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डाकिया लाएगा डिब्बाबंद पोषण आहार!

कुपोषण की समस्या से मिशन स्तर पर लड़ने के लिए मंगलवार को आयोजित पहले राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए डब्लूसीडी मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि आंगनबाड़ी के जरिए पूरक पोषण पहुंचाने में समस्याएं आ रही हैं।

Author नई दिल्ली | Published on: September 20, 2017 5:16 AM
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है।

केंद्रीय महिला व बाल विकास मंत्रालय (डब्लूसीडी), आइसीडीएस (समेकित बाल विकास योजना) के तहत गर्भवती महिलाओं और छह साल से कम उम्र के बच्चों को दिए जाने वाले पूरक पोषण आहार की गुणवत्ता और आपूर्ति के तरीके में नीतिगत बदलाव लाने वाला है। अगले कुछ दिनों में नया दिशानिर्देश जारी किया जाएगा, जिसमें लाभार्थी को पूरक पोषण सीधे घर तक पहुंचाने (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर या डीबीटी) पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, आपूर्ति के तरीके राज्य सरकारों ढूंढ़ने हैं, लेकिन एक विकल्प डाकखानों के जरिए 30 दिनों का डिब्बाबंद पोषण सीधे घर पहुंचाना हो सकता है। कुपोषण की समस्या से मिशन स्तर पर लड़ने के लिए मंगलवार को आयोजित पहले राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए डब्लूसीडी मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि आंगनबाड़ी के जरिए पूरक पोषण पहुंचाने में समस्याएं आ रही हैं। लाभार्थी को आधा किलोमीटर या इससे ज्यादा चलकर केंद्र पर जाना पड़ता है, जिससे उन्हें जितना पोषण मिलता है वह उसी में खर्च हो जाता है। जबकि हमें गर्भवती महिलाओं को 1000 कैलोरी और छह साल से कम उम्र के बच्चों को 600 कैलोरी पूरक पोषण देना है। इसके अलावा आंगनबाड़ियों का आपूर्ति तंत्र सक्षम नहीं रहा है।

मेनका गांधी ने कहा कि उनका मंत्रालय सीधे लाभ पहुंचाने (डीबीटी) पर विचार कर रहा है, लेकिन इसके लिए नकदी देना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सरकार न्यूनतम दर पर थोक में अन्न खरीदती है और पूरक पोषण तैयार किया जाता है, उस दर से प्रत्येक लाभार्थी (बच्चा) को केवल 180 रुपए मिलेंगे, जबकि उचित पोषण के लिए प्रतिमाह 2000 रुपए प्रति लाभार्थी देना होगा जो सरकार वहन नहीं कर सकती। इसलिए मंत्रालय सीधे डिब्बाबंद आहार लाभार्थियों के घरों तक पहुंचाने पर विचार कर रही है। यह डाकघरों के जरिए पूरे 30 दिनों के लिए एक बार में ही दिया जा सकता है। चूर्ण के रूप में दिया जाने वाला यह आहार गर्भवती महिलाएं और बच्चे पानी, जूस या दूध में मिलाकर पी सकते हैं। इसके साथ ही इस तरह के आहार को बाजार में भी बेचा नहीं जा सकता।

मेनका गांधी ने कहा कि हर डिब्बे पर बारकोड होगा जिससे वास्तविक समय में उनकी निगरानी रखी जा सकेगी। हालांकि, यह राज्यों पर निर्भर होगा कि वे इस आहार को लाभार्थियों तक कैसे पहुंचाएंगे। उन्होंने वर्तमान में दिए जा रहे पूरक आहार की गुणवत्ता को भी सुधारने की बात कही और कहा कि चावल व गेहूं के अलावा सूखे मेवे जैसी चीजें मिलाकर इन्हें पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाया जा सकता है। मेनका गांधी ने कहा, ‘आंगनबाड़ी के जरिए 40 सालों से दिया जा रहा आहार बेस्वाद है, सघन पौष्टिक नहीं है और आपूर्ति दोषपूर्ण है, इसे बदलना है। हमें खाना नहीं देना है, पोषण देना है’। इसके साथ ही मंत्रालय ने पूरक आहार योजना के तहत प्रति लाभार्थी आने वाले खर्च को बढ़ाने का भी प्रस्ताव तैयार किया है। साल 2011 में संशोधित खर्चे के मुताबिक प्रति बच्चा छह रुपए, गर्भवती और दूध पिलाने वाली महिलाओं के लिए सात रुपए और गंभीर रूप से कुपोषित बच्चे के लिए नौ रुपए है जिसे बढ़ा कर क्रमश: आठ रुपए, साढेÞ आठ रुपए और 12 रुपए किए जाने का प्रस्ताव है। देश में पूरक आहारों के कुल दस करोड़ लाभार्थी हैं।

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