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नोटबंदी के बाद जीएसटी… जैसे जले पर नमक

जो नोटबंदी के कारण अपनी दिहाड़ी की नौकरी छोड़कर गांव लौट गए। या उन लोगों के बारे में कोई बात नहीं कर रहा है जिनकी जान नोटबंदी ने ली या जिनका कारोबार खत्म हो गया।

Author मनोज मिश्र | November 8, 2017 4:32 AM
प्रतीकात्मक फोटो। (फाइल)

दिल्ली के चांदनी चौक के व्यापारी नेता बृज मोहन शर्मा कहते हैं कि पिछले आठ नंवबर की रात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के नाम अपने संबोधन में कहा कि पुराने पांच सौ और हजार के नोट बंद करने से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, काला धन खत्म होगा और आतंकवाद की कमर टूट जाएगी। साल भर बाद भी इन तीनों पर कोई ठोस बात कहने को तैयार नहीं है और अगर ऐसा नहीं हो तो भी सरकार की ओर से यह बताया ही नहीं जा रहा है कि आखिर नोटबंदी क्यों की गई। पूर्वी दिल्ली के गांधी नगर के रेडिमेड कपड़ों के थोक बाजार के एक व्यापारी कहते हैं कि नोटबंदी से तो बाजार की कमर टूटी जीएसटी ने बरबाद कर दिया अव तो हम प्रधानमंत्री जी की नौकरी करने बाजार आते हैं और रोज प्रार्थना करते हैं कि अब कोई और सोच मोदी जी को नहीं देना। व्यापारियों का कहना है कि इसका कोई उदाहरण दुनिया में नहीं मिलेगा जब बिना किसी कारण या कुछ लोगों को फायदा देने के लिए पूरे देश को परेशान कर दिया गया हो। इस तरह की बातें हर बाजार में हर वर्ग को लोगों में बड़ी तादाद में कहने वाले मिलते हैं। लेकिन उन लोगों की ओर से कोई कहने ही वाला नहीं है जो नोटबंदी के कारण अपनी दिहाड़ी की नौकरी छोड़कर गांव लौट गए। या उन लोगों के बारे में कोई बात नहीं कर रहा है जिनकी जान नोटबंदी ने ली या जिनका कारोबार खत्म हो गया।

सरकार की ओर से यह कहा गया कि अगर पहले ज्यादा लोगों को विश्वास में लेकर नोटबंदी की जाती तो यह कारगर नहीं होती। यह सवाल हर गली मोहल्ले के लोग भी कर रहे हैं कि अगर यही नतीजा निकलना था तो यह किया क्यों गया। भाजपा समर्थक एक कारोबारी कहते हैं कि जो हालात नोटबंदी ने पैदा किए थे उसे याद करके लोग आज भी कांप जाते हैं। मोहल्ले में एक व्यक्ति के बीमार होने पर पूरा मोहल्ला परेशान होता था कि पैसे कहां से आएंगे। पहले कम निकासी का संकट, फिर रुपए बदलने का संकट और उसके बाद दो हजार के नोट आने पर खुल्ले के संकट ने हर वर्ग को परेशान कर दिया। नोटबंदी के बाद बैंक की लाइन में हर वर्ग के लोगों को देखकर गरीब इसलिए खुश होता था कि चलो सभी परेशान हैं। मेरी एक आंख फूट रही है तो सामने वाले की दोनों फूट रही हैं। बाद में जब असलियत सामने आने लगी तब लोगों की छटपटाहट बढ़ने लगी कि खास वर्ग को जो लोग लाइनों में नहीं दिखते थे वे कभी परेशान नहीं रहे। पुरानी दिल्ली के एक बड़े कारोबारी बताते हैं कि पता नहीं सरकार को किसने बता दिया कि काला धन लोग घरों में बोरियों में रखते हें। कालाधन को सोना, चांदी, रियल इस्टेट, शेयर आदि में लगते रहे हैं और जिसके पास ज्यादा हुआ वह दूसरे देश में रखता है। नोटबंदी से उनके कारोबार पर कोई असर नहीं होने वाला है। असर हुआ उनपर जिनका कारोबार बंद हुआ और जो आज भी अच्छे दिन आने के इंतजार में बड़े लोगों के रहमोकरम पर कर्जे लेकर आपना कारोबार चला रहे हैं।

दो हजार के बाद पांच सौ के नए नोट आने के बाद बाजार कुछ सामान्य हुआ तो पहली जुलाई से जीएसटी को लागू कर दिया गया। जीएसटी दुनिया के अनेक देशों में सफल है। दुनिया में शायद ही कोई ऐसा देश होगा जहां जीएसटी 28 फीसद होगा और उसकी इतनी श्रेणियां होंगी। आज अगर दिल्ली के व्यापारी जीएसटी को अमल में नहीं ला पा रहे हैं तो बाकी जगह का क्या होगा। भाजपा के नेता और देश के व्यापारियों के बड़े संगठन (कैट) के महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने बयान जारी करके कहा कि यह दिवाली पिछले दस साल में व्यापारियों के लिए सबसे काली दिवाली साबित हुई है।

 

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