दिल्ली में आया ‘ओमिक्रोन’ संक्रमण का पहला मामला, तंजानिया से भारत लौटा था शख्स

एलएनजेपी अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि मरीज का इस समय अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि उसे बीमारी के मामूली लक्षण हैं।

omicron variant
दिल्ली में आया ओमिक्रोन का पहला केस (एक्सप्रेस फोटो)

देश की राजधानी दिल्ली में ओमिक्रोन का पहला मामला सामने आने के बाद दिल्ली सरकार सतर्क हो गई है। तंजानिया से दिल्ली आया 37 वर्षीय एक पुरुष ‘ओमिक्रोन’ से संक्रमित पाया गया है। यह दिल्ली में कोरोना वायरस के नए वैरिएंट से जुड़ा पहला मामला और देश में पांचवां मामला है। एलएनजेपी अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि मरीज का इस समय अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि उसे बीमारी के मामूली लक्षण हैं।

वहीं, दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा, ‘‘अभी तक कोविड-19 के 17 मरीजों और उनके संपर्क में आए 6 लोगों को लोक नायक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक जीनोम अनुक्रमण के लिए भेजे गए 12 में से एक नमूने में ओमिक्रोन पाया गया है।’’ पीटीआई के मुताबिक, एक अधिकारी ने बताया कि मरीज भारतीय है और वह कुछ दिन पहले तंजानिया से लौटा था।

अधिकारी ने आगे कहा, ‘‘मरीज पिछले कुछ दिनों में किन-किन जगहों पर गया है, इसका पता लगाया जा रहा है और उसके संपर्क में आए लोगों से संबंधित जानकारी भी जुटाई जा रही है।’’ दिल्ली में विदेश से आए कोरोना वायरस से संक्रमित यात्रियों को एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है, जहां उन्हें आइसोलेशन में रखने और उनके इलाज के लिए अलग वार्ड स्थापित किया गया है। 

इससे पहले, कर्नाटक में गुरुवार को ओमिक्रोन वैरिएंट के दो मामले पाए गए थे। राज्य में 66 वर्षीय दक्षिण अफ्रीकी नागरिक और बेंगलुरू का 46 वर्षीय एक चिकित्सक कोरोना वायरस के इस नए वैरिएंट से संक्रमित पाया गया था। ये दोनों लोग वैक्सीनेटेड हैं। जबकि, शनिवार को गुजरात में 72 वर्षीय प्रवासी भारतीय और महाराष्ट्र का 33 वर्षीय एक व्यक्ति ओमिक्रोन से संक्रमित पाया गया था।

केंद्र सरकार के अनुसार, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, बोत्सवाना, चीन, मॉरीशस, न्यूजीलैंड, जिम्बाब्वे, सिंगापुर, हांगकांग और इजराइल को ‘खतरे वाले देशों’ की सूची में शामिल किया गया है। नए नियमों के अनुसार, ‘खतरे वाले देशों’ से आने वाले यात्रियों को आरटी-पीसीआर जांच कराना अनिवार्य है और उन्हें टेस्ट के नतीजे आने के बाद ही हवाई अड्डे से जाने की अनुमति होगी। इसके अलावा अन्य देशों से आने वाले दो प्रतिशत यात्रियों की जांच की जाएगी और इस जांच के लिए किसी भी यात्री के नमूने लिए जा सकते हैं।

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