पुरानी दिल्ली का कौन होगा नया दावेदार

चांदनी चौक संसदीय क्षेत्र दिल्ली की सातों संसदीय क्षेत्रों में सबसे पुराना है। आजादी के बाद देश में जब दूसरी बार आम चुनाव हुए तब इस लोकसभा सीट से राधारमन कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। कांग्रेस के जयप्रकाश अग्रवाल, कपिल सिब्बल और भाजपा के विजय गोयल व सिकंदर बख्त सरीखे धुरंधर राजनेताओं को इसी संसदीय सीट से लोकसभा तक पहुंचने का मौका मिला।

चांदनी चौक देश के सबसे पुराने संसदीय क्षेत्रों में शुमार है। (Source: आरुष चोपड़ा)

अजय पांडेय

चांदनी चौक संसदीय क्षेत्र दिल्ली की सातों संसदीय क्षेत्रों में सबसे पुराना है। आजादी के बाद देश में जब दूसरी बार आम चुनाव हुए तब इस लोकसभा सीट से राधारमन कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। कांग्रेस के जयप्रकाश अग्रवाल, कपिल सिब्बल और भाजपा के विजय गोयल व सिकंदर बख्त सरीखे धुरंधर राजनेताओं को इसी संसदीय सीट से लोकसभा तक पहुंचने का मौका मिला। जबकि वर्तमान केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, कभी आम आदमी पार्टी में रहे आशुतोष और दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता को इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा।

चांदनी चौक को हम विरासतों का क्षेत्र भी कह सकते हैं। पुरानी दिल्ली, शाहजहांनाबाद आदि नामों से विख्यात यह संसदीय क्षेत्र कायदे से इस शहर के इतिहास का मूक साक्षी है। दरअसल, चांदनी चौक मुगल बादशाहों द्वारा बसाया गया बाजार था। सामने लाल किला है जो आज भी शाहजहां से लेकर औरंगजेब तक और बहादुरशाह जफर से लेकर अंग्रेज बहादुरों तक की हुकूमत की गवाही देता है। उधर, जामा मस्जिद है जहां आज भी दुनिया भर के सैलानी पहुंचते हैं। दस दरवाजों वाला मुगलों का बसाया यह पुराना शहर बाहरी साज-सज्जा की दृष्टि से भले कुछ बदला हुआ हो, लेकिन इस क्षेत्र का मिजाज आज भी पुराना है। जिस गंगा-जमुनी तहजीब की हम अक्सर चर्चा करते हैं, उसकी जीती-जागती मिसाल यदि आप कहीं ढूंढ़ सकते हैं तो यही ढूंढ़ सकते हैं। इस संसदीय क्षेत्र में मुसलिम आबादी भी काफी संख्या में है लेकिन यह लोकसभा क्षेत्र सांप्रदायिक सौहार्द का अभिनव उदाहरण है।

