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दो साल में DTC को नहीं मिली एक भी नई बस, हो चुकी हैं 15-16 बैठकें, नहीं निकला कोई नतीजा

राष्ट्रीय राजधानी में बसें नहीं बढ़ने से सार्वजनिक व्यवस्था का हाल दिन-ब-दिन खराब होता जा रहा है।

Author नई दिल्ली | January 31, 2017 2:55 AM
DTC, DTC Bus, Noida DND, Noida DND toll free, Allahabad High court, DND toll free, noida delhi flyover, Noida DND news, Allahabad High court news, jansattaडीटीसी की बसें अभी भी वसूल रही हैं टोल टैक्स

 

दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के बेड़े में पिछले दो सालों में एक भी बस शामिल नहीं हुई है। नई बसों को लेकर पिछले दो साल में 15-16 बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन हर बार तकनीकी पहलुओं में फंसकर बैठक बेनतीजा रह गई। परिवहन सूत्रों की मानें, तो हर बैठक में यही सवाल किया गया कि किस तरह की बसें आएंगी। यह मामला अभी तक उलझा ही है, इसलिए डीटीसी के बड़े में नई बसें भी नहीं आर्इं। परिवहन सूत्रों का कहना है कि हर बार बैठक में नई बसों को लेकर तकनीकी तर्क प्रस्तुत किया जाता रहा है, जिसके कारण अब तक डीटीसी में दो साल में एक भी बस नहीं खरीदी गई। वहीं परिहवन मंत्री मिनी बस लाने की मंशा कई बार जता चुके हैं। उनका मानना है कि मिनी बसें आने से सड़कों पर भीड़भाड़ कम होगी और ट्रैफिक की समस्या भी खत्म होगी। हालांकि एक परिहवन सूत्र का कहना है कि हालिया बैठक के बाद निगम में किलोमीटर स्कीम के तहत बस लाने की योजना पर विचार हो रहा है। डीटीसी के बेड़े में नई बसें शामिल करने को लेकर दिल्ली सरकार पिछले दो साल से विचार ही कर रही है। वहीं परिहवन विभाग के कुछ अधिकारी नहीं चाहते कि डीटीसी में मिनी बसें खरीदी जाएं। अधिकारियों ने फाइलों पर टिप्पणी में लिखा कि मिनी बसें दिल्ली के लिए अनुकूल नहीं है। उनका कहना है कि मिनी बसों में यात्री कम आएंगे, जबकि उसमें भी एक चालक और एक कंडक्टर रहेंगे ही।

सरकार का दावा है कि दो साल में निगम की हालत खराब नहीं हुई है। इसके उलट सरकार यह भी कहती है कि डीटीसी में घाटा बढ़ता जा रहा है, जिसे कम करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। असल में राष्ट्रीय राजधानी में बसें नहीं बढ़ने से सार्वजनिक व्यवस्था का हाल दिन-ब-दिन खराब होता जा रहा है। वहीं बसों की कमी से दिल्ली में सफर करने वाले लोग परेशान हैं। बसों के लिए निगम की तरफ से चार टेंडर भी लाए गए और दो बार तो टेंडर फेल भी हो गए।
निगम के लिए बस लाने की कवायद देखने पर मालूम होता है कि सरकार क्लस्टर स्कीम, मिनी बस, एसी मिनी बस और किलोमीटर स्कीम के बीच फंसी है। अब भी यह कह पाना मुश्किल है कि सरकार किस तरह की बसें लाएगी। डीटीसी में पहले 5200 बसें थीं, जो घटकर 4020 हो गई हैं, क्योंकि निगम ने बिना दरवाजे की स्टैंडर्ड बसों को हटा लिया है। हालांकि डीटीसी के अधिकारियों का कहना है कि नई बसें लाने का प्रयास चल रहा है। इसके लिए प्राइवेट आॅपरेटरों से भी बातचीत की जा रही है। उनका कहना है कि डीटीसी के पास बसें नहीं होने से घाटा बढ़ा है। 2014-15 में यह घाटा करीब 2900 करोड़ रुपए का था, जो 2015-16 में बढ़ कर 3400 करोड़ रुपए हो गया।

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