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बीजेपी खेमे में लौटना चाहते हैं प्रशांत किशोर: मोदी राजी, पर अमित शाह ने रखी शर्त

प्रशांत किशोर की काबिलियत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भरोसा है। लिहाजा वे पुरानी बातें भूलकर एक बार फिर से किशोर को प्रचार अभियान में जिम्मा देने चाहते हैं, बशर्ते इसके लिए अमित शाह- जो कि प्रचार अभियान के इंचार्ज हैं- राजी हो जाएं। 2015 में प्रशांत किशोर जब बीजेपी छोड़कर नीतीश के साथ गये थे तो अमित शाह उनके इस फैसले से सहज नहीं थे।

Author July 15, 2018 1:42 PM
चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (फाइल फोटो)

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर का करियर 360 डिग्री लेकर फिर से शुरुआती बिंदू पर पहुंचता दिख रहा है। 2019 लोकसभा चुनावों की तैयारी बड़ी सरगर्मी से चल रही है। कांग्रेस-बीजेपी समेत कई दल इस महासमर के लिए तैयार हो रहे हैं। इस सियासी खेल में प्रशांत किशोर अपने लिए नया क्लायंट तलाश रहे हैं। इस अभियान में वे एक बार फिर से वहीं पहुंचे हैं जहां से उन्हें ‘पोल स्ट्रेटिजिस्ट’ की भारी-भरकम उपाधि मिली। प्रशांत किशोर को 2014 के आम चुनाव में पीएम मोदी की कामयाबी का श्रेय दिया जाता है। वे 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में मोदी के प्रचंड लहर को काटने और नीतीश कुमार को जिताने का श्रेय भी लेते हैं। प्रशांत किशोर एक बार फिर से मोदी-शाह के साथ डील करने पहुंचे हैं। वे 2019 में बीजेपी के प्रचार अभियान में बड़ा रोल चाहते हैं।

प्रशांत किशोर का करियर जब लगातार कामयाबी के ग्राफ चढ़ रहा था तो उन्हें उत्तर प्रदेश में हार झेलनी पड़ी। जिस कांग्रेस की वे रणनीति तैयार कर रहे ते। उसे 2017 के विधानसभा चुनाव में जबर्दस्त हार झेलनी पड़ी। प्रशांत किशोर की काबिलियत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भरोसा है। लिहाजा वे पुरानी बातें भूलकर एक बार फिर से किशोर को प्रचार अभियान में जिम्मा देने चाहते हैं, बशर्ते इसके लिए अमित शाह- जो कि प्रचार अभियान के इंचार्ज हैं- राजी हो जाएं। 2015 में प्रशांत किशोर जब बीजेपी छोड़कर नीतीश के साथ गये थे तो अमित शाह उनके इस फैसले से सहज नहीं थे। हालांकि अब हालात बदल गये हैं, नीतीश कुमार एनडीए में है। अब अमित शाह प्रशांत किशोर को मुख्य प्रचार अभियान में शामिल नहीं करना चाहते हैं। अमित शाह ने सुझाव दिया है कि प्रशांत किशोर एक अलग प्रोजेक्ट हाथ में ले सकते हैं, जैसे की बीजेपी की दलित हितैषी छवि को जनता में उभारना। प्रशांत किशोर अमित शाह के इस ऑफर पर अभी विचार ही कर रहे हैं।

इस बीच प्रशांत किशोर अपने एक टास्क को पूरा करने में पिछड़ते नजर आ रहे हैं। नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर को जिम्मा दिया था वे बिहार में महागठबंधन में उनकी वापसी करवाएं। कांग्रेस इस ऑफर को स्वीकार भी कर रही थी, लेकिन प्रशांत किशोर लालू यादव के बेटे को नहीं मना पाएं। तेजस्वी यादव ने सार्वजनिक रूप से घोषणा कर दी कि अब वे नीतीश के साथ नहीं काम करने वाले हैं। लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने अपने घर के बाहर नोटिस भी लगा दिया, “नीतीश कुमार का आना मना है।”

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