चांदनी चौक दिल्ली का ही नहीं देश के चुनिंदा थोक बाजारों में शुमार किया जाता है। आलम यह है कि देश के दूर-दराज के क्षेत्रों में पैदा होने वाले खाद्यान्न व अन्य वस्तुओं का कारोबार भी इसी बाजार से होता है। चाहे खाद्यान्न हो, कपड़ें हों, सोना-चांदी हो, मेवे हों या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हों, यह बाजार हर मामले में अव्वल है। इस इलाके में अब भी पुराने जमाने की वास्तुकला को देखा जा सकता है। रहन-सहन का अंदाज भी थोड़ा अलहदा है। कम से कम इतना तो है ही कि नई दिल्ली घूमने के बाद जब इस पुरानी दिल्ली में पहुंचेंगे तो जीवनशैली में अंतर को साफ तौर पर महसूस कर सकेंगे। चाहे परांठे वाली मशहूर गली हो अथवा जेलबी की मशहूर दुकान, दिल्ली के किसी अन्य इलाके में ऐसी गलियां नहीं मिलेंगी। कहते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी यहां की जलेबी खाने अक्सर आते थे। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के घर पर होने वाली दावतों में भी अक्सर पुरानी दिल्ली के हलवाई जाते थे। चांदनी चौक लोकसभा क्षेत्र भी है और विधानसभा क्षेत्र भी है। इसके अलावा नौ और भी विधानसभा क्षेत्र हैं। आदर्श नगर और त्रिनगर विधानसभा क्षेत्रों को घूमते हुए आपको पता चलेगा कि ठेठ दिल्ली वाले असल में इधर ही रहते हैं। चाहे वे वैश्य समुदाय के हों अथवा गुर्जर समाज के, दलित समाज के हों अथवा अन्य समुदायों के। जिनकी पीढ़ियां दिल्ली में बीत गर्इं, वे लोग आपको इन इलाकों में मिलेंगे। उधर, जब आप शालीमार बाग और मॉडल टाउन की ओर बढ़ेंगे तो आपको एक से बढ़कर एक मनमोहक इमारतें दिखेंगी जो बताएंगी कि चांदनी चौक के सेठों की रिहाइश इस ओर है। यह और बात है कि बड़ी संख्या में झुग्गी-झोपड़ी बस्तियां भी मिल जाएंगी। इसी प्रकार शकूरबस्ती और वजीरपुर विधानसभा क्षेत्रों को घूमते हुए गांव, कारखाने और औद्योगिक क्षेत्र भी दिखते हैं।

दिल्ली में मेट्रो की सुविधा से यह इलाका भी जुड़ा हुआ है। बसों की सुविधा है। जगह-जगह बने फ्लाईओवरों ने भी यातायात को आसान बनाया है जबकि रेलवे का नेटवर्क भी स्थानीय आवाजाही के लिए उपलब्ध है। स्कूल-कॉलेज से लेकर बड़े-बड़े पार्क तक तमाम नागरिक सुविधाएं यहां उपलब्ध हैं हालांकि ऐसे इलाके भी हैं जहां पेयजल की आपूर्ति की समस्या है। सरकारी से लेकर निजी तक बड़े-बड़े अस्पताल इस क्षेत्र में मौजूद हैं। सही बात तो यह है कि मोटे तौर पर यह संसदीय क्षेत्र दिल्ली के संभ्रांत लोगों की बड़ी संख्या में मौजूदगी के लिए मशहूर है। दिल्ली में जब बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, झारखंड सहित देश के अन्य क्षेत्रों के लोग आए तो उनकी बसावट मोटे तौर पर शहर के किनारों पर ही ज्यादा हुई लेकिन शहर के भीतरी हिस्सों में भी बड़ी संख्या में झुग्गी-झोपड़ी कॉलोनियां बस गर्इं। इस संसदीय क्षेत्र में आने वाले मॉडल टाउन विधानसभा क्षेत्र में बड़ी संख्या में झुग्गी-झोपड़ी कॉलोनियां हैं। चुनावी हार-जीत तय करने में भी इनकी अहम भूमिका होती है। इसी प्रकार वजीरपुर विधानसभा क्षेत्र में भी ऐसे मतदाताओं की संख्या काफी है। पिछले विधानसभा चुनाव में जब शालीमार बाग विधानसभा क्षेत्र में आम आदमी पार्टी ने जीत दर्ज की तो सियासी पंडितों का अनुमान धराशायी हुआ क्योंकि यह विधानसभा क्षेत्र भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है। इसी प्रकार मटिया महल अथवा बल्लीमरान में मुसलिम अल्पसंख्यक मतदाताओं की बड़ी तादाद मिलेगी। मुगलकाल का शाही अंदाज न सही, लेकिन उसकी हल्की सी झलक आपको इन इलाकों में जरूर दिखेगी। खास तौर पर पहनावे से लेकर खान-पान तक का पुराना अंदाज यहां देखा जा सकता है। मैकडोनाल्ड और केएफसी सरीखे बहुराष्टीय रेस्तरां की मौजूदगी के बावजूद अब भी ठेठ पुरानी दिल्ली का जलवा कायम है।

