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दिल्ली में ठिकाना तलाश रहे आतंकी पुलिस के लिए बने चुनौती

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों की ओर से आतंकी संगठनों पर दबाव बनाए जाने के बाद आतंकी दिल्ल व आसपास का रुख करने लगे हैं। विभिन्न आतंकी संगठनों से जुड़े आतंकवादी दिल्ली और आसपास के उन इलाकों को अपना ठिकाना बना रहे हैं, जिनमें पुलिस की सक्रियता न के बराबर है।

Author नई दिल्ली | January 27, 2019 11:42 AM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फोटो सोर्स फाइनेंसियल एक्सप्रेस)

निर्भय कुमार पांडेय

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों की ओर से आतंकी संगठनों पर दबाव बनाए जाने के बाद आतंकी दिल्ल व आसपास का रुख करने लगे हैं। विभिन्न आतंकी संगठनों से जुड़े आतंकवादी दिल्ली और आसपास के उन इलाकों को अपना ठिकाना बना रहे हैं, जिनमें पुलिस की सक्रियता न के बराबर है। ऐसे इलाकों के स्थानीय निवासी भी किरायदारों के पुलिस सत्यापन को लेकर जागरूक नहीं है। इसका फायदा जम्मू-कश्मीर के आतंकी संगठन उठा रहे हैं। वहीं, ऐसे इलाकों की पहचान करना दिल्ली पुलिस के लिए भी चुनौती बन गई है। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने भले ही गणतंत्र दिवस से ठीक पहले दो संदिग्ध आतंकवादियों को गिरफ्तार कर दिल्ली में आतंकी हमले को रोकने में कामयाबी पा ली हो, लेकिन गिरफ्तार किए गए दोनों आतंकी कई महीनों से दिल्ली में छिपे थे, जिसकी भनक तक पुलिस को नहीं लगी। पूछताछ में आतंकी अब्दुल लतीफ उर्फ गनी और हिलाल अहमद भट्ट ने खुलासा किया कि वे दोनों समीर नाम के एक शख्स के साथ नवंबर 2018 में दिल्ली आए थे। उसके बाद अब्दुल दिल्ली में ही ठहरा हुआ था, जबकि हिलाल श्रीगनर जाने में कामयाब हो गया था।

बीते 24 जनवरी को जैश-ए-मोहम्मद के एक आतंकी अब्दुल को दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया था। सेल के उपायुक्त प्रमोद सिंह कुशवाहा ने प्रेसवार्ता कर जानकारी दी थी कि इसकी सूचना पुलिस को खुफिया एजंसियों से मिली थी। आतंकी को लक्ष्मी नगर के एक घर में कई बार आते-जाते देखा गया था। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों से यह नहीं बताया कि अब्दुल लतीफ शहर के किस इलाके में छुपा हुआ था? अब्दुल से पूछताछ के बाद जिस दूसरे आतंकी हिलाल अहमद भट्ट को श्रीनगर से गिरफ्तार किया गया, वह भी कई दिनों तक दिल्ली में ही छुपा था। हिलाल ने भी अब्दुल के साथ उन पांच स्थानों की रेकी की थी, जहां वे गणतंत्र दिवस के मौके पर दहशत फैलाने की तैयारी में थे।

दिल्ली में तलाश रहे थे ठिकाना
दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने 13 जनवरी को हिजबुल मुजाहिद्दीन के दो संदिग्ध आतंकियों को जम्मू-कश्मीर के शोपियां से गिरफ्तार किया था। ये दोनों दिल्ली-एनसीआर में ठिकाने की तलाश में थे। पूछताछ में इन आतंकियों ने खुलासा किया था कि इन दिनों जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों ने चौकसी बढ़ा दी है, इसलिए आतंकी संगठनों को छोटे हथियार, खासकर पिस्तौल जुटा पाने में परेशानी हो रही है। साथ ही पिछले कुछ महीनों में आइएसजेके आतंकी संगठन से जुड़े कई संदिग्ध आतंकियों को स्पेशल सेल ने दिल्ली और जम्मू-कश्मीर से गिरफ्तार किया था, जो दिल्ली-एनसीआर में ठिकाने की तलाश में थे। इनके पास से पुलिस ने हथियार और कारतूस जब्त किए थे।

नेटवर्किंग साइट पर करते थे बातचीत
पूछताछ में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि ये आतंकी अपने संगठन से संपर्क साधने के लिए मोबाइल या टेलीफोन का इस्तेमाल नहीं करते थे। इन्हें पता था कि इनके फोन टैप किए जा सकते हैं। इसके लिए आतंकी सोशल नेटवर्किंग साइट का इस्तेमाल करते थे। ज्यादातर समय ये चैट पर बातचीत करते थे और बहुत जरूरी होने पर व्हाट्सऐप पर कॉल करते थे। जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना अजहर मसूद ने अब्दुल लतीफ के मोबाइल पर कई वीडियो और आॅडियो क्लिप भेजी थी, जिसे स्पेशल सेल ने जब्त कर लिया है।

कब-कब हत्थे चढ़े आतंकी
’24 जनवरी 2019- जैश-ए-मोहम्मद के दो संदिग्ध आतंकी अब्दुल लतीफ गनी और हिलाल अहमद भट्ट गिरफ्तार, दोनों दिल्ली में आतंकी हमले की तैयारी में थे।
’13 जनवरी 2019- हिजबुल मुजाहिद्दीन के दो संदिग्ध आतंकी श्रीनगर के शोपियां से गिरफ्तार। दिल्ली-एनसीआर में हथियार जुटाने के लिए ठिकाने की तलाश में थे।
’24 नवंबर 2018- आइएसजेके के तीन आतंकी ताहिर अली खान, हारिस मुश्ताक खान और असिफ सुहैल नदफ गिरफ्तार। हथियार जुटाने में लगे हुए थे तीनों आतंकी।
’6 सितंबर 2018- आइएसजेके के दो आतंकी परवेज राशिद लोन और जमशेद जहूर पॉल दिल्ली के लाल किले के पास से हथियार के साथ किए गए गिरफ्तार।

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