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कतार से बचने को वाहन चालकों का अनोखा जुगाड़

प्रदूषण जांच केंद्रों पर भी दो पहिया वाहन चालक सुबह के समय प्रदूषण प्रमाण पत्र बनवाने के लिए वाहन छोड़ जा रहे हैं। उसके बाद दोपहर के समय या फिर छुट्टी के समय वाहन लेने आते हैं।

Author Published on: September 16, 2019 6:08 AM
1 सितंबर से ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर भारी भरकम जुर्माना लग रहा है।

निर्भय कुमार पांडेय

नया मोटर वाहन संशोधन बिल-2019 के लागू होने के बाद प्रदूषण जांच केंद्रों पर वाहन चालकों की लंबी कतार देखने को मिल रही है। इस वजह से चालकों को प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कई घंटे इंतजार करना पड़ रहा है। पर दो पहिया वाहन चालकों ने इसका तोड़ निकाल लिया है। लोग अपने दफ्तर के आस पास प्रदूषण जांच केंद्रों पर सुबह अपना दोपहिया वाहन छोड़ जा रहे हैं और दोपहर में मध्यान्ह भोजन के समय वे प्रमाण पत्र बनवाकर वाहन ले जाते हैं।

नेहरू प्लेस में सरकारी और निजी कंपनियों के दफ्तर काफी संख्या में हैं, जहां पर प्रतिदिन हजारों लोग अपने निजी वाहनों से आते हैं। यही कारण है कि कालकाजी, गोविंदपुरी और ग्रेटर कैलाश, कैलाश कॉलोनी और गढ़ी गांव के आसपास के प्रदूषण जांच केंद्रों पर वाहनों की लंबी कतार देखने को मिलती है। इसी प्रकार ओखला औद्योगिक क्षेत्र के आसपास के इलाकों में स्थित प्रदूषण जांच केंद्रों पर भी दो पहिया वाहन चालक सुबह के समय प्रदूषण प्रमाण पत्र बनवाने के लिए वाहन छोड़ जा रहे हैं। उसके बाद दोपहर के समय या फिर छुट्टी के समय वाहन लेने आते हैं।

आशुतोष कुमार सिंह ने बताया कि उनका दफ्तर नेहरू प्लेस में है। वह सुबह वाहन छोड़ गए थे, दोपहर में लेने आए हैं। उन्होंने बताया कि जांच कर रहे कर्मचारी ने बताया था कि करीब तीन-चार घंटे बाद ही उनकी मोटरसाइकिल का नंबर आ सकेगा। यही कारण है कि वह सुबह करीब नौ बजे कालकाजी स्थित भारत पेट्रोलियम के पास प्रदूषण जांच केंद्र पर मोटरसाइकिल दे गए थे और दोपहर बाद लेने आए थे। बता दें कि प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (पीयूसी) न होने पर जुर्माना की राशि अब 10000 रुपए है।

कुछ ऐस ही नजारा मथुरा रोड पर स्थित मोहन कॉपरेटिव क्षेत्र का भी है, जहां पर बड़ी संख्या में निजी कंपनियों के दफ्तर हैं। यहां काम करने वाले लोग सरिता विहार स्थित भारत पेट्रोलियम और इंडियन आॅयल के पेट्रोल पंपों पर स्थित केंद्रों पर अपनी मोटरसाइकिल जांच के लिए दे जा रहे हैं। सुभाष कुमार का कहना है कि प्रदूषण प्रमाण पत्र नहीं होने से पकड़े गए तो 10 हजार जुर्माना देने के बाद पूरे महीने का बजट खराब हो जाएगा।

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