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संसद ने दिल्ली उच्च न्यायालय संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी

संसद ने बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट संशोधन विधेयक 2015 को मंजूरी दे दी। यह विधेयक पहले ही राज्य सभा में पारित हो चुका है और बुधवार को इसे लोकसभा की भी मंजूरी मिल गई..

संसद ने बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट संशोधन विधेयक 2015 को मंजूरी दे दी। यह विधेयक पहले ही राज्य सभा में पारित हो चुका है और बुधवार को इसे लोकसभा की भी मंजूरी मिल गई। दिल्ली हाई कोर्ट (संशोधन) विधेयक 2015 के लागू होने पर दो करोड़ रुपए तक के धन संबंधी दीवानी वादों को हाई कोर्ट से दिल्ली के नौ जिला अदालतों में स्थानांतरित किया जा सकेगा।

सदन में इस पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए विधि एवं न्याय मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने कहा कि दिल्ली और उसके आसपास सम्पत्ति के दाम बहुत बढ़ने और न्याय को लोगों के समीप पहुंचाने के उद्देश्य से यह विधेयक लाया गया है। उन्होंंंने कहा कि इससे दिल्ली हाई कोर्ट पर काम का बोझ भी कम होगा। विधि मंत्री ने इस बात को स्वीकार किया कि देशभर में विभिन्न अदालतों में लगभग 3.6 करोड़ मामले अभी लंबित हैं और सरकार उनके शीघ्र निपटारे का प्रयास कर रही है।

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उन्होंने बताया कि पिछले दिसंबर में देशभर में लोक अदालतें आयोजित करके 44 लाख मामलों का निपटारा गया। गौड़ा ने कहा कि पिछले कुछ सालों में हाई कोर्ट के जजों की संख्या में वृद्धि की गई है। सभी मुख्यमंत्रियों और मुख्य न्यायाधीशों को पत्र लिखकर उनसे आग्रह किया गया है कि वे अदालतों के रिक्त स्थानों को जल्द से जल्द भरें। विधेयक पर चर्चा और पारित होने के समय सदन में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, सपा, जद(एकी), राकांपा, राजद जैसे विपक्षी दलों के सदस्य मौजूद नहीं थे। कांग्रेस के 25 सदस्यों को निलंबित किए जाने के विरोध में इन दलों ने दो दिनों से सदन का बहिष्कार किया है।

अभी कम मूल्य की सम्पत्ति से जुड़े वादों को हाई कोर्ट में दायर करना होता है क्योंकि 20 लाख रूपए और उससे अधिक राशि से जुड़े दीवानी वाद इसके क्षेत्राधिकार में आते हैं। विधेयक के उद्देश्यों में कहा गया है कि इसके कारण दिल्ली हाई कोर्ट पर काम का बोझ काफी बढ़ गया है और दिल्ली में रहने वाले लोगों को अपने मामलों में न्याय के लिए लम्बी दूरी तय करनी पड़ती है।

इस विधेयक को पूर्ववर्ती यूपीए सरकार ने राज्यसभा में फरवरी 2014 में पेश किया था और इसके बाद इसे स्थाई समिति को भेजा गया । जहां से इसे मंजूरी मिल गई। राजग सरकार ने इसमें बिना किसी बदलाव के उच्च सदन में पेश किया और यह राज्यसभा से पारित हो गया। विधेयक पर हुई चर्चा में अन्नाद्रमुक के जेजे नटराज, बीजद के तथागत सथपति,भाजपा के जगदम्बिका पाल एवं रमेश विधुड़ी, अपना दल की अनुप्रिया पटेल ने हिस्सा लिया।

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