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पुराने अफसरों को दोबारा सेक्रेटरी बनाना चाहते थे, 6 मंत्रियों की दरख्वास्त मोदी सरकार ने ठुकराई

बीते हफ्ते ही अपॉइंटमेंट कमेटी ऑफ द कैबिनेट (ACC) ने तीन अधिकारियों को '5 साल के बैलेंस पीरियड' के लिए पीएएस के तौर काम करने की इजाजत दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (photo source- reuters)

पीएम नरेंद्र मोदी ने फैसला किया है कि केंद्रीय मंत्रियों के प्राइवेट सेक्रेटरी या ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी के तौर पर अफसरों को 5 साल से ज्यादा काम न करने दिया जाए। सूत्रों के मुताबिक, पीएमओ ने कम से कम छह मंत्रियों की ऐसी दरख्वास्त ठुकराई हैं, जिनमें उन्होंने पिछली एनडीए सरकार में उनके पीएस या ओएसडी के तौर पर काम कर चुके अफसरों को दोबारा रखने की इजाजत मांगी थी। बता दें कि बीते हफ्ते ही अपॉइंटमेंट कमेटी ऑफ द कैबिनेट (ACC) ने तीन अधिकारियों को ‘5 साल के बैलेंस पीरियड’ के लिए पीएएस के तौर काम करने की इजाजत दी।

साकेत कुमार को गृह मंत्री अमित शाह का प्राइवेट सेक्रेटरी बनाया गया है। उनका कार्यकाल 29 जुलाई 2023 तक होगा। वहीं, महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी की पीएस एम इमकोंगला जमीर का कार्यकाल 22 जुलाई 2020 तक ही होगा। इसके अलावा, कई विभागों का कामकाज देख रहे राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह के पीएस के तौर पर आशीष कुमार को 27 अगस्त 2021 तक काम करने की इजाजत दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, अधिकारियों को केंद्रीय मंत्रियों के निजी स्टाफ के तौर पर अपने पूरे करियर में 10 साल से ज्यादा काम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। इनमें ‘अनौपचारिक’ तौर पर किए गए काम की अवधि भी शामिल होगी।

इससे पहले, मार्च 2010 में ACC ने अफसरों के मंत्रियों के साथ काम करने के लिए अधिकतम 10 साल की सीमा तय कर दी थी। यह नियम हर स्तर के अफसरों पर लागू था। इसके अलावा, पीएस और ओएसडी के कार्यकाल की अधिकतम सीमा भी 5 साल तय की गई थी। सिर्फ पीएम के पर्सनल स्टाफ के लिए छूट थी। तर्क यह दिया गया कि पैरंट डिपार्टमेंट से अफसरों की गैर मौजूदगी की वजह से कैडर मैनेजमेंट को नुकसान पहुंचता है।

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