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संसद हमले के शहीदों को प्रधानमंत्री मोदी ने दी श्रद्धांजलि

संसद हमले की 13वीं बरसी पर हमले में शहीद हुए लोगों को आज राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के नेतृत्व में सांसदों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, गृहमंत्री राजनाथ सिंह और अन्य सदस्यों ने संसद परिसर […]

Author December 13, 2014 3:09 PM
13 दिसंबर 2001 को भारी हथियारों से लैस पांच बंदूकधारी संसद परिसर में प्रवेश कर गये थे और अंधाधुंध गोलीबारी की थी जिसमें नौ लोग शहीद हुये थे। (फ़ोटो-पीटीआई)

संसद हमले की 13वीं बरसी पर हमले में शहीद हुए लोगों को आज राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के नेतृत्व में सांसदों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, गृहमंत्री राजनाथ सिंह और अन्य सदस्यों ने संसद परिसर में आयोजित एक समारोह में भाग लिया।

लोकसभा के उपाध्यक्ष एम थंबी दुरई, भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी और भाकपा के डी राजा सहित अन्य नेताओं ने शहीदों की याद में मौन रखा और उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की।

मारे गये कुछ शहीदों के परिवार सहित सांसदों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी। शहीदों की याद में संसद परिसर में एक रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया गया।

इस मौके पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा ‘‘लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर की सुरक्षा में शहीदों ने अपने जीवन की कुर्बानी दी, जिसे देश कभी नहीं भूल सकता। मैं उन्हें अपनी श्रद्धांजलि देता हूं और शहीदों के परिवार के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करता हूं।’’इससे पहले, शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने टवीट् किया, ‘‘2001 में आज के दिन लोकतंत्र के मंदिर की रक्षा करते हुये अपनी जान कुर्बान करने वाले शहीदों को हम लोग सलाम करते हैं। उनका बलिदान हमारी यादों में बसा हुआ है।’’

वरिष्ठ भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने कहा कि चुनौती उस विशेष दिन तक ही सीमित नहीं थी और राष्ट्र लंबे समय से आतंकवाद का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा ‘‘यह दिन हमें याद दिलाता है कि खतरा समाप्त नहीं हुआ है।’’

अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार में गृह मंत्री रहे आडवाणी ने याद दिलाया कि पाकिस्तान उस समय आतंकवाद के बुनियादी ढांचों को ध्वस्त करने पर एक तरह से सहमत हुआ था।

समारोह के बाद आडवाणी ने संवाददाताओं से कहा ‘‘हम लोगों ने कहा था कि अगर यह कदम उठाया जाएगा, वार्ता केवल तभी लाभदायक होगी। यह अफसोस की बात है कि यह कदम अभी तक नहीं उठाया गया है। मेरा हमेशा से विचार रहा है कि हमारे पड़ोसी मुल्क को यह कदम उठाना चाहिए। तभी हमारी बातचीत सफल हो सकती है।’’

वाजपेयी सरकार में 2001 में केन्द्रीय मंत्री रही लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि उस समय प्रधानमंत्री वाजपेयी के भीतर रहते हुये संसद परिसर में अगर एक भी आतंकवादी प्रवेश कर जाता तो क्या होता? उन्होंने कहा कि वह उस समय संसद के बजाय अपने मंत्रालय में थीं। उन्होंने कहा, ‘‘जिस समय यह घटना हुयी, हम लोग कुछ समय के लिए स्तब्ध रह गये।’’

लोकसभा अध्यक्ष ने आतंकवादियों के साथ लड़ते हुये शहीद हुये सैनिकों की ‘‘बहादुरी’’ की सराहना की। संसद पर हुये हमले को लोकतंत्र, संविधान और व्यवस्था पर हुआ हमला करार देते हुये भाकपा नेता डी राजा ने कहा कि सैनिकों ने अपने जीवन की आहुति दी और देश के लिए महान बलिदान किया।
उन्होंने कहा ‘‘देश को उनके यादों को सहेज कर रखने की दरकार है और सांसदों को हमारे सुरक्षा बलों के बलिदान से जरूर प्रेरणा लेनी चाहिए। वे प्रेरणा के स्रोत बने हुये हैं।’’

13 दिसंबर 2001 को भारी हथियारों से लैस पांच बंदूकधारी संसद परिसर में प्रवेश कर गये थे और अंधाधुंध गोलीबारी की थी जिसमें नौ लोग शहीद हुये थे।

शहीद होने वालों में दिल्ली पुलिस के पांच जवान, केन्द्रीय रिर्जव पुलिस बल (सीआरपीएफ) की एक महिला अधिकारी, संसद के वाच एंड वार्ड के दो कर्मी और एक माली शामिल थे। हमले में घायल एक पत्रकार की बाद में मौत हो गयी। सभी पांचों आतंकवादी मारे गये थे।

एक साल के बाद अफजल गुरु सहित चार आरोपियों को हमले के सिलसिले में गिफ्तार किया गया था और बाद में सुनवाई के दौरान उन्हें दोषी पाया गया था। कई साल तक जेल में बिताने के बाद गुरु को पिछले साल फांसी दे दी गयी।

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