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महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को लेकर प्राध्यापक बंटे

स्वायत्त कॉलेज और विश्वविद्यालयों के मुद्दे पर शिक्षक भी दो खेमों में बंटे नजर आ रहे हैं। सरकार के प्रति नरम रुख रखने वाले शिक्षक संगठन जहां इसे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए उठाया गया कदम बताया रहे हैं। वहीं, सरकार के प्रति सख्त रुख रखने वाले इसे उच्च शिक्षा का व्यवसायीकरण और निजीकरण बताने से पीछे नहीं हट रहे हैं।

Author Updated: March 28, 2018 5:17 AM
विश्वविद्यालय खुद ही स्वायत्त होना चाहते थे : प्रोफेसर एके भागी

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की कार्यकारी परिषद (ईसी) के सदस्य और नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (एनडीटीएफ) के अध्यक्ष प्रोफेसर एके भागी का कहना है कि कॉलेजों को पहली बार स्वायत्तता नहीं दी जार रही है बल्कि इसकी शुरुआत 1986 में ही हो गई थी। उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 8 सितंबर 2017 तक देश के 24 राज्यों में 621 कॉलेज स्वायत्त थे। प्रोफेसर भागी के मुताबिक जो राज्य अपने विश्वविद्यालयों को फंड मुहैया नहीं करा पा रहे हैं, उनके लिए स्वायत्तता एक बेहतर विकल्प है।

उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि केरल के राज्य विश्वविद्यालयों में शिक्षकों को अभी भी पांचवां वेतन आयोग के हिसाब से वेतन मिल रहा है। जहां अभी छठा वेतन आयोग ही लागू नहीं हुआ है, वे सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने के बारे में क्या सोचेंगे। ऐसे विश्वविद्यालय खुद ही स्वायत्त होना चाह रहे थे ताकि फंड की कुछ व्यवस्था हो सके। साथ ही उन्होंने कहा कि जिन पांच केंद्रीय विश्वविद्यालयों को सरकार ने स्वायत्तता दी है, उनमें नए पाठ्यक्रम के लिए अगर केंद्र की ओर से फंड नहीं मिलता है तो हम इसका विरोध करेंगे। प्रोफेसर भागी ने कहा कि सरकार ने किसी भी विश्वविद्यालय या कॉलेज को खुद स्वायत्त नहीं किया है। इसके लिए विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की ओर से आवेदन किए गए थे।

नैक के बेहतर ग्रेड वाले विश्वविद्यालय और कॉलेजों को ही स्वायत्तता दी गई है जिसकी वजह से बहुत सारे आवेदन रद्द भी किए गए और सिर्फ 60 संस्थानों को ही स्वायत्त किया गया। ऐसे में जिन विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को पूरी तरह से सरकार से फंडिंग मिल रही है, वे इससे भला क्यों अलग होना चाहेंगे। प्रोफेसर भागी ने कहा कि कि हम अकादमिक स्वायत्तता के पक्ष में हैं लेकिन सरकार की फंडिंग जारी रहनी चाहिए। डीयू के संबंध में उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय में देश के सभी राज्यों, हर वर्ग और हर संस्कृति छात्र पढ़ते हैं। 60 कॉलेजों के साथ यह देश का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय है। कार्यकारी और विद्वत परिषद ने यहां अकादमिक गुणवत्ता को बनाए रखा है। ऐसे में किसी एक कॉलेज को स्वायत्तता देने से शिक्षा के माहौल पर नकारात्मक असर पड़ेगा। इसलिए यहां का कोई कॉलेज शायद ही स्वायत्तता के लिए आवेदन करे।

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