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एनसीटीई के क्षेत्रीय कार्यालयों को दिल्ली लाए जाने पर रार..

विकेंद्रीकरण के इस दौर में एनसीटीई का अपने क्षेत्रीय कार्यालयों को दिल्ली लाने का फैसला केंद्रीकरण के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

एनसीटीई के इस फैसले पर न केवल टीईआइ बल्कि अंदरूनी अधिकारियों ने भी आपत्ति जताई है और इसे एनसीटीई के अधिनियम (एक्ट) की भावना के खिलाफ बताया है।

अध्यापक शिक्षण संस्थानों (टीईआइ) की मान्यता और मूल्यांकन के लिए उत्तरदायी राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के चारों क्षेत्रीय कार्यालयों को इस साल एक अक्तूबर से दिल्ली स्थानांतरित किए जाने की योजना है। इस बाबत दिल्ली के द्वारका में 40 करोड़ रुपए की लागत से एक भवन का निर्माण किया गया है। एनसीटीई के इस फैसले पर न केवल टीईआइ बल्कि अंदरूनी अधिकारियों ने भी आपत्ति जताई है और इसे एनसीटीई के अधिनियम (एक्ट) की भावना के खिलाफ बताया है। इस बारे में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने जवाब तलब किया है, जिस पर एनसीटीई का कहना है कि यह एक बड़ा बदलाव है और आपत्तियां आधारहीन हैं।  इस बाबत कई टीईआई ने एमएचआरडी से जवाब मांगा, जिसे मंत्रालय ने 27 जुलाई को एनसीटीई को प्रेषित किया।

एनसीटीई ने 2 अगस्त को एमएचआरडी को दिए जवाब में कहा, ‘टीईआई द्वारा उठाए गए मुद्दे क्षेत्रीय कार्यालयों में पहुंच और संपर्क के संदर्भ में हैं, लेकिन यहां समझना होगा कि एनसीटीई काफी छोटा संगठन है और अपने संसाधनों का फैलाव इसकी कार्यक्षमता को प्रभावित करता है। दिल्ली में क्षेत्रीय कार्यालयों के स्थानांतरण से संसाधनों का सही उपयोग हो सकेगा और इसके संवेदनशील काम में शामिल सभी प्रक्रियाएं और अधिकारियों-कर्मचारियों पर सतत निगरानी रखी जा सकेगी। साथ ही एनसीटीई में ऐसी प्रक्रिया अपनाई जा रही है जिससे एनसीटीई स्टाफ के सामने किसी भी संस्थान को सीधे तौर पर पेश आने की जरूरत नहीं होगी। ऐसी उम्मीद है कि यह कदम एनसीटीई के लिए एक बड़ा बदलाव होगा। इस संबंध में जो आपत्तियां जताई जा रही हैं वे दुर्भावनाओं से प्रेरित और आधारहीन हैं’।

नाम न बताने की शर्त पर एनसीटीई के एक अधिकारी ने कहा, ‘यह फैसला एनसीटीई के अधिनियम के विरुद्ध है, अदालत में जाने से स्थगन मिल सकता है। एनसीटीई का अधिनियम कहता है कि कम से कम चार क्षेत्रीय कार्यालय होंगे और जरूरत पड़ने पर इनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है। अधिनियम में इन चारों को उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम के लिए बताया गया है। दिल्ली में मुख्यालय होगा’। अधिकारी के मुताबिक, ‘इन क्षेत्रीय कमेटियों के कार्यालय उसी क्षेत्र के दूसरे शहर में तो स्थानांतरित किए जा सकते हैं, लेकिन उन्हें दिल्ली लाने के लिए पहले अधिनियम में बदलाव करना होगा क्योंकि एनसीटीई अधिनियम का उद्देश्य विकेंद्रीकरण है, न कि केंद्रीकरण। एनसीटीई के पास अपने संसाधनों को बढ़ाने के लिए पर्याप्त धन है, वैसे भी जब परिषद सभी चीजें आॅनलाइन कर रहा है तो स्थानांतरण की जरूरत वैसे भी नहीं है, इससे विकेंद्रीकरण, पारदर्शिता और अधिनियम की भावना बनी रह सकती थी’। एनसीटीई आॅनलाइन मान्यता की तैयारी कर रहा है।

 

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