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दिल्‍ली की सड़कों पर रहने वाले 90 फीसदी से ज्‍यादा बच्‍चे ड्रग्‍स लेते हैं, मोदी सरकार का संसद में खुलासा

देश में जहां एक ओर कुछ बच्चे कुपोषण जैसी भयानक बीमारियों के शिकार हो रहे हैं तो वहीं हजारों की आवादी में ऐसे बच्चे भी हैं जिन्हें ड्रग्स जैसे नशीले पदार्थों की लत है।

Author नई दिल्ली | March 30, 2018 4:24 AM

देश में जहां एक ओर कुछ बच्चे कुपोषण जैसी भयानक बीमारियों के शिकार हो रहे हैं तो वहीं हजारों की आवादी में ऐसे बच्चे भी हैं जिन्हें ड्रग्स जैसे नशीले पदार्थों की लत है। यह बात सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री विजय सांपला ने लोकसभा में कही। उन्होंने लोकसभा में सभापति को संबोधित करते हुए कहा कि देश की राजधानी दिल्‍ली की सड़कों पर रहने वाले 90 फीसदी से ज्‍यादा बच्‍चे ड्रग्‍स का सेवन करते हैं। मंत्री ने कहा हाल के महीनों में नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले बच्चों के करीब 46,410 मामले सामने आए हैं, जबकि 21,770 केस तंबाकू, एल्कोहल, गांजा से लेकर इनहेलेंट तक शामिल हैं। इसी साल के शुरुआत माह में AIIMS द्वारा जारी किए गए एक सर्वे में खुलासा हुआ है कि करीब 29 फीसदी बच्चें पड़ोसी दोस्तों के साथ, 19 फीसदी क्यूरियोसिटी और 6 फीसदी बच्चे खराब मौसम से निपटने के लिए नशे का इस्तेमाल करते हैं। AIIMS द्वारा जारी की रिपोर्ट में नॉर्थवेस्ट दिल्ली में 24%, सेंट्रल दिल्ली में 21% और साउथ दिल्ली में 16% नशे के शिकार बच्चे हैं। बता दें कि राजधानी के पार्क, धार्मिक जगहों, रेलवे स्टेशन, बंस स्टेंड और बिजी सड़कों पर ऐसे बच्चे सबसे ज्यादा नशीले पदार्थ करने वाले बच्चे पाए जाते हैं। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक स्ट्रीट किड्स में 840 केस हीरोइन, 210 फार्मास्यूटिकल ऑपिओयड और 420 केस अफीफ के आए हैं।

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इस स्टडी के मुताबिक सबसे ज्यादा बच्चे तंबाकू का नशा करते हैं और उसके बाद शराब, इनहेलेंट, भांग, हेरोइन, अफीम का सेवन करते हैं। सर्वे में इस बात का भी खुलासा हुआ कि नशा करने वाले बच्चों के पेरेंट्स भी नशे की लत के शिकार थे। लिहाजा इससे जाहिर होता है कि बच्चों को ऐसी चीजों का शिकार के पेरेंट्स भी जिम्मेदार हैं।

‘Save the Children एनजीओ ने 2011 के एक सर्वे में खुलासा किया था कि राजधानी में  50,923 बच्चे ऐसी लतों के शामिल थे। लिहाजा अब यह संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है।2015 में आए NCRB के आकड़ों के मुताबिक 34  मामले ऐसे आए हैं जिनमें बताया गया है कि बच्चों की मौत ज्यादा ड्रग्स के सेवन करने से हुई थी। वहीं पंजाब में 13, महाराष्ट्र में 11, गुजरात में 8 ऐसे केस आए थे।

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