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जीएसटी: गुत्थी समझने में जुटा रहा बाजार, चीजें सामान्य होने में लग जाएगा लगभग एक महीना

कुछ ग्राहक सबसे कम कर के दायरे में आ रहे वस्तुओं और सेवाओं का लाभ उठाकर इस ‘ऐतिहासिक कर सुधार’ से खुश भी नजर आए, वहीं कुछ कंपनियां कर में कमी का लाभ दिखा ग्राहक लुभाती दिखीं।

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‘एक देश-एक कर’ के नारे के बीच 30 जून मध्यरात्रि को संसद के सेंट्रल हॉल में जश्न के साथ शुरू जीएसटी (वस्तु व सेवा कर) कई व्यापारियों और ग्राहकों की समझ से बाहर नजर आ रहा है। वहीं, कुछ ग्राहक सबसे कम कर के दायरे में आ रहे वस्तुओं और सेवाओं का लाभ उठाकर इस ‘ऐतिहासिक कर सुधार’ से खुश भी नजर आए, वहीं कुछ कंपनियां कर में कमी का लाभ दिखा ग्राहक लुभाती दिखीं। लेकिन, इन सब के बीच नई कर व्यवस्था से व्यापार प्रभावित हुआ है और व्यापारियों का मानना है कि चीजें सामान्य होने में लगभग एक महीना लग जाएगा।

नई कर प्रणाली के तहत देश ने दो दिन गुजार लिए, लेकिन शायद व्यापारी वर्ग इसके लिए तैयार नहीं था और न ही ग्राहक 28 फीसद के अधिकतम कर दायरे के लिए तैयार थे। निजी व्यापारी वर्ग ही क्यों, केंद्रीय भंडार जैसी सरकारी संस्थानें भी जीएसटी के लिए तैयार नहीं हैं। दिलशाद कॉलोनी स्थित केंद्रीय भंडार ने जीएसटी को कारण बता अपनी दुकान बंद रखी। यही हाल कई बड़े ब्रांड के निजी दुकानों का भी था। मयूर विहार फेस-1 स्थित रिलायंस फ्रेश की दुकान ने भी अपना दुकान बंद रखा। इस दुकान में तो 30 जून से ही जीएसटी के कारण परेशानी चल रही थी, जीएसटी अपडेट करने के कारण इनके कंप्यूटर का सर्वर ही काम नहीं कर रहा था। वहीं अमूल बटर ने जीएसटी के बाद मक्खन पर कम कर कम होने का इस्तेमाल अपने विज्ञापन में कुछ इस मजेदार अंदाज में किया, ‘अपने बॉस की मक्खनबाजी और ज्यादा आकर्षक, मक्खन पर केवल 5 फीसद जीएसटी’। ओला जैसी कंपनियां वर्तमान सेवाकर के एकीकृत कर से विस्थापन के कारण कम खर्चे में वाहन सेवा मुहैया कराने का दावा कर ग्राहकों को लुभाती दिखीं। लेकिन, एक बात जो हर तरफ थी कि लोग इस कर प्रणाली को समझने की कोशिश में लगे हैं और ग्राहकों को बनाए रखने की चुनौती में ग्राहक जुटे हैं।

जागरूकता की कमी

कश्मीरी गेट में आॅटोमोबाइल्स व्यापारी नरेंद्र मदान ने कहा, ‘व्यापारियों के बीच जागरूकता की कमी है, न सरकार, न व्यापार संघों, न ही राजनीतिक दलों ने समझाया, पहले से कुछ जागरूकता अभियान चलाई जाती तो यह मुश्किल नहीं आती। जीएसटी परिषद की बैठक अंतिम समय तक चलती रही, 30 जून को भी बैठक हुई। ऐसे में लोगों को लगा कि यह अभी लागू नहीं हो पाएगा, या छोटे व्यापारियों को छूट मिलेगी और उन्होंने तैयारी नहीं की। अब जाकर वो रसीद छपवा रहे हैं, कंप्युटर लेने शुरू किए हैं, एक हफ्ता अपडेट होने में लगेगा। ट्रांसपोर्टर जैसी व्यापार की अहम कड़ी भी अब जीएसटी के दायरे में है, लेकिन वो अभी समझ नहीं पा रहे हैं और एक तरह से हड़ताल जैसी स्थिति है क्योंकि बुकिंग बंद है और माल नहीं आने-जाने से व्यापार का प्रवाह रूक गया है’।

कोई बड़ी अफरातफरी नहीं
अखिल भारतीय व्यापार संघ के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, ‘जीएसटी के दौर में आरंभिक प्रवेश जो होना चाहिए वह एक तरह से सामान्य रहा है, कोई बड़ी अफरातफरी नहीं रही, लेकिन प्रक्रियात्मक असावधानियां या त्रुटियां हैं उसके लिए व्यापार संघों को विश्वास में लेकर सरकार, व्यापारियों को इसकी बारिकी समझा पाती है तो कम समय में सब कुछ सामान्य होता’। उन्होंने कहा कि सरकार से उनकी मांग है कि अगले 9 महीने यानी 31 मार्च 2018 तक के समय को अंतरिम कॉल घोषित कर इन त्रुटियों के लिए व्यापारियों पर कोई कार्रवाई न की जाए। उन्होंने कहा कि अभी कई व्यापारियों को कर नियम, नई कर दरें नहीं मालूम हैं जिससे थोड़ी परेशानियां हो रही हैं।

जीएसटी नंबर का इंतजार
वहीं कई व्यापारी जीएसटी नंबर के इंतजार में हैं। इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचने के कारोबार में लगे विक्रम (बदला हुआ नाम) ने कहा कि जीएसटी के बारे में पता नहीं है कि कैसे लागू होगा? अभी हमारा जीएसटी नंबर आया ही नहीं है। अभी प्रक्रिया में ही है। इसलिए अभी तक हम कुछ माल बेच नहीं पा रहे हैं। प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि अब देश के सारे व्यापारी जीएसटी पोर्टल पर पंजीकृत होंगे, कच्चे माल से अंतिम उपभोक्ता तक की प्रक्रिया सरकार की निगरानी में होगी, इसलिए भविष्य में बिना बिल के व्यापार मुश्किल है, लेकिन हमें आरंभिक प्रक्रियात्मक मुश्किलों को दूर करना होगा।

चुभ रहा 28 फीसद का कर
वहीं ग्राहकों के लिए जीएसटी का सबसे अधिक चुभने वाला हिस्सा कई चीजों पर लगने वाला 28 फीसद कर रहा। एक ग्राहक ने तो यहां तक कह डाला कि यह जजिया कर है क्या। व्यापारी नरेंद्र मदान का कहना है, ‘उपभोक्ता 28 फीसद के कर को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। मेरे आॅटोमोबाइल सेक्टर में जब ग्राहक को रेट बताते हैं तो वह सोच में पड़ जाता है, महंगा हो गया है बाद में देखता हूं, इससे हमें घाटा हो रहा है’। लेकिन कुछ ग्राहक खुश भी नजर आए। पिज्जा हट से बाहर निकलती प्रज्ञा (बदला हुआ नाम) ने यह कह कर खुशी जाहिर कि इस बार उन्हें पिज्जा खाना सस्ता पड़ा।

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