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गाय के गोबर से मिलेगा मोक्ष का रास्ता? दिल्ली नगर निगम ने पास किया प्रस्ताव, अंतिम संस्कार में होगा पराली का भी इस्तेमाल

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति ने एक प्रस्ताव मंजूर किया है जिसके मुताबिक अंतिम संस्कार में गाय के गोबर (उपले) और पराली का इस्तेमाल होना चाहिए।

sdmc, cremation, cow dungअंतिम संस्कार की सांकेतिक तस्वीर।

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (SDMC) का मानना है कि गाय के माध्यम से ही मनुष्य को मोक्ष मिल सकता है। SDMC ने एक प्रस्ताव पारित किया है जिसके मुताबिक किसी के अंतिम संस्कार के लिए गाय के गोबर (उपले) और पराली का इस्तेमाल किया जाएगा।

गुरुवार को यह प्रस्ताव पारित किया गया है। इसमें कहा गया है कि इस कदम से गोहत्या को कम किया जा सकेगा। इसके अलावा पर्यावरण का नुकसान भी कम हो जाएगा। स्टैंडिंग कमिटी ने इस प्रस्ताव को मेडिकल रिलीफ ऐंड पब्लिक हेल्थ कमिटी को भेजा है।

मालवीय नगर से पार्षद नंदिनी शर्मा ने प्रस्तावित किया था। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि एसडीएमसी के सभी 104 वॉर्ड में अंतिम संस्कार में उपले का प्रयोग किया जाएगा।  इसमें पराली का भी उपयोग होगा जिससे कि शख्स को मोक्ष मिल जाए क्योंकि वेदों में भी गाय के माध्यम से ही मोक्ष का मार्ग बताया गया है।

इस प्रस्ताव में दावा किया गया है कि लकड़ी से शव को जलाने में जहां लगभग 5 घंटे का समय लगता है वहीं उपले और पराली का प्रयोग करने पर तीन घंटे का ही समय लगेगा और अतिरिक्त सामान का इस्तेमाल भी कम करना होगा। इससे पर्यावरण की भी सुरक्षा होगी और गोहत्या पर भी लगाम लगेगी। फाइनल अप्रूवल के लिए इस प्रस्ताव को सदन में पेश किया जाएगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि धार्मिक मान्यता के आधार पर इसमें कुछ बदलाव किए जा सकते हैं। अगर थोड़ी कम लकड़ी का भी इस्तेमाल होता है और उपले यूज किए जाते हैं तो भी पर्यावरण को काफी फायदा होगा।

अधिकारी ने कहा, ‘कई शहरों में ऐसा पाइलट प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। इसमें भोपाल और नागपुर भी शामिल है। यहां अंतिम संस्कार में गोबर काष्ठ का प्रयोग होता है। एक साल पहले आईआईटी दिल्ली ने भी ऐसा ही प्रोजेक्ट शुरू किया है।’ स्थानीय निकाय के पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट के मुताबिक साल में दिल्ली में कम से कम 80 हजार अंतिम संस्कार होते हैं। उनका कहना है कि अगर यह प्लान सक्सेसफुल होता है तो पशुपालन करने वाले लोगों का वेस्ट भी उपयोग में आ जाएगा और पर्यावरण का नुकसान भी कम होगा। एक अनुमान के मुताबिक लगभग 2 लाख पेड़ों की कटाई राजधानी में अंतिम संस्कार के लिए हो जाती है।

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