एक नजर में चांदनी चौक
’सांसद- डॉक्टर हर्षवर्धन, भाजपा
’उपविजेता- आशुतोष, ‘आप’
’मतदाताओं की कुल संख्या- 14.47 लाख
’विधानसभा क्षेत्र- आदर्श नगर, शालीमारबाग, शकूरबस्ती, त्रिनगर, वजीरपुर, मॉडल टाउन, सदर बाजार, चांदनी चौक, मटिया महल और बल्लीमारान
’समस्या- मशहूर शायर मिर्जा गालिब और दिल्ली की गलियों से बेपनाह मोहब्बत करने वाले जौक के इस शहर के संसदीय क्षेत्र में घूमते हुए यदि सड़क जाम में फंस जाएं तो कोई ताज्जुब नहीं क्योंकि अवैध अतिक्रमण और सड़क जाम इस क्षेत्र की पुरानी समस्या है। पार्किंग की मारामारी आपको इस क्षेत्र में मिलेगी।

खास बातें
’देश के सबसे पुराने संसदीय क्षेत्रों में शुमार
’1957 के आम चुनाव में राधा रमन पहली बार सांसद चुने गए
लाल किला और जामा मस्जिद जैसी ऐतिहासिक विरासतें यहां मौजूद हैं
’कांग्रेस के जयप्रकाश अग्रवाल, कपिल सिब्बल, भाजपा के विजय गोयल यहां से लोकसभा जा चुके हैं
’डॉक्टर हर्षवर्धन ने आम आदमी पार्टी के आशुतोष को करीब 1 लाख, 36 हजार मतों से हराया था
’दो बार यहां से सांसद रहे कपिल सिब्बल करीब पौने दो लाख वोट जुटाकर तीसरे स्थान पर रहे थे

सांसद का दावा
चांदनी चौक क्षेत्र के सांसद और केंद्रीय मंत्री डॉ हर्षवर्धन कहते हैं कि उनके लिए राजनीति एक पवित्र यज्ञ है, जहां निष्ठा, समर्पण, और ईमानदारी से ही लोकसेवा की जा सकती है। राजनीति अर्थ संचय करने, पद और प्रतिष्ठा हासिल करने का माध्यम कतई नहीं है। उनका यह भी कहना है कि वे एक ऐसी दिल्ली का सपना देखते हैं जहां तमाम आधारभूत सुविधाएं बगैर किसी बाधा के उपलब्ध हों। अंतरराष्टीय पैमाने पर दिल्लीवासियों को वे सभी सुख सुविधाएं मिलें जो विकसित देशों के नागरिकों को प्राप्त होती हैं। उनका कहना है कि अपने पांच वर्ष के कार्यकाल में उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र में अनगिनत विकास कार्य कराए हैं। रानी झांसी फ्लाईओवर अपने आप में विकास की बेहतरीन बानगी है। विकास कार्यों की फेहरिस्त बहुत लंबी है।

विरोध के बोल
हर्षवर्धन के खिलाफ चुनाव लड़े आम आदमी पार्टी के आशुतोष पार्टी छोड़ चुके हैं जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार कपिल सिब्बल राज्यसभा पहुंच चुके हैं। सांसद बनने के बाद हर्षवर्धन क्षेत्र में आए ही नहीं। इस संसदीय क्षेत्र में 70 से ज्यादा झुग्गी-झोपड़ी कलस्टर हैं। इनकी हालत जाकर देखिए तो आपको सांसद के दावों का पता चल जाएगा। उसके अलावा सीलिंग इस इलाके का बड़ा मुद्दा है।
-हरि किशन जिंदल, अध्यक्ष, आदर्श नगर जिला कांग्रेस कमेटी

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