा रहे थे और तभी उन्होंने अधिकारियों की भी आलोचना की। आप विधायक अमानतुल्लाह खान ने जब इसका विरोध किया तो भाजपा विधायक ने उनके लिए ‘आपत्तिजनक’ शब्द का इस्तेमाल किया। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष ने उक्त शब्द को सदन की कार्यवाही से बाहर निकाल दिया, लेकिन सत्ता पक्ष के विधायकों ने इस पर हंगामा जारी रखा।

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी टिप्पणी की कि भाजपा विधायक का उक्त वक्तव्य आपत्तिजनक है, इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, ‘यह एक विधायक का सवाल नहीं है। कोई सदन में इस तरह का शब्द कैसे इस्तेमाल कर सकता है? इससे उनकी पार्टी (भाजपा) की मानसिकता पता चलती है। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।’ इसके बाद आप विधायक विधानसभा अध्यक्ष के आसन के पास पहुंच गए और शर्मा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही लगभग 40 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद बुराड़ी के विधायक संजीव झा ने मामला विशेषाधिकार समिति के पास भेजने का प्रस्ताव दिया जिसका अन्य विधायकों ने समर्थन किया।

आप विधायक भी ओम प्रकाश शर्मा के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते रहे। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी इस मुद्दे पर ट्वीट कर टिप्पणी की और इसे शर्मनाक बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा देश को हिंदू-मुसलमान में बांटना चाहती है, यही पाकिस्तान चाहता है, भाजपा पाकिस्तान के मंसूबे पूरे कर रही है। उन्होंने सवाल किया भाजपा और पाकिस्तानियों का आखिर क्या रिश्ता है?

 

लोक सेवा आयोग के गठन का प्रस्ताव पारित

विधानसभा ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए अलग से लोक सेवा आयोग का गठन किए जाने का प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव में कहा गया है कि दिल्ली में अलग-अलग स्तरों पर अत्यधिक संख्या में रिक्तियों के कारण जनता के कामों में बाधा पहुंच रही है और चयन प्रक्रिया में कई एजंसियों के शामिल होने से रिक्तियों की संख्या बढ़ती जा रही है। दिल्ली सरकार को छह हफ्ते के अंदर इस प्रस्ताव पर काम करते हुए आयोग के गठन की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने को कहा गया है।

विधायक सौरभ भारद्वाज द्वारा प्रस्तुत संकल्प में कहा गया है, ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार इस संकल्प के स्वीकार होने की तिथि से छह सप्ताह की अवधि के दौरान ऐसे आयोग के गठन की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए ताकि शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, परिवहन या अन्य विभिन्न सामान्य क्षेत्रों में सेवाओं को उपलब्ध कराने में कमी अतीत की बात हो जाए और दिल्ली उन सबके लिए रोल मॉडल के रूप में उभरे, जो जनता के लिए अच्छा काम करने के इच्छुक हैं।

संकल्प में आगे कहा गया है कि राजधानी में चयन प्रक्रिया में कई एजंसियां शामिल होने, अत्यधिक कार्यभार और यूपीएससी की तय प्राथमिकताओं के कारण खाली पदों की संख्या साल-दर-साल बढ़ती जा रही है जिससे जनसेवाएं उपलब्ध करवाने में कमी आ रही है और सरकार की स्पष्ट इच्छाशक्ति के बावजूद काफी कठिनाइयां आ रही हैं।

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