पीएमओ में फर्जी डायरेक्टर बने कन्हैया कुमार को 10 दिन की रिमांड, कुंडली खंगाल रही पुलिस - Probe into how con Kanhaiya Kumar got PMO visiting cards - Jansatta
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पीएमओ में फर्जी डायरेक्टर बने कन्हैया कुमार को 10 दिन की रिमांड, कुंडली खंगाल रही पुलिस

ऐसा पहली बार नहीं है जब पीएमओ या गृहमंत्रालय जैसी अहम जगहों पर काम करने वाले फर्जी लोगों को गिरफ्तार किया है।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतिकात्मक रूप से किया गया है। (फाइल फोटो)

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक शख्स को जालसाजी के आरोप में गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी खुद को पीएम ऑफिस में डायरेक्टर बताता था। उसने अपने विजिटिंग कार्ड में एड्रेस के तौर पर पीएम रूम नंबर 52 भी लिखा रखा रखा था। आरोपी की पहचान कन्हैया कुमार उर्फ डॉक्टर केके कुमार के रूप में की गई है। पुलिस ने कन्हैया को मंगलवार (31 अक्टूबर) को गिरफ्तार किया है। बाद में उसे पटियाला हाउस कोर्ट ने दस दिन के लिए रिमांड पर भेज दिया। साथ ही दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल से कोर्ट ने कहा, पता लगाएं कि आरोपी कन्हैया ने विजिटिंग कार्ड और भारत सरकार का स्टीकर कैसे हासिल किया। ये भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नॉर्थ ब्लॉक के कितने अधिकारी उसके टच में थे। पुलिस के अनुसार कन्हैया कुमार नॉर्थ ब्लॉक के अधिकारियों से तक रिश्वत ले चुका है। लेकिन जब इंडियन डिफेंस अकाउंट सर्विस (आईडीएस) ने केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) से जानकारी हासिल की तो पाया इस नाम का कोई भी अधिकारी पीएमओ में नहीं है। आरोपी कन्हैया कुमार पर जालसाजी, भेष बदलना, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए है। स्पेशल सेल इस कन्हैया को हैदराबाद ले जाने की तैयारी कर रही है। ताकि वहां मौजूद उसके दोस्त से पूछताछ की जा सके। खबर है कि कन्हैया के दोस्त चंद्रमोली ने कथित तौर पर उसे विजिटिंग कार्ड दिए थे।

बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं है जब पीएमओ या गृहमंत्रालय जैसी अहम जगहों पर काम करने वाले फर्जी लोगों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले साल 2016 में दिल्ली पुलिस ने एक हाई प्रोफाइल जालसाज शख्स को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार शख्स खुद को फर्जी आईएएस अफसर तो कभी सीनियर सीबीआई अधिकारी या फिर बीएचईएल इंजीनियर का बनकर लोगों को चूना लगा रहा था।

वह लोगों का भरोसा जीतने के लिए बड़ी लाल बत्ती लगी कार में घूमता था। कार पर अशोक स्तम्भ वाले और केंद्रीय गृह मंत्रालय के स्टीकर भी चिपकाए थे। उसकी नंबर प्लेट पर भारत सरकार लिखा हुआ था। आरोपी दिल्ली में एक बिजनेसमैन को 85 लाख रुपए का चूना लगा भी लगा चुका था। जॉय शाह नाम के इस जालसाज ने दिल्ली के एक बिजनेसमैन से बड़ी प्राइवेट कंपनियों में काम दिलाने के नाम पर लाखों रुपए की धोखाधड़ी की थी इससे पहले भी भोपाल और उड़ीसा के बेरोजगार लड़को को नौकरी दिलाने के नाम पर जॉय शाह करोड़ों का चूना लगा चुका है। कोलकता के एक धोखाधड़ी के मामले में भी उसका नाम शामिल है।

जॉय शाह पुलिस की गिरफ्त में तब आया जब व्यापारी शिकायत पर बीती 7 मई (2016) को क्राइम ब्रांच ने एफआईआर दर्ज की थी। केस की छानबीन के दौरान गृह मंत्रालय में इस नाम का कोई सहायक निदेशक या सीनियर आईएएस अधिकारी नहीं मिला। आरोपी ने डील के सिलसिले में बिजनेसमैन से ओबराय होटल में मीटिंग की थी। पुलिस ने वहां जमा की गई आरोपी की आईडी चेक की जो फर्जी निकली। छानबीन में मिले सुरागों के जरिए पुलिस टीम ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। उसकी लालबत्ती लगी कार, फर्जी आईडी और दस्तावेज आदि भी जब्त कर लिए।

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