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30 फुट ऊंचा हो चुका है दूसरा पहाड़, गाजीपुर हादसे के बाद भी नहीं चेता निगम

तमाम उठा-पटक और तमाम कवायद के बावजूद दिल्ली के सबसे पुराने कूड़े घर में पूर्वी दिल्ली के कूड़े डालने में नाकाम रहा है।

gazipur garbageदिल्ली: गाजीपुर में कचरे का पहाड़ टूटा।

पूर्वी दिल्ली नगर निगम फिर गाजीपुर कूड़े घर से फिर से किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। तमाम उठा-पटक और तमाम कवायद के बावजूद दिल्ली के सबसे पुराने कूड़े घर में पूर्वी दिल्ली के कूड़े डालने में नाकाम रहा है। निगम अब दोबारा गाजीपुर में ही कूड़ा डालकर स्थानीय लोगों को मुसीबत में डाल दिया है।  इसी महीने गाजीपुर में कचरा धंसने से दो लोगों की मौत हो गई थी। जिसमें एक स्कूटी सवार महिला थी। इस मामले ने दिल्ली की नागरिक व्यवस्था की पोल खोल दी थी। तब तुरंत उपराज्यपाल ने यहां के कूड़े को भलस्वा में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए थे। पर वहां ग्रामीणों के विरोध और धरना प्रदर्शन के बाद इस फैसले को वापस लेना पड़ा था। गाजीपुर के इस कचरे के पहाड़ गिरने और उसके नीचे दबकर दो मौतों के महज 25 दिनों बाद एक और कचरे का पहाड़ खतरनाक ऊंचाई तक पहुंच चुका है। अब गाजीपुर के स्थानीय लोगों को आशंका है ये पहाड़ किसी भी समय बड़े हादसे की वजह बन सकता है। वजह यह है कि यह सड़क के किनारे है। गाजीपुर हादसे के बाबत राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली सरकार और पूर्वी दिल्ली नगर निगम को यहां के कूड़े के पृथक्करण और निपटान पर एक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने लैंडफिल साइट (ढलाव) में प्रतिदिन लाए जाने वाले करीब आठ सौ मिट्रिक टन कचरे के संबंध में कार्य योजना भी सौंपने को कहा है। अधिकरण ने आदेश दिया कि वह स्पष्ट रूप से बताएं कि ठोक कचरा प्रबंधन नियम 2016 के प्रावधानों के अनुरूप यह ढाव को हरित क्षेत्र में कैसे तब्दील करेंगे। एनजीटी ने दिल्ली के शहरी विकास सचिव और पूर्वी निगम के आयुक्त व मुख्य अभियंता को निर्देश दिया है कि वहां जमा कचरे के पृथक्करण और निपटान के लिए वह क्या तरीका और प्रक्रिया अपनाएंगे इस संबंध में वह स्पष्ट रिपोर्ट और कार्य योजना सौपें। स्पष्ट आदेश है कि ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2016 के प्रावधानों के अनुरूप वह ढलाव को हरित क्षेत्र में कैसे तब्दील करेंगे।

गाजीपुर श्मशान घाट से जुड़े रामकिशन लोहिया, पीएल सूरी और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता राजेश कुमार का कहना है कि हादसे वाली जगह से अलग दूसरी ऐसी जगह कचरे का पहाड़ तैयार हो रहा है जो सड़क से काफी नजदीक है। इस ढेर के पास लाइन से कई छोटी-छोटी दुकानें हैं और हजारों गाड़ियां यहां से गुजरती हैं। मुर्गा मंडी और मयूर विहार फेस तीन कागज मार्केट की तरफ जाने वाली गाड़ियां कभी भी हादसे का शिकार हो सकती हैं। इनका कहना है कि शहर का कूड़ा फेंकने की जगह हाईवे से कम से कम 200 मीटर दूर होनी चाहिए। दिल्ली के उपराज्यपाल ने भी साफ तौर पर गाजीपुर में कूड़ा न फेंके जाने के निर्देश दिए थे। निगम वैकल्पिक व्यवस्था में नाकाम होने पर दूसरा पहाड़ 30 फुट की ऊंचाई तक ला चुका है। गाजीपुर डेयरी पहाड़ के सटे हैं और हमारा मानना है कि निगम तुरंत यहां कूड़ा फेंकने से बाज आएं अन्यथा भलस्वा के ग्रामीण की तरह हम भी आंदोलन करने को बाध्य होंगे। हालांकि पूर्वी निगम के अतिरिक्त आयुक्त विवेक पांडे की दलील है कि कचरा फेंकने की नई साइट की सख्त निगरानी की जा रही है। हम ढहने वाली जगह पर कचरा नहीं डाल रहे।

 

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