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बवाना की आग पर निगम की सफाई, मेयर ने कहा- नहीं दिया था कारखाने को लाइसेंस

मेयर ने साफ तौर पर कहा कि निगम ने इस कारखाने को लाइसेंस जारी ही नहीं किया था। साल 2014 में इस कारखाने के लाइसेंस का आवेदन रद्द कर दिया गया था।

Author नई दिल्ली | January 22, 2018 4:34 AM
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

बवाना की आग निगम के मेयर तक पहुंची तो मेयर ने भी पूरा चिट्ठा सामने रख दिया। रविवार को मेयर ने साफ तौर पर कहा कि निगम ने इस कारखाने को लाइसेंस जारी ही नहीं किया था। साल 2014 में इस कारखाने के लाइसेंस का आवेदन रद्द कर दिया गया था। यह कारखाने के लाइसेंस का आवेदन भी मनोज जैन ने नहीं बल्कि उमा मित्तल नाम की महिला ने किया था।  बावजूद इसके दिल्ली की सिविक एजंसियां होने के नाते निगम आयुक्त को भी 48 घंटे के अंदर जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। अगर कोई निगम कर्मचारी दोषी पाया जाए तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश हैं। उधर, निगम स्थाई समिति के अध्यक्ष ने कहा कि निगम की ओर से पीड़ितों को जो भी मदद मिलनी चाहिए वह राजनीति से ऊपर उठकर मुहैया कराई जाएगी।

10 हजार कारखानों को बवाना में किया गया था स्थानांतरित
दिल्ली के शाहदरा इलाके में मौजूद अवैध फैक्टरियों को बवाना औद्योगिक इलाके में स्थानांतरित किया गया था। इसके लिए दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (डीएसआइआइडीसी) ने करीब 10 हजार कारखानों को बवाना औद्योगिक इलाके में जमीन मुहैया कराई थी। ये जमीन शीला दीक्षित सरकार के दौरान उपलब्ध कराई गई थी। अब डीएसआइआइडीसी की जिम्मेदारी थी कि वह कारखानों की वैधता और प्रमाणिकता की जांच करें। शनिवार रात 17 लोगों की मौत के बाद सवाल उठने लगे हैं।

दमकलकर्मियों के पास रसायन से बचाव के उपकरण नहीं
मेयर अग्रवाल ने कहा कि रही बात बचाव दलों के पास उपकरणों की तो शनिवार रात सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचने के बाद यह भी पता चला कि अग्निशमन विभाग के पास मास्क, आॅक्सीजन और यहां तक जिन केमिकलों से बचाव किया जाता है वह भी पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में दिल्ली सरकार की पूरी जिम्मेदारी बनती है कि वे इस हादसे पर राजनीति छोड़ दोषियों पर कार्रवाई शुरू करें।

डीएसआइआइडीसी दिल्ली सरकार के अधीन आता है लेकिन जिन कारखाना मालिकों को जमीनें दी गई थीं उन्हें कारखाना चलाने के लिए नगर निगम से लाइसेंस लेना होता है। निगम से फैक्टरी मालिकों को दो लाइसेंस लेने होते हैं। पहला लाइसेंस नियमों के मुताबिक बिल्डिंग निर्माण के लिए लेना होता है, लेकिन यहां ऐसा नहीं किया गया। इसे लेकर दूसरे पार्टनर ललित गोयल की भूमिका की पुलिस जांच कर रही है। दूसरा लाइसेंस कारखाना चलाने के लिए लेना होता है। लेकिन पुलिस की गिरफ्त में मौजूद कारखाना मालिक मनोज जैन ने अपने बयान में बताया है कि कोल्ड के्रकर फैक्टरी (जैसे स्टेज पटाखे) चलाने के लिए किसी लाइसेंस की जरूरत नहीं थी। जांच में लाइसेंस प्रक्रिया में उल्लंघन के अलावा ये भी पता चला है कि कारखाना मालिक ने फायर एनओसी भी नहीं ली थी। उधर, उत्तरी दिल्ली नगर निगम के स्थाई समिति के अध्यक्ष तिलक राज कटारिया ने रविवार को हादसे पर दु:ख प्रकट करते हुए कहा कि इस हादसे पर राजनीति छोड़ पीड़ितों तक मदद के लिए आगे आने का समय है। हमेशा की तरह अपनी गलती का आरोप दूसरे पर लगाने की केजरीवाल सरकार की आरोप यहां भी सामने आ गया है।

 

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