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दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को लेकर ईपीसीए ने दिए सुझाव- पार्किंग शुल्क चौगुना हो, मेट्रो किराया घटे,

इसके तहत दिल्ली-एनसीआर में पार्किंग शुल्क चार गुना बढ़ना तय है, जबकि कम व्यस्त घंटों में मेट्रो के किराए में अस्थायी रूप से कटौती भी की जा सकती है।

Author नई दिल्ली | November 8, 2017 3:47 AM
दिल्ली में सुबह का कोहरा।

दिल्ली-एनसीआर में दिन-ब-दिन गहराते वायु प्रदूषण के खतरे की रोकथाम के लिए पर्यावरण प्रदूषण निरोधक और नियंत्रण अधिकरण (ईपीसीए) ने कुछ उपाय सुझाए हैं। इसके तहत दिल्ली-एनसीआर में पार्किंग शुल्क चार गुना बढ़ना तय है, जबकि कम व्यस्त घंटों में मेट्रो के किराए में अस्थायी रूप से कटौती भी की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट की सिफारिश पर बनाए गए हरित निकाय ईपीसीए ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी एक गंभीर स्थिति का सामना कर रही है, जो अगले कुछ दिन तक बनी रहने वाली है। ईपीसीए के अध्यक्ष भूरे लाल और सदस्य सुनीता नारायण ने कार्रवाई योजना के तहत कुछ उपायों की घोषणा की है। ईपीसीए ने निर्देश दिया है कि कम से कम दस दिन तक कम व्यस्त समय में मेट्रो के किराए कम किए जाएं और मेट्रो के कोच व फेरे बढ़ाए जाएं। निकाय ने दिल्ली और आसपास के राज्यों उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा को निर्देश दिया कि ज्यादा बसें चलाकर सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को बेहतर बनाएं। निकाय ने निगम निकायों को दिल्ली-एनसीआर में पार्किंग शुल्क चार गुना बढ़ाने का भी निर्देश दिया।

ईपीसीए ने सड़क निर्माण एजंसियों को दिल्ली-एनसीआर में धूल प्रदूषण नियमों के उल्लंघन पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाने का भी निर्देश दिया। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर की सरकारों से प्रदूषण बढ़ने पर सम-विषम और निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने जैसे उपाय करने को भी कहा गया है। अन्य उपायों में पूरे क्षेत्र में र्इंट भट्ठों, हॉट मिक्स प्लांट और स्टोन क्रशर्स को बंद करना शामिल है। मंगलवार सुबह दिल्ली वालों ने प्रदूषण के एक घने कोहरे के बीच आंखें खोलीं और प्रदूषण का स्तर सामान्य से कई गुना अधिक दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के सदस्य सचिव ए सुधाकर ने ईपीसीए को बताया कि निकटवर्ती पंजाब और हरियाणा से धुएं भरी हवाओं और पूर्वी क्षेत्र से नमी से लदी हवाओं के साथ स्थानीय प्रदूषण से हालात और बिगड़ जाते हैं। सुधाकर ने कहा, ह्यहम अगले दो-तीन दिन में ही किसी नाटकीय बदलाव की उम्मीद नहीं कर रहे। हल्की धुंध प्रदूषण के कणों को हवा में ऊपर जाने नहीं दे रही।ह्ण उन्होंने कहा कि अधिकारियों को 10 नवंबर तक धान की पराली के जलने में कमी आने की उम्मीद है, लेकिन इसके 15 नवंबर तक कम होने की उम्मीद नहीं है।

 

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