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GST की निचली दर से अनुपालन सुधरेगा, मुद्रास्फीति की आशंका दूर होगी: CEA

मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) अरविंद सुब्रमण्यन गुरुवार (8 सितंबर) को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की निचली दरों की वकालत करते हुए कहा कि इससे अनुपालन सुधरेगा....

Author नई दिल्ली | September 8, 2016 11:57 PM
मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) अरविंद सुब्रमणियम। (एक्सप्रेस फोटो)

मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) अरविंद सुब्रमण्यन गुरुवार (8 सितंबर) को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की निचली दरों की वकालत करते हुए कहा कि इससे अनुपालन सुधरेगा तथा महंगाई की आशंका दूर होगी। सुब्रमण्यन ने कहा, ‘संतुलन की दृष्टि से देखा जाए, तो हमें निचली जीएसटी दर की ओर देखना चाहिए। उसके बाद यदि आपको लगता है कि राजस्व के मोर्चे पर आप कमी देख रहे हैं, तो इससे निपटने के और तरीके हैं।’ उन्होंने कहा कि जीएसटी की दर तय करने के लिए काफी बाजीगरी की जरूरत होगी और साथ ही बहु उद्देश्यों के बीच सामंजस्य बैठाने की आवश्यकता होगी। लेकिन ऊंची दरों के बजाय निचली दरें बेहतर रहेंगी।

सुब्रमण्यन ने सीएनबीसी टीवी18 से साक्षात्कार में कहा, ‘मेरी प्राथमिकता सभी चीजों के बीच संतुलन बैठाने की होगी। बेहतर होगा कि निचली दरों की ओर झुका जाए, क्योंकि इससे अनुपालन में मदद मिलेगी।’ पिछले साल सुब्रमण्यन की अगुवाई वाली एक समिति ने ज्यादातर वस्तुओं और सेवाओं के लिए 17-18 प्रतिशत की मानक दर का सुझाव दिया था। समिति ने निचली दरों की वस्तुओं के लिए 12 प्रतिशत तथा लग्जरी कार, बूवरेज, मसाला और तंबाकू उत्पादों के लिए 40 प्रतिशत की दर सुझाई थी। बहुमूल्य धातुओं के लिए समिति ने जीएसटी की दर 2 से 6 प्रतिशत के बीच रखने का सुझाव दिया था।

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लंबे समय से अटके जीएसटी संविधान संशोधन विधेयक को संसद ने पिछले महीने पारित कर दिया। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी आज इस विधेयक को मंजूरी दे दी। जीएसटी समयसीमा के बारे में सीईए ने कहा कि इसके लिए तैयारियां लंबे समय से चल रही हैं। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि इसके लिए काफी काम चल रहा है और उम्मीद की जानी चाहिए कि एक अप्रैल की समयसीमा में इसे लागू करने के लिए तकनीकी पहलू को भी पूरा कर लिया जाएगा। लेकिन ये काफी सख्त समयसीमा है, लेकिन सरकार इसे हासिल करने को प्रतिबद्ध है।’

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