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नए साल में शुरू होगी नमामि गंगे परियोजना

गंगा को अविरल और निर्मल बनाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्त्वाकांक्षी ‘नमामि गंगे’ परियोजना जनवरी 2016 से शुरू होगी और इसे तीन चरणों में पूरा किया जाएगा...

Author नई दिल्ली | November 2, 2015 2:45 AM
गंगा घाट का एक नजारा (चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रतीक के तौर पर किया गया है।)

गंगा को अविरल और निर्मल बनाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्त्वाकांक्षी ‘नमामि गंगे’ परियोजना जनवरी 2016 से शुरू होगी और इसे तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। इसका पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी। जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। नमामि गंगे पर पहले केंद्र और राज्य के बीच खर्च का बंटवारा 75 और 25 के अनुपात में होने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में इसमें बदलाव किया गया और अब शत प्रतिशत खर्च केंद्र उठाएगा।

इस परियोजना को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण को एक साल में पूरा करने का लक्ष्य है जिसकी शुरुआत उत्तराखंड से होगी। इसमें गंगा नदी की अविरलता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। गंगा नदी पर स्थित करीब 118 शहरों से प्रतिदिन निकलने वाले 363.6 करोड़ लीटर अपशिष्ट और 764 उद्योगों के हानिकारक प्रदूषकों के कारण नदी की धारा को निर्मल बनाना चुनौती बन कर सामने आया है।

इस विषय पर सरकार ने कहा है कि वह इन क्षेत्रों में उद्योगों से गंगा में आने वाले प्रवाह के समीप आधुनिक प्रौद्योगिकी वाले ऐसे यंत्र लगाने जा रही है जिससे 15 मिनट से ज्यादा प्रदूषण फैलने की सूचना मिल जाएगी और उसके आधार पर संबंधित उद्योग के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।

वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि नदी के किनारे स्थित उद्योगों से निकलने वाले प्रवाह को 24 घंटे चलने वाले प्रदूषण निगरानी उपकरण से जोड़ने का काम आगे बढ़ाया जा रहा है। यह नई प्रौद्योगिकी पर आधारित है और कई तरह की श्रेणियों में हैं।

अधिकारी ने कहा कि अगर किसी उद्योग से नदी जल में पांच मिनट से ज्यादा प्रदूषण हुआ, तब एसएमएस आ जाएगा। अगर प्रदूषण 15 मिनट से ज्यादा हुआ तब कानूनी कार्रवाई शुरू हो जाएगी। हम प्रौद्योगिकी के माध्यम से नदियों में प्रदूषण पर लगाम लगाना चाहते हैं।

हाल ही में विभिन्न सरकारी एजंसियों के विशेषज्ञों द्वारा तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि गंगा नदी के तट पर स्थित 118 शहरों से प्रतिदिन निकलने वाले 363.6 करोड़ लीटर अपशिष्ट और 764 उद्योगों के हानिकारक प्रदूषक इस नदी की धारा निर्मल बनाने में बड़ी चुनौती बन गए हैं।

कोलकाता में नदी में प्रतिदिन 53.4 करोड़ लीटर अपशिष्ट, कानपुर में 42.6 करोड़ लीटर, वाराणसी में 29.5 करोड़ लीटर, पटना में 25.2 करोड़ लीटर, इलाहाबाद में 2.32 करोड़ लीटर, मुरादाबाद में 11.7 करोड़ लीटर अपशिष्ट गंगा नदी में गिरते हैं।
राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण से मिली जानकारी के अनुसार, गंगा नदी पर कुल 764 उद्योग अवस्थित हैं जिनमें 444 चमड़ा उद्योग, 27 रासायनिक उद्योग, 67 चीनी मिले, 33 शराब उद्योग, 22 खाद्य एवं डेयरी, 63 कपड़ा एवं रंग उद्योग, 67 कागज और पल्प उद्योग एवं 41 अन्य उद्योग शामिल हैं।

विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में गंगा तट पर स्थित इन उद्योगों द्वारा प्रतिदिन 112.3 करोड़ लीटर जल का उपयोग किया जाता है। इनमें रसायन उद्योग 21 करोड़ लीटर, शराब उद्योग 7.8 करोड़ लीटर, कागज व पल्प उद्योग 30.6 करोड़ लीटर, चीनी उद्योग 30.4 करोड़ लीटर, चमड़ा उद्योग 2.87 करोड़ लीटर, कपड़ा एवं रंग उद्योग 1.4 करोड़ लीटर और अन्य उद्योग 16.8 करोड़ लीटर गंगा जल का उपयोग प्रतिदिन कर रहे हैं।

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