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मन की बात में नेहरू को नमन, सावरकर के संघर्ष की सराहना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी। साथ ही, सोमवार 28 मई को वीर सावरकर की जयंती के मद्देनजर उन्हें याद करते हुए कहा कि सावरकर ने ही 1857 के सिपाही विद्रोह को पहली बार आजादी की पहली लड़ाई कहा था। उन्होंने सावरकर […]

Author नई दिल्ली, 27 मई। | May 28, 2018 6:17 AM
पीएम मोदी का मन की बात कार्यक्रम (File Pic)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी। साथ ही, सोमवार 28 मई को वीर सावरकर की जयंती के मद्देनजर उन्हें याद करते हुए कहा कि सावरकर ने ही 1857 के सिपाही विद्रोह को पहली बार आजादी की पहली लड़ाई कहा था। उन्होंने सावरकर के संघर्ष की सराहना की और उनके योगदान की प्रशंसा की। प्रधानमंत्री मोदी ने आकाशवाणी पर प्रसारित अपने मासिक संबोधन ‘मन की बात’ में कहा, ‘आज 27 मई है। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जी की पुण्यतिथि है। मैं पंडित जी को प्रणाम करता हूं। इस मई महीने की याद एक और बात से भी जुड़ी है और वो हैं वीर सावरकर।’ ‘मन की बात’ के रविवार को प्रसारित हुए 44वें संस्करण में प्रधानमंत्री मोदी ने पर्यावरण संरक्षण, योग, प्लास्टिक प्रदूषण, नौसेना की महिला टीम द्वारा विश्व परिक्रमा आदि विषयों पर बात की। उन्होंने भारत में परंपरागत खेलों के खत्म होने पर चिंता जताई।

प्रधानमंत्री ने याद किया कि मई 1857 में भारतीयों ने अंग्रेजों के खिलाफ अपनी ताकत दिखाई थी। उन्होंने कहा, ‘दुख की बात है कि हम बहुत लंबे समय तक 1857 की घटनाओं को केवल विद्रोह या सिपाही विद्रोह कहते रहे। यह वीर सावरकर ही थे, जिन्होंने निर्भीक हो कर लिखा कि 1857 में जो कुछ भी हुआ वह कोई विद्रोह नहीं था, बल्कि आजादी की पहली लड़ाई थी।’ प्रधानमंत्री ने सावरकर के बारे में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कही बातें दोहरार्इं, ‘सावरकर माने तेज, सावरकर माने त्याग, सावरकर माने तप, सावरकर माने तत्व, सावरकर माने तर्क, सावरकर माने तारुण्य, सावरकर माने तीर, सावरकर माने तलवार।’

अपने रेडियो प्रसारण में प्रधानमंत्री ने बताया कि पांच जून को भारत विश्व पर्यावरण दिवस की मेजबानी करेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें प्रकृति के साथ सद्भाव से और जुड़ कर रहना है। महात्मा गांधी ने इसकी वकालत की थी। पेरिस समझौते में जब भारत ने पर्यावरण को बचाने के लिए अग्रिम भूमिका निभाई तो इसके पीछे महात्मा गांघी की सोच थी। प्रधानमंत्री मोदी ने याद दिलाया कि पूरी दुनिया 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाती है। योग करने से साहस पैदा होता है, जो हमारी रक्षा करता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वह घटिया किस्म के प्लास्टिक और पॉलिथीन का इस्तेमाल नहीं करें, क्योंकि इससे पर्यावरण, वन्यजीवन और लोगों की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

परंपरागत खेलों के खत्म होने पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि व्यक्ति के समग्र विकास के लिए शारीरिक और मानसिक फिटनेस जरूरी है। मोदी ने कहा कि उनके ‘फिट इंडिया’ अभियान को मिली प्रतिक्रिया से वह गद्गद हैं। उन्होंने कहा, ‘मेरे लिए यह हार्दिक प्रसन्नता की बात है कि भारतीय क्रिकेट टीम के कैप्टन विराट कोहली ने मुझे अपनी चुनौती में शामिल किया है। मैंने भी चुनौती स्वीकारी है। मेरा मानना है कि इससे फायदा होगा और इस तरह की चुनौती से हमें फिट रहने की प्रेरणा मिलने के साथ ही कई अन्य लाभ होंगे।’ मोदी ने ‘खो खो’, ‘पिट्टू’, ‘लट्टू’ और ‘गुल्ली-डंडा’ जैसे परंपरागत खेलों के विलुप्त होने के कगार पर चले जाने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, ‘हमारे ये खेल खो गए तो हमारा बचपन ही खो जाएगा।’ उन्होंने सुझाव दिया कि इन खेलों को बढ़ावा दिया जाए। पारंपरिक खेलों का अभिलेखागार बनाया जाए।

प्रधानमंत्री ने रोमांच की भावना की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि विकास रोमांच की गोद में ही तो जन्म लेता है। उन्होंने आइएनएसवी तारिणी पर सवार होकर 254 दिनों में पूरी दुनिया की परिक्रमा करने वाली नौसेना की छह महिला कमांडरों की टीम का हवाला देते हुए यह बात कही। उन्होंने माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाले लोगों, कुछ महिलाओं और एक लड़की की भी तारीफ की। उन्होंने माउंट एवरेस्ट से लौटते वक्त वहां का कचरा साफ करने वाली बीएसएफ की टीम को भी सराहा। मोदी ने कटक के चाय विक्रेता डी प्रकाश राव की भी तारीफ की जो अपनी आय का 50 फीसदी हिस्सा एक स्कूल के संचालन में खर्च करते हैं।

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