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दिल्ली: नर्सरी में एडमिशन को लगेर बनी रही पहले ही दिन असमंजसों की झड़ी

उसी स्कूल में अपनी बेटी के लिए फॉर्म लेने आर्इं प्रज्ञा ने कहा कि सभी स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया एक साथ होता तो अच्छा था।

Author नई दिल्ली | January 3, 2017 1:31 AM
नर्सरी में बच्चों के दाखिले के लिए कतार में खड़े अभिभावक। (फाइल फोटो)

राजधानी दिल्ली के करीब 1,400 निजी मान्यताप्राप्त स्कूलों (गैरसहायता प्राप्त) की नर्सरी कक्षाओं में आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए दाखिले की दौड़ सोमवार से शुरू हो गई। लेकिन, 31 मार्च को खत्म होने वाली इस दाखिला प्रक्रिया का पहला ही दिन अभिभावकों के लिए असमंजस भरा रहा। अभिभावक सुबह से आवेदन फॉर्म के लिए स्कूलों के चक्कर लगाते नजर आए, लेकिन कई स्कूलों से उन्हें निराश लौटना पड़ा क्योंकि उन्हें या तो यह मालूम नहीं कि सरकारी जमीन पर स्थित स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है या फिर कौन सा स्कूल सरकारी जमीन पर बना हुआ है। सरकार के एक अधिकारी के मुताबिक, इन स्कूलों के लिए दिशानिर्देश तैयार हैं और जल्द ही जारी किए जाएंगे।

दिल्ली शिक्षा निदेशालय द्वारा 19 दिसंबर को जारी अधिसूचना के मुताबिक, डीडीए (दिल्ली विकास प्राधिकरण) की जमीन पर बनी 285 स्कूलों के लिए अलग से दिशानिर्देश और समय-सारणी जारी किए जाएंगे। 30 दिसंबर को फिर से जारी आदेश में सरकारी जमीन पर स्थित स्कूलों को चेताया गया कि निदेशालय की सूचना के अनुसार कुछ स्कूलों ने 2 जनवरी से दाखिला प्रक्रिया शुरू करने करने का नोटिस जारी किया है, जो निदेशालय की अधिसूचना का उल्लंघन है और ऐसा करने को गंभीरता से लिया जाएगा। अपने बेटे के दाखिले के लिए मयूर विहार फेस-1 स्थित अलकॉन स्कूल में फॉर्म लेने आए संजय ने बताया, ‘काफी असमंजस है, यहां तो नोटिस चिपका रखा है कि अभी शिक्षा निदेशालय से दाखिला संबंधी दिशानिर्देश नहीं प्राप्त हुए हैं, हमें कैसे मालूम हो कि कौन सा स्कूल सरकारी जमीन पर है’। उसी स्कूल में अपनी बेटी के लिए फॉर्म लेने आर्इं प्रज्ञा ने कहा कि सभी स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया एक साथ होता तो अच्छा था।

पिछले सत्र में अपनी बेटी को पूर्वी दिल्ली के ट्वीन्स मैरी में दाखिल करा चुकी भावना भी इस बात से अनजान थी कि अलकॉन पब्लिक स्कूल सरकारी जमीन पर बना हुआ है और उसके लिए अभी दिशानिर्देश जारी नहीं हुए हैं। मयूर विहार फेस वन के एचटी अपार्टमेंट में रहने वाली भावना ने कहा कि इस साल उन्हें अपने बेटे को नसर्री में दाखिला दिलवाना है जिसके लिए पहले दिन से ही दौड़-धूप शुरू कर दिया है। ईडब्लूएस वर्ग के अभिभावक भी पहले दिन से स्कूलों के चक्कर लगाते नजर आए। अपने पति और बेटे के साथ आर्इं प्रमिला को पूर्वी दिल्ली के एएसएन पब्लिक स्कूल से इसलिए लौटना पड़ा कि वह डीडीए जमीन पर स्थित है, वहीं एस्टर पब्लिक स्कूल से इसलिए लौटना पड़ा कि वहां फॉर्म मिलने का समय खत्म हो चुका था। प्रमिला ने बताया, ‘मेरा बेटा काफी प्रतिभावान है, वह सुपर डांस प्रतियोगिता में चुना जा चुका है, इसलिए हम चाहते हैं कि वह किसी अच्छे स्कूल में पढ़े। पिछले साल भी कोशिश की थी पर दाखिला नहीं मिला था’।

अलकॉन इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल के प्रिसिंपल अशोक पांडे ने कहा, ‘हम इंतजार कर रहे हैं कि सरकारी जमीन पर स्थित स्कूलों में नसर्री दाखिले के लिए जल्द से जल्द दिशानिर्देश जारी हो ताकि हम दाखिला प्रक्रिया शुरू कर सकें। अगर सभी निजी स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया एक साथ शुरू होती तो अभिभावकों को जरूर सहुलियत होती। हम एक साथ किए जाने के पक्ष में हैं’। हालांकि, शिक्षा निदेशालय ने उन 285 स्कूलों की सूची अपनी अधिसूचना के साथ जारी की है, लेकिन लोगों तक वह सूची पहुंच नहीं पाई है जिससे दाखिला प्रक्रिया के पहले ही दिन अभिभावकों का कीमती समय उन स्कूलों का चक्कर लगाने में बिता जहां अभी प्रक्रिया शुरू ही नहीं हुई है। गौरतलब है कि डीडीए की जमीन पर राजधानी के कई नामी गिरामी स्कूल बने हुए हैं जिनमें दाखिले के लिए अभिभावकों की होड़ रहती है। निदेशालय द्वारा जारी सूची के अनुसार पूर्वी दिल्ली के 53 स्कूल, उत्तरी दिल्ली का एक स्कूल, पश्चिमी दिल्ली के 42 स्कूल, दक्षिणी दिल्ली के 5 स्कूल, उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के 99 स्कूल, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के 54 स्कूल, दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के 9 स्कूल, उत्तर-पूर्वी दिल्ली 19 स्कूल और सेंट्रल/नई दिल्ली के 3 स्कूल सरकारी जमीन पर बने हैं।

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