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दिल्ली की रामलीला में सियासी महाभारत, मोदी को न्योते पर विरोध

दिल्ली में रामलीलाओं को लेकर सत्ता की महाभारत शुरू हो गई है। रामलीला मैदान की रामलीला से जुड़े जयप्रकाश अग्रवाल ने नरेंद्र मोदी को न्योते के विरोध में..

Author नई दिल्ली | September 26, 2015 09:30 am
रामलीला (फाइल फोटो-इंडियन एक्सप्रेस अमित मेहरा)

दिल्ली में रामलीलाओं को लेकर सत्ता की महाभारत शुरू हो गई है। राजधानी की सबसे पुरानी और ऐतिहासिक रामलीला मैदान की रामलीला से जुड़े कांग्रेस के पूर्व सांसद और दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल ने कमेटी के मुख्य संरक्षक पद से अपना इस्तीफा दे दिया है।

सूत्रों के मुताबिक, अग्रवाल नहीं चाहते थे कि दशहरे पर मोदी को बुलाया जाए। मालूम हो कि कमेटी ने पिछले साल भी मोदी को दशहरे पर नहीं बुलाया था और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को न्योता भेजा था। पिछले साल रामलीला मैदान के पास ही सुभाष ग्राउंड में हुए रावण दहन समारोह में मोदी ने शिरकत की थी।

कमेटी के सूत्रों के मुताबिक, इस बार यहां की रामलीला कमेटी दशहरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित कर रही थी। लेकिन बरसों से कांग्रेस से जुड़े जयप्रकाश अग्रवाल कमेटी के इस फैसले के पक्ष में नहीं थे। लिहाजा उन्होंने कमेटी के मुख्य संरक्षक पद से ही किनारा कर लिया। इस मामले में शुक्रवार को जयप्रकाश अग्रवाल ने कुछ भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि वे इस मुद्दे पर कुछ भी नहीं कहना चाहते हैं।

दिल्ली के रामलीला मैदान में करीब 172 साल पुरानी लीला की शुरुआत बहादुरशाह जफर के समय से शुरू हुई थी। पहले यह लीला दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट के करीब मैदान पर होती थी। रामलीला मैदान में करीब 1940 से लीला का मंचन हर साल होता है। कांग्रेस के पूर्व सांसद जयप्रकाश अग्रवाल यहां की धार्मिक लीला कमेटी से करीब सात साल से संरक्षक हैं। यहां की कमेटी के अध्यक्ष राजेश खन्ना करीब 40 साल से अध्यक्ष हैं। यहां पर होने वाली रामलीला में हर साल रावण दहन के दौरान देश के प्रधानमंत्री आकर तीर चलाकर रावण का वध करते हैं और फिर उसके बाद पूरा दहन का कार्यक्रम होता है।

पिछले कई सालों से यहां पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राहुल गांधी प्रतीकात्मक तीर चलाकर रावण का दहन करते रहे हैं। कमेटी के सूत्रों के मुताबिक, इस बार भी जयप्रकाश अग्रवाल चाहते थे कि दशहरे के दिन सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मनमोहन सिंह को ही बुलवाया जाए। लेकिन इस बार कमेटी के अध्यक्ष राजेश खन्ना ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ ही देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी आमंत्रित किया जाना चाहिए। मोदी के न्योते को लेकर कमेटी में विवाद हो गया।

कमेटी के सूत्रों के मुताबिक, जयप्रकाश अग्रवाल ने कहा कि वे कांग्रेस से जुड़े हैं, ऐसे में भाजपा के किसी प्रधानमंत्री को कैसे यहां पर बुला सकते हैं। उसपर कमेटी के अध्यक्ष खन्ना ने कहा कि वे हर साल यहां पर प्रधानमंत्री को बुलाते आए हैं। इस बार यदि देश में भाजपा का प्रधानमंत्री है, तो ऐसे में उन्हें भी यहां पर बुलाया जाना चाहिए। लेकिन जयप्रकाश अग्रवाल नहीं माने और वे कमेटी के संरक्षक के पद से इस्तीफा देकर बैठक से चले गए।

इस मामले में कमेटी के अध्यक्ष राजेश खन्ना ने कहा कि वे जयप्रकाश अग्रवाल के इस्तीफे से काफी आहत हैं। उन्होंने कहा, ‘रामलीला को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनाना चाहिए। मैं लगातार जयप्रकाश अग्रवाल को इस्तीफा वापस लेने के लिए मनाने में लगा हूं। लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी है’।

उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान की रामलीला के बाद सोनिया गांधी परेड मैदान की रामलीला में जाती हैं और वहां पर पहले से ही भाजपा के भी नेता होते हैं। वहां पर इस तरह की राजनीति क्यों नहीं होती है। खन्ना ने कहा कि देश में प्रचंड बहुमत से नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बनें हैं, ऐसे में वे अगर उनकी लीला में आएंगे तो कमेटी को काफी खुशी होगी।

उधर, इस मामले में दिल्ली रामलीला महासंघ के वरिष्ठ अध्यक्ष और लवकुश रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अशोक कुमार अग्रवाल ने ऐतिहासिक रामलीला कमेटी में हो रही राजनीति पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि यह रामजी की लीला है, जिसका किसी को भी राजनीतिक उपयोग नहीं करना चाहिए।

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