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रात्रि कर्फ्यू के बाद सता रहा पूर्णबंदी का डर, दिहाड़ी मजूदर बोले, काम पर पड़ा असर

राजधानी में रात्रि कर्फ्यू लागू होने के बाद दिहाड़ी मजूदरों को एक बार फिर से पूर्णबंदी (लॉकडाउन) का डर सताने लगा है।

Author नई दिल्‍ली | Updated: April 9, 2021 5:16 AM
Coronavirus, COVIDV-19भारत में निकले कोरोना के रिकॉर्ड केस। (फोटो- PTI)

निर्भय कुमार पांडेय

राजधानी में रात्रि कर्फ्यू लागू होने के बाद दिहाड़ी मजूदरों को एक बार फिर से पूर्णबंदी (लॉकडाउन) का डर सताने लगा है। मजदूरों ने बताया कि बीते दो दिनों में उनके कुछ सहयोगी गांव लौट गए हैं। वे भी गांव लौटने की तैयारी कर रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि रात्रि कर्फ्यू का सीधा असर उनके काम धंघों पर पड़ा है। राजधानी के अधिकतर इलाकों में रात के वक्त ही निर्माणाधीन सामान जैसे र्इंट, रोड़ी, रेता के अलावा अन्य सामान लाए जाते हैं। पर रात को कर्फ्यू लगे होने के कारण पुलिस ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है।

इस कारण उन्हें कम काम मिल रहा है। वहीं, दूसरी जो लोग काम कर भी रहे हैं। उन्हें कहा जा रहा है कि यदि निर्माणाधीन सामान खत्म हो गया और पूर्णबंदी लग गई तो काम बंद करवा दिया जाएगा। इस डर के कारण दिहाड़ी मजदूर एक बार फिर से अपने गांवों की ओर लौट सकते हैं।

न्यू कोंडली इलाके में चौक पर से काम करने जाने वाले मोहम्मद सलीम ने बताया कि बुधवार और गुरुवार को उन्हें काम नहीं मिला। वह सुबह ही चौक पर आ गए थे। वह घरों में रंगाई पुताई का काम करते हैं। दो-तीन महीने से सप्ताह में एक-दो दिन ही काम मिलता था, लेकिन रात्री कार्फ्यू लगने के बाद काम मिलने में दिक्कतें आने लगी हैं। पहले सुबह करीब 11 बजे तक काम मिल जाया करता था, लेकिन गुरुवार को दोपहर 12 बजे तक वह उन लोगों का इंतजार करते रहे, जो दिहाड़ी मजदूरों की तलाश में चौक पर आते हैं।

इसी प्रकार लक्ष्मी नगर इलाके में दिहाड़ी का काम करने वाले विनोद कुमार ने बताया कि एफ ब्लॉक में बीते 15-16 दिनों से काम कर रहे थे। चौक पर जाने से मजदूर मिल जाते थे, लेकिन गुरुवार को पता चला कि कम दिहाड़ी मजूदर चौक पर पहुंचे थे। मंगलवार बाजार चौक पर काम की तलाश में आने वाले मजदूर अपने गांवों को लौटने लगे हैं। इन मजदूरों को डर सताने लगा है कि कहीं पिछली साल की तरह दोबारा पूरे देश भर में पूर्णबंदी लागू हो गई तो कहीं पैदल चलकर या फिर ट्रकों में लद कर गांव नहीं लौटना पड़े।

एक अन्य मजदूर राम कुमार ने बताया कि वह दो महीने पहले ही अपने गांव से लौटा था। दोस्तों ने कहा था कि काम मिलने लगा है। शहर आया तो उसने काम भी किया, लेकिन रात्रि कर्फ्यू लगने के बाद से उसे भी डर लग रहा है कि कहीं पिछले साल जैसी स्थिति पैदा हो गई तो खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। उसने बताया कि दिल्ली से ट्रेन तो मिलेगी नहीं। वह नोएडा जाकर बस पकड़ लेगा। वहां से उसे बिहार स्थित अपने गांव खगडिया जाने में आसानी होगी। दिहाड़ी मजदूरों ने बताया कि वह रोज कमाते हैं और होटलों में खाते हैं। होटल बंद होने की वजह से खाने-पीने में भी परेशानी होती है।

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