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दिल्ली: साल के अंत तक पिंक और मैजेंटा लाइन पर भी दौड़ेगी मेट्रो

शकूरपुर से मायापुरी के बीच शुरू हुए इस परीक्षण के दौरान गाड़ी, रेल लाइन व सिग्नलिंग प्रणाली सहित तमाम अन्य हिस्सों का परीक्षण करके उसमें जरूरी सुधार व बदलाव किए जाएंगे।

नई दिल्ली | July 4, 2017 4:36 AM
दिल्ली मेट्रो।

जनकपुरी से बोटैनिकल गार्डन और मजलिस पार्क से शिव विहार तक की दिल्ली मेट्रो की दो नई लाइनें शुरू होने से इसके नेटवर्क में करीब 100 किलोमीटर का इजाफा हो जाएगा। इन लाइनों के कुछ हिस्सों में टेÑनों क ा परीक्षण शुरू हो गया है। उम्मीद है कि इस साल के अंत तक दोनों लाइनों पर आंशिक तौर पर यात्री सेवाएं शुरू हो जाएंगी। इन दोनों लाइनों के सभी स्टेशनों पर डोर स्क्रीन लगाए जाएंगे ताकि आने वाले दिनों में व्यस्ततम बनने जा रही इस लाइन पर यात्री चढ़ने-उतरने की होड़ में टेÑनों से गिरें नहीं।  दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) की सबसे लंबी लाइन नंबर-8 मजलिस पार्क से शिव विहार के बीच सेवाएं शुरू होने का दिल्लीवासियों को लंबे समय से इंतजार है क्योंकि यह दिल्ली में परिवहन के हिसाब से सबसे व्यस्त हिस्से रिंग रोड से गुजरेगी। पिंक लाइन नाम से बन रही 60 किलोमीटर की इस सबसे लंबी लाइन पर मेट्रो सेवा साल के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है। दिल्ली मेट्रो ने हाल ही में इस लाइन के करीब दस किलोमीटर के एक हिस्से में परीक्षण परिचालन शुरू किया है। शकूरपुर से मायापुरी के बीच शुरू हुए इस परीक्षण के दौरान गाड़ी, रेल लाइन व सिग्नलिंग प्रणाली सहित तमाम अन्य हिस्सों का परीक्षण करके उसमें जरूरी सुधार व बदलाव किए जाएंगे।

इसके अलावा लाइन नंबर-7, जोकि मध्य दिल्ली के जनकपुरी से नोएडा के बोटैनिकल गार्डन तक है, पर भी परीक्षण शुरू हो चुका है। इसमें कालकाजी के पास व जनकपुरी के पास परीक्षण चल रहा है। मैजेंटा लाइन नाम की इस लाइन के दोनों छोरों पर परीक्षण चल रहा है। इस पर भी नई सिग्नलिंग प्रणाली होगा व नए तरह की तमाम अन्य सुविधाएंं होंगी। राजीव ने बताया कि जैसे-जैसे परीक्षण परिचालन पूरा होता जाएगा, वैसे-वैसे लाइन पर परिचालन शुरू होता जाएगा। एक बार पूरी लाइन पर यात्री सेवाएं शुरू हो गर्इं तो करीब 100 किलोमीटर का मेट्रो नेटवर्क और हो जाएगा। इससे दिल्ली मेट्रो का टेÑनों का बेड़ा भी बढ़ जाएगा।

इन दोनों लाइनों पर सेवाएं शुरू होने के बाद सड़क सेवा में रिंग रोड की तर्ज पर मेट्रो का भी एक गोलाकार नेटवर्क खड़ा हो जाएगा, जो कई लाइनों को इंटरचेंज के जरिए आपस में जोड़ेगा। इंटरचेंज अधिक होने की वजह से यात्री गाड़ी बदल कर शार्ट रूट से भी अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। जो यात्री कम समय में गंतव्य तक पहुंचना चाहेंगे, वे गाड़ी बदल कर समय व किराया बचा सकेंगे।

 

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