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AMU की स्वायत्तता में सरकारी हस्तक्षेप को लेकर राज्यसभा में हंगामा

अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय की स्वायत्तता में सरकार के कथित हस्तक्षेप को लेकर विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण शुक्रवार को राज्यसभा की बैठक दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

Author नई दिल्ली | March 5, 2016 12:59 AM
AMU को लेकर राज्यसभा में हंगामा

अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय की स्वायत्तता में सरकार के कथित हस्तक्षेप को लेकर विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण शुक्रवार को राज्यसभा की बैठक दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। हालांकि सरकार ने कहा कि अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त है जो बरकरार रहेगा।

सदस्यों का हंगामा शून्यकाल में तब शुरू हुआ जब सपा के जावेद अली खान ने अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय द्वारा अपने परिसर से बाहर खोले जाने वाले पांच सेंटरों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि तीन सेंटर खुल चुके हैं और दो खोले जाने हैं लेकिन विश्वविद्यालय के कुलपति का एक बयान आया है कि केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री ने इन सेंटरों को गैरकानूनी करार देते हुए इन्हें दी जाने वाली वित्तीय सहायता बंद करने की धमकी दी है।
उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय के विजिटर स्वयं राष्ट्रपति हैं और उनकी मंजूरी के बिना विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद और एग्जीक्यूटिव समिति कोई निर्णय नहीं कर सकती। फिर मानव संसाधन विकास मंत्रालय एएमयू के सेंटरों को दिया जाने वाला अनुदान रोकने की बात कैसे कह सकता है।

खान ने कहा कि विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद और एग्जीक्यूटिव समिति ने अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय कानून की धारा 12 के तहत 2008 में परिसर से बाहर पांच सेंटर स्थापित करने का निर्णय किया था। खान ने कहा कि सच्चर समिति की रिपोर्ट में अल्पसंख्यकों के पिछड़ेपन और उनकी हालत के बारे में बताए जाने के बाद तत्कालीन यूपीए सरकार ने इस संबंध में एक नीति बनाई और विश्वविद्यालय ने संस्थान के परिसर के बाहर पांच सेंटर खोलने का निर्णय किया था। उन्होंने कहा कि तीन सेंटर क्रमश: केरल के मलप्पुरम, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और बिहार के किशनगंज में खोले जा चुके हैं और शेष दो सेंटर खोले जाने हैं। उन्होंने कहा कि अब भाजपा सरकार इस फैसले पर सवाल उठा रही है।

खान ने कहा कि सरकार एक ओर सबका साथ सबका विकास की बात कहती है और वहीं दूसरी ओर समाज के एक बड़े तबके को शिक्षा की सुविधा से वंचित करने का प्रयास करती है। उन्होंने सरकार से अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय और ऐसे अन्य संस्थानों के अल्पसंख्यक दर्जे पर सरकार से स्पष्टीकरण देने की मांग की। संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि सरकार अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय और अन्य अल्पसंख्यक संस्थानों के अल्पसंख्यक दर्जे की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय का मामला अदालत में है और सभी को अदालत के फैसले के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए। उनके जवाब से असंतोष जाहिर करते हुए जद (एकी) के शरद यादव ने सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जिस सवाल का समाधान कानून के दायरे में, सर्वसम्मति से हो गया था उसे आप (सरकार) हलफनामा दे कर अदालत ले गए। कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने सरकार पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जो हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया गया है उसे वापस लिया जाना चाहिए। इसी पार्टी के आनंद शर्मा ने कहा कि यह स्थिति इसलिए आई है क्योंकि पूर्ववर्ती यूपीए सरकार द्वारा दिया गया हलफनामा वापस ले कर राजग सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में नया हलफनामा दाखिल कर दिया।

माकपा के सीताराम येचुरी ने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि उसने नए हलफनामे में क्या कहा है। कांग्रेस के आनंद शर्मा ने सवाल किया कि हलफनामा क्यों बदला गया। उन्होंने सरकार पर पूर्वाग्रह रखने और अल्पसंख्यक संस्थानों को नष्ट करने का आरोप भी लगाया। इस पर नकवी ने कहा, ‘हमारी सरकार के अंदर कोई पूर्वाग्रह नहीं है। हलफनामा कौन बदलता है, सबको पता है। हम आपसे पूछ कर हलफनामा नहीं बदलेंगे। जब आपने हलफनामा बदला था तब आपने बताया था क्या?’

येचुरी ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है और इससे बड़ा सांप्रदायिक ध्रुवीकरण होगा। विपक्षी सदस्यों ने नकवी पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया। इस पर कुरियन ने कहा कि अगर सदस्यों को मंत्री के जवाब से संतुष्टि नहीं है तो नियम पुस्तिका में दिए गए प्रावधानों के अनुसार वह प्रक्रिया अपना सकते हैं। उन्होंने कहा कि सदस्य अगर इस मुद्दे पर चर्चा चाहते हैं तो वे नोटिस दें। नकवी ने कहा कि सरकार न तो अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय का विरोध कर रही है और न ही समर्थन कर रही है।

इस पर सपा के सदस्यों ने कड़ी आपत्ति जताई और सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए आसन के समक्ष आ गए। बसपा, कांग्रेस और माकपा के सदस्य अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय में हस्तक्षेप बंद करने के नारे लगाते हुए आसन के समक्ष आ गए। कुरियन ने सदस्यों से अपने स्थानों पर लौट जाने और शून्यकाल चलने देने का आग्रह किया। हंगामे के बीच ही उन्होंने शून्यकाल के तहत उठाए जाने वाले लोक महत्व के मुद्दों के लिए कुछ सदस्यों का नाम पुकारा और सदस्यों ने मुद्दे उठाए। लेकिन हंगामा जारी रहा और कुरियन ने 11 बज कर करीब 50 मिनट पर बैठक दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

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