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NCERT पाठ्यक्रम में नोटबंदी, जीएसटी- 10 साल बाद अपडेट हो रहीं किताबें

भारत में अगली जनगणना के लिए तीन साल से कुछ ज्यादा ही दिन बचे हैं। लेकिन NCERT की कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की किताबों में भारत की साक्षरता के संबंध में जो आकंड़े दिए गए हैं वो साल 2001 पर आधारित हैं।
NCERT ने 3 से 8 साल तक के बच्चों की पढ़ाई के लिए दिशानिर्देश तैयार किए हैं।(Representative Image)

भारत में अगली जनगणना के लिए तीन साल से कुछ ज्यादा ही दिन बचे हैं। लेकिन NCERT की कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की किताबों में भारत की साक्षरता के संबंध में जो आकंड़े दिए गए हैं वो साल 2001 पर आधारित हैं। जबकि आवास की उपलब्धता, बिजली और पाइप से सप्लाई होने वाले पानी के आंकड़े साल 1994 के आंकड़ों पर आधारित हैं। हालांकि NCERT ने अपनी सभी 182 किताबों को अपडेट करने की तैयारी शुरू कर दी है। इन किताबों में नए पाठ्यक्रमों को शामिल किया जाएगा। इनमें हाल में हुए नए विकास जैसे जीएसटी, नोटबंदी, बेटी बचाव बेटी बढ़ाओ के साथ स्वच्छता अभियान जैसे विषयों को शामिल किया जाएगा।

NCERT ने किताबों में कुल 1,334 बदलाव किए हैं। मतलब हर किताब में करीब सात बदलाव किए गए हैं। इसके अलावा पुस्तकों में उच्चारण संबंधित त्रुटियों को दूर किया जाएगा और भाषा को आसान बनाया जाएगा। NCERT के डायरेक्टर ह्रषिकेश सेनापति ने टीओआई को बताया कि किताबें एक महीने में तैयार हो जाएंगी। जिन्हें तुरंत छपाई के लिए भेज दिया जाएगा। किताबों अगले साल अप्रैल में नया सत्र शुरू होने से पहले मार्च में सभी स्कूलों में भेज दी जाएंगी। वहीं कोई भी छात्र व्यक्तिगत स्तर पर ऑर्डर दे सकता है।

उन्होंने आगे बताया कि हमे ऑर्डर मिलने शुरू हो गए हैं। किताबें डाक द्वारा भेजी जाएंगी। खबर के अनुसार NCERT को अगले सत्र के लिए करीब दो करोड़ किताबों का नया ऑर्डर मिल चुका है। हालांकि NCERT के डायरेक्टर के अनुसार किताबों की मांग ज्यादा होने की उम्मीद है। किताबों की मांग को ध्यान रखते हुए NCERT ने प्रिंटर्स और वेंडर्स की संख्या बढ़ाई है। साथ ही किताबों में इस्तेमाल होने वाली पेपर क्लॉलिटी पर भी खासा ध्यान दिया गया है। इस बार किताबों में 80 जीएसएम पेपर का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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