कैसे चलती है संसद, जानें ये नियम - Loksabha proceedings know the rule of parliament proceedings ahead of no confidence motion narendra modi rahul gandhi - Jansatta
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कैसे चलती है संसद, जानें ये नियम

स्थगन प्रस्ताव: सरकार की किसी गलती या संवैधानिक विफलता पर स्थगन प्रस्ताव लाया जा सकता है। अविलंबनीय लोक महत्व के मुद्दे उठाना स्थगन प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य उद्देश्य ऐसे मुद्दे हैं जिनके गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जल्द उठाना। एक सांसद एक दिन में स्थगन प्रस्ताव का एक से ज्यादा नोटिस नहीं दे सकता है।

लोकसभा का दृश्य (पीटीआई फोटो)

लोकसभा में टीडीपी द्वारा नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ लाये गये अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा चल रही है। संसद की पूरी प्रणाली संसदीय नियमों के आधार पर चलती है। सांसद लोक महत्व के मुद्दे पर सवाल पूछ सकें। इसके लिए संविधान में कायदे कानूनों की विस्तार से चर्चा की गई है। स्पीकर और लोकसभा में मौजूद अधिकारी इन नियमों के मुताबिक सांसदों को अपनी राय रखने और लोकहित से जुड़े सवाल पूछने का मौका देते हैं। इन नियमों को सरसरी निगाह से इस तरह से समझा जा सकता है।

नियम 193 के तहत चर्चा: अविलंबनीय लोक महत्व के विषय पर चर्चा उठाने का प्रावधान। चर्चा उठाने वाले सदस्य को उत्तर देने का अधिकार नहीं। नियम 193 के तहत चर्चा में सदन के सामने कोई प्रस्ताव नहीं लाया जाता। नियम 193 के तहत चर्चा में चर्चा के बाद मतदान का प्रावधान नहीं है। सदस्य एक ही सत्र में दो से अधिक चर्चा के प्रस्ताव नहीं रख सकते।
नियम 184 के अधीन प्रस्ताव: अध्यक्ष की अनुमति के बगैर किसी विषय पर चर्चा नहीं।प्रस्ताव के प्रस्तावक को उत्तर देने का अधिकार।
मंत्रियों के वक्तव्य: संबंधित मंत्री 6 महीने में एक बार अपने मंत्रालय के संबंध में वक्तव्य देते हैं।  स्थायी समितियों की रिपोर्ट पर अमल के बारे में मंत्री देते हैं वक्तव्य।
नियम 184 के तहत चर्चा: लोकहित के किसी विषय पर अध्यक्ष की अनुमति के बाद चर्चा।  चर्चा के विषय की मंजूरी का अधिकार अध्यक्ष के पास। चर्चा के लिए समय का आवंटन स्पीकर के निर्देशानुसार तय होता है। प्रस्ताव के प्रस्तावक को चर्चा का उत्तर देने का अधिकार।
नियम 342 के तहत प्रस्ताव: किसी नीति या स्थिति पर विचार के प्रस्ताव नियम 342 के तहत होते हैं। इसके तहत मतदान का प्रावधान नहीं है।
कोरम: सभा की बैठक के लिए अध्यक्षासीन समेत 55 सदस्यों की मौजूदगी अनिवार्य। कोरम पूरा नहीं रहने पर घंटी बजाकर सदस्यों को सूचित किया जाता है।  तीसरी घंटी बजने के बाद कोरम ना पूरा हो तो बैठक स्थगित की जाती है।
नियम 377 के अधीन मामले: नियम 377 के अधीन ऐसे मुद्दे उठाये जाते हैं जो प्वाइंट ऑफ ऑर्डर के तौर पर नहीं उठाए जा सकते।
महासचिव को लिखित सूचना देकर सदस्य उठा सकते हैं लोकहित के मुद्दे लिखित सूचना देने पर ही सदन में मामला उठाने की अनुमति।
नियम 377 के तहत मामला उठाने के लिए एक दिन में 20 सांसदों को मौका। एक सांसद एक सप्ताह में एक ही मुद्दा उठा सकता है।
शुक्रवार को नियम 377 के अधीन मामला उठाने की अनुमति नहीं। उठाए गये मुद्दों का जवाब संबंधित मंत्री सीधे सदस्यों को भेजते हैं।

ध्यानाकर्षण प्रस्ताव: स्पीकर की अनुमति से लोकहित के मुद्दे उठाने के लिए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव। किसी मुद्दे की ओर संबंधित मंत्री का ध्यान दिलाने के लिए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव को प्रश्नकाल के तुरंत बाद लिया जा सकता है। प्रस्ताव पर एक दिन में 30 से 45 मिनट का समय आवंटित किया जाता है। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाने वाले सदस्य को 10 मिनट दिये जाते हैं। अन्य सदस्यों को चर्चा के लिए 5-5 मिनट का सदस्य दिया जाता है। मंत्री तुरंत या संक्षिप्त वक्तव्य दे सकते हैं या और समय की मांग कर सकते हैं।

स्थगन प्रस्ताव: सरकार की किसी गलती या संवैधानिक विफलता पर स्थगन प्रस्ताव लाया जा सकता है। अविलंबनीय लोक महत्व के मुद्दे उठाना स्थगन प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य  उद्देश्य ऐसे मुद्दे हैं जिनके गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जल्द उठाना।  एक सांसद एक दिन में स्थगन प्रस्ताव का एक से ज्यादा नोटिस नहीं दे सकता है। राष्ट्रपति के अभिभाषण के दिन स्थगन प्रस्ताव का नोटिस नहीं।  प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए सदस्य सभा की अनुमति मांगते हैं। विषय अनुकुल लगने पर सदस्य को प्रस्ताव लाने की अनुमति प्रस्ताव के पक्ष में 50 से ज्यादा सदस्य होने पर प्रस्ताव रखने की अनुमति। स्थगन प्रस्ताव मंजूर होते ही सभा स्थगित हो जाती है।

प्रश्नकाल: कार्यवाही के पहले घंटे हर रोज प्रश्नकाल। सांसदों से पूछे गये सवाल का जवाब देते हैं संबंधित मंत्री। तारांकित प्रश्नों के मौखिक जवाब दिये जा सकते हैं। तारांकित प्रश्नों के जवाब में उसी समय पूरक प्रश्न पूछे जा सकते हैं। एक सवाल के जवाब में दो पूरक प्रश्न पूछे जा सकते हैं।  प्रश्नकाल में प्रतिदिन उत्तर के लिए 20 प्रश्न सूचीबद्ध। अतारांकित प्रश्न के उत्तर लिखित रूप में दिये जाते हैं।
शून्यकाल: प्रश्नकाल के तुरंत बाद शून्यकाल शुरू होता है। प्रश्न काल के बाद उठाये जाते हैं लोक महत्व के अविलंबनीय मुद्दे।
शून्यकाल में उठाये गये मुद्दों का जवाब देने के लिए सरकार बाध्य नहीं। दो भागों में होता है शून्यकाल। प्रश्नकाल के तुरंत बाद सद्स्यों को मुद्दे उठाने की अनुमति।

आधे घंटे की अल्पाविधि चर्चा: तारांकित या अतारांकित प्रश्न के उत्तर अस्पष्ट होने पर आधे घंटे चर्चा का प्रावधान। सदस्य को लगे कि उत्तर में पूरी सूचना नहीं दी गई है तो आधा घंटे की चर्चा की मांग कर सकते हैं।